बच्चों में बढ़ता निकट दृष्टिदोष, बदलनी होगी दिनचर्या

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2050 तक विश्व की लगभग आधी आबादी के प्रभावित होने का अनुमान; बाहर खेलने, नियमित जाँच और पढ़ाई के बीच विश्राम पर देना होगा ध्यान

डॉ. विजय गर्ग

बच्चों में दूर की वस्तुएँ साफ दिखाई न देने की समस्या बढ़ती चिंता का विषय है। कक्षा में श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई, किताब को आँखों के बहुत पास रखना और बार-बार आँखें सिकोड़कर देखना इसके संकेत हो सकते हैं। निकट दृष्टिदोष, जिसे मायोपिया कहा जाता है, केवल चश्मे के बढ़ते नंबर का मामला नहीं है। समय पर पहचान और उचित देखभाल न होने पर यह बच्चों की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।

वर्ष 2016 में प्रकाशित एक वैश्विक अध्ययन ने अनुमान लगाया था कि 2050 तक दुनिया की लगभग 49.8 प्रतिशत आबादी निकट दृष्टिदोष से प्रभावित हो सकती है। यह भविष्य का अनुमान है, निश्चित परिणाम नहीं। इसका अर्थ यह भी नहीं है कि इतनी आबादी की आँखों की रोशनी चली जाएगी। निकट दृष्टिदोष में दूर की वस्तुएँ धुँधली दिखाई देती हैं और उचित चश्मे से सामान्यतः स्पष्ट देखने में मदद मिलती है।

बदलती आदतों की भूमिका

बच्चों की दिनचर्या में मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग बढ़ा है। पढ़ाई और मनोरंजन के दौरान लगातार पास की वस्तुओं को देखना तथा बाहर कम समय बिताना निकट दृष्टिदोष के जोखिम से जुड़े हैं। पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस समस्या के लिए केवल मोबाइल को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा।

लंबे समय तक उपकरणों पर देखने से आँखों में थकान, सूखापन और सिरदर्द हो सकता है। ये अस्थायी परेशानियाँ और निकट दृष्टिदोष अलग स्थितियाँ हैं। इसी तरह लगातार पास से किताब पढ़ने जैसी गतिविधियों के दौरान भी विश्राम आवश्यक है। उद्देश्य पढ़ाई रोकना नहीं, बल्कि देखने की स्वस्थ आदतें विकसित करना होना चाहिए।

खेल के मैदान भी जरूरी

प्राकृतिक दिन के उजाले में बाहर समय बिताने से बच्चों में निकट दृष्टिदोष शुरू होने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। अभिभावकों और विद्यालयों को प्रयास करना चाहिए कि बच्चों को प्रतिदिन लगभग डेढ़ से दो घंटे बाहर खेलने या अन्य गतिविधियों का अवसर मिले। मौसम, वायु गुणवत्ता और बच्चे के स्वास्थ्य के अनुसार समय तय किया जा सकता है।

बाहर खेलने का अर्थ तेज धूप में खड़ा रहना नहीं है। सुरक्षित खुली जगहों में खेलना और टहलना भी उपयोगी है। इससे शारीरिक सक्रियता और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा मिलता है। हालाँकि, जिस बच्चे को निकट दृष्टिदोष हो चुका है, उसके लिए बाहर खेलना चिकित्सकीय देखभाल का विकल्प नहीं है।

विश्राम और पोषण का संतुलन

पढ़ाई या उपकरणों के उपयोग के दौरान नियमित अंतराल पर आँखों को आराम देना चाहिए। प्रत्येक 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना आँखों की थकान घटाने में सहायक हो सकता है। इसे निकट दृष्टिदोष रोकने या चश्मे का नंबर घटाने का निश्चित उपाय नहीं माना जाना चाहिए। पर्याप्त प्रकाश और पढ़ने की उचित दूरी भी जरूरी हैं।

संतुलित भोजन बच्चों के समग्र स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। लेकिन यह धारणा सही नहीं कि केवल गाजर खाने या विटामिन लेने से चश्मा उतर जाएगा। विटामिन ए की कमी और निकट दृष्टिदोष अलग समस्याएँ हैं। पौष्टिक भोजन के साथ सही दिनचर्या और दृष्टि की जाँच पर भी ध्यान देना होगा।

जाँच और उपचार में देरी न हो

बच्चा दूर की वस्तुएँ देखने में परेशानी बताए या आँखें सिकोड़कर देखे तो नेत्र विशेषज्ञ से जाँच करानी चाहिए। चश्मा निर्धारित होने पर उसका नियमित उपयोग जरूरी है। कुछ बच्चों में विशेषज्ञ विशेष प्रकार के चश्मे, आँखों पर लगाए जाने वाले विशेष लेंस या औषधीय बूँदों से निकट दृष्टिदोष की प्रगति धीमी करने के विकल्प सुझा सकते हैं। इनका चयन जाँच और चिकित्सकीय निगरानी में होना चाहिए।

बच्चों की दृष्टि की देखभाल परिवार और विद्यालय की साझा जिम्मेदारी है। पढ़ाई, पर्याप्त विश्राम और बाहरी गतिविधियों को दिनचर्या में उचित स्थान देकर इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। तकनीक शिक्षा का उपयोगी साधन बनी रहे, लेकिन बच्चों के खेल और स्वास्थ्य के लिए भी पर्याप्त समय सुरक्षित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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