राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक की मेजबानी हरियाणा को दिलाने की पैरवी करें मुख्यमंत्री : दीपेंद्र हुड्डा

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

खिलाड़ियों के योगदान के आधार पर मेजबानी या सह-मेजबानी की माँग, खेल सुविधाओं की बदहाली पर सरकार को घेरा

चंडीगढ़, 29 अक्टूबर। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से माँग की है कि वह वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और वर्ष 2036 के ओलंपिक की मेजबानी अथवा सह-मेजबानी हरियाणा को दिलाने के लिए प्रधानमंत्री के समक्ष पैरवी करें। गुजरात में निवेश आकर्षित करने के कार्यक्रम में भाग लेने गए मुख्यमंत्री से उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हरियाणा के खिलाड़ियों के योगदान को देखते हुए प्रदेश को बड़े खेल आयोजनों और उनसे विकसित होने वाली सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।

हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के कांग्रेस सांसद लगातार राष्ट्रमंडल खेल प्रदेश में कराने की माँग उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, इन आयोजनों से जुड़े निवेश का अनुमान करीब दो लाख 34 हजार करोड़ रुपये है। उन्होंने तर्क दिया कि इतनी बड़ी राशि से खेल परिसर और अन्य सुविधाएँ ऐसे क्षेत्रों में विकसित होनी चाहिए, जहाँ अधिक से अधिक खिलाड़ी उनका उपयोग कर देश के लिए पदक जीत सकें।

उन्होंने दावा किया कि हरियाणा के खिलाड़ी देश के लिए 70 प्रतिशत से अधिक स्वर्ण पदक जीतकर लाते हैं, इसलिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर प्रदेश की दावेदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालाँकि, उनके बयान में इस आँकड़े से संबंधित प्रतियोगिता अथवा अवधि का उल्लेख नहीं किया गया है।

हुड्डा ने कहा कि मेजबानी मिलने से हरियाणा में नए खेल मैदान, प्रशिक्षण अकादमियाँ, खेल गाँव, मेट्रो रेल और राजमार्ग जैसी सुविधाएँ विकसित हो सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बड़े आयोजनों और निवेश को गुजरात तक केंद्रित कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार ने इन खेलों की मेजबानी या सह-मेजबानी के लिए प्रस्ताव तक नहीं भेजा।

खेल मैदानों के रखरखाव और खिलाड़ियों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

प्रदेश की खेल सुविधाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए हुड्डा ने कहा कि हरियाणा को कम से कम सह-मेजबान बनाने से यहाँ के खेल ढाँचे पर भी निवेश हो सकेगा। उन्होंने दावा किया कि देश की लगभग दो प्रतिशत आबादी वाले हरियाणा की ओलंपिक दल में करीब 21 प्रतिशत और पदकों में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रहती है। इसके बावजूद, उनके अनुसार, प्रदेश को खेलो इंडिया योजना के तहत पर्याप्त धन नहीं मिल रहा।

हुड्डा ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान विकसित किए और खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति लागू की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इस नीति तथा विद्यालय स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान और प्रोत्साहन की व्यवस्था को समाप्त कर दिया। उनके अनुसार, इस व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति की बेटियों को जिला या राज्य स्तर तक पहुँचने पर मिलने वाली 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी बंद कर दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय बने 481 खेल मैदानों के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया गया और खेल प्रशिक्षण केंद्रों की स्थिति भी खराब हुई है। अभ्यास के दौरान जर्जर बास्केटबॉल खंभे गिरने से दो खिलाड़ियों की मृत्यु का उल्लेख करते हुए उन्होंने खेल परिसरों की सुरक्षा और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की माँग की।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

और पढ़ें