न्यायालय के आदेशों की पालना करने के बजाय उन्हें चुनौती देने का आरोप
चंडीगढ़/रेवाडी, 4 नवंबर 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने अतिथि अध्यापकों और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के मुद्दे पर हरियाणा की भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है। चुनाव में कर्मचारियों को नियमित करने का वादा करने वाली भाजपा अब न्यायालय के आदेशों की पालना करने के बजाय उन्हें चुनौती देने के कानूनी रास्ते तलाश रही है।
विद्रोही ने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 10,757 अतिथि अध्यापकों को नियमित करने संबंधी आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की वर्ष 2013 की नीति के तहत अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने से संबंधित उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की पालना करने के बजाय सरकार पुनर्विचार याचिका के माध्यम से उन्हें चुनौती दे रही है।
उन्होंने सरकार के इस रुख को कर्मचारी विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारियों में अधिकांश कांग्रेस शासनकाल में भर्ती हुए थे, इसलिए भाजपा सरकार उनके प्रति राजनीतिक विद्वेष से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े मामलों में ऐसा रवैया अनुचित है।
विद्रोही ने कहा कि वर्ष 2013-14 में अतिथि अध्यापकों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना और भूख हड़ताल की थी। उनके अनुसार, फरवरी 2014 में तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा और भाजपा नेता मनोहरलाल खट्टर ने धरनास्थल पर पहुंचकर अतिथि अध्यापकों को नियमित करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अक्टूबर 2014 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी सत्ता में आते ही अतिथि अध्यापकों को पक्का करने का वादा किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2014 में सत्ता मिलने के बाद भाजपा अपने चुनावी वादे से पीछे हट गई, जिसके चलते अतिथि अध्यापकों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। विद्रोही ने कहा कि अब न्यायालय से राहत मिलने के बावजूद सरकार इन अध्यापकों को नियमित करने के लिए तैयार नहीं है।
विद्रोही ने सवाल उठाया कि जो सरकार अपने चुनावी वादे पूरे करने और कर्मचारियों के पक्ष में आए न्यायालय के आदेशों की पालना करने को तैयार नहीं है, वह स्वयं को कर्मचारी हितैषी कैसे बता सकती है? उन्होंने सरकार से अतिथि अध्यापकों और पात्र अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में अपने वादे निभाने की मांग की।









