*स्थायी पंजीकरण के लिए 25,000 रुपये शुल्क निर्धारित; नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों का अनिवार्य पंजीकरण, कड़े सुरक्षा प्रावधान और निगरानी व्यवस्था लागू*
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर – हरियाणा सरकार ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों के लिए व्यापक नियामक ढांचा बनाया है। इसके तहत मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को छह श्रेणियों में विभाजित कर उनके पंजीकरण, स्टाफ की योग्यता, मरीजों की सुरक्षा, उपचार संबंधी रिकॉर्ड और संस्थागत जवाबदेही के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों के मनोरोग विभागों, मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों के मनोरोग वार्डों, नशा मुक्ति केंद्रों, मनोसामाजिक पुनर्वास केंद्रों तथा अन्य संबंधित संस्थानों को शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बुधवार को बताया कि राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा 9 अक्टूबर को अधिसूचित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल (स्टेट मेंटल हेल्थ ऑथोरिटी) विनियम, 2026 को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों के लिए विनियमन के लिए फ्रेमवर्क बनाया है।
इन विनियमों के तहत स्थायी पंजीकरण के लिए 25,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। संस्थानों को न्यूनतम मानकों के अनुपालन के प्रमाणस्वरूप आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके अलावा, पेशेवर योग्यता, मरीजों के अधिकार, चिकित्सा रिकॉर्ड, शारीरिक रूप से रोकने संबंधी प्रावधानों, निजता, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा और दिव्यांगजनों के लिए सुगम सुविधाओं से जुड़े मानक भी निर्धारित किए गए हैं।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि विनियमों के तहत मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को उनकी प्रकृति और उपलब्ध सेवाओं के आधार पर श्रेणी A से F तक छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। सभी संबंधित संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम की धारा 65 के तहत लागू पंजीकरण प्रक्रिया का पालन करना होगा। यह व्यवस्था केवल मानसिक अस्पतालों और नशा मुक्ति केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मेडिकल कॉलेजों के मनोरोग विभाग, सामान्य अस्पतालों के मनोरोग वार्ड, आवासीय पुनर्वास केंद्र तथा मादक पदार्थों के सेवन संबंधी विकारों के उपचार से जुड़े निर्धारित संस्थान भी शामिल हैं।
विनियमों में संस्थानों के लिए आवास, स्वच्छता, चिकित्सा उपकरणों, कर्मचारियों की उपलब्धता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों के संबंध में न्यूनतम मानक तय किए गए हैं। इनमें पर्याप्त वेंटिलेशन, अलग-अलग बिस्तर, स्वच्छ बिस्तर, पेयजल की उपलब्धता, पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्वच्छता सुविधाएं, बिजली का वैकल्पिक प्रबंध तथा जैव-चिकित्सकीय कचरे का सुरक्षित निपटान शामिल है।
मानकों के अनुसार, संस्थानों में रहने वाले मरीजों को फर्श पर सुलाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, उनकी निजता, व्यक्तिगत गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करना भी अनिवार्य होगा।
*शारीरिक रूप से रिस्ट्रेन संबंध कड़े सुरक्षा प्रावधान*
मानसिक स्वास्थ्य उपचार प्राप्त कर रहे मरीजों को शारीरिक रूप से रिस्ट्रेन करने या बांधने के संबंध में विनियमों में विशेष सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। संस्थानों को ऐसे उपायों का न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित करना होगा, कर्मचारियों को संकट की स्थिति से निपटने के वैकल्पिक तरीकों का प्रशिक्षण देना होगा तथा शारीरिक रूप से रोकने की आवश्यकता पड़ने पर उसका उचित रिकॉर्ड रखना होगा।
इनपेशेंट सुविधाओं में शारीरिक रूप से रोकने की अनुमति केवल तभी होगी, जब मरीज द्वारा स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने का खतरा हो। ऐसी स्थिति में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अधिकारी या परामर्शदाता मनोचिकित्सक की अनुमति आवश्यक होगी।
रिपोर्टिंग के दायरे में आने वाले संस्थानों को शारीरिक रूप से रोकने से संबंधित मासिक रिपोर्ट अगले महीने के पहले सप्ताह के भीतर संबंधित जिला मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड को प्रस्तुत करनी होगी।
विनियमों में मरीजों की गोपनीयता, भेदभाव से सुरक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता के अनुरूप उपचार, चिकित्सा रिकॉर्ड तक पहुंच तथा भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य उपचार के संबंध में अग्रिम निर्देश (एडवांस डायरेक्टिव) दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
*नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों का अनिवार्य पंजीकरण और निगरानी*
श्रेणी D के अंतर्गत आने वाले स्वतंत्र नशा मुक्ति केंद्रों के लिए सभी मरीजों का हरियाणा नशा मुक्ति निगरानी प्रणाली पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। वहीं, मादक पदार्थों के सेवन संबंधी विकारों के आपातकालीन उपचार की सुविधा देने वाले श्रेणी F के निर्धारित संस्थानों को मनोचिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करनी होगी और मरीजों की जानकारी इसी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इस नियामक व्यवस्था का प्रभाव नशा मुक्ति और पुनर्वास से जुड़े उन संस्थानों पर भी पड़ेगा, जो नशे की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (National Action Plan for Drug Demand Reduction) के तहत संचालित किए जा रहे हैं।
हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (सेवा) ने 18 सितंबर को जारी पत्र के माध्यम से जिला अधिकारियों को राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में पंजीकृत नहीं हुए मौजूदा नशा मुक्ति के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्रों (IRCA) तथा नशा मुक्ति केंद्रों का पंजीकरण शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए थे। यह पत्र केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के 9 सितंबर के निर्देश के संदर्भ में जारी किया गया था।
जिला स्तरीय समितियों के सदस्य-सचिवों को संबंधित संस्थानों का पंजीकरण करवाने, निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा वैध पंजीकरण प्रमाणपत्रों की प्रतियां प्राप्त करने में सहायता देने को कहा गया है।
*प्रत्येक जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर जोर*
मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के लिए निर्धारित यह नियामक व्यवस्था मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत लागू किए जा रहे हैं। अधिनियम की धारा 18 के तहत लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। इनमें बाह्य रोगी (ओपीडी) और भर्ती होकर उपचार प्राप्त करने की सुविधाएं, पुनर्वास, समुदाय आधारित सहायता तथा बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेवाएं शामिल हैं।
अधिनियम के अनुसार, प्रत्येक जिले में सरकार द्वारा संचालित या सरकारी वित्तपोषण से उपलब्ध कराई जाने वाली न्यूनतम मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जानी हैं। जहां स्थानीय स्तर पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां उपचार की वैकल्पिक व्यवस्था करने का भी प्रावधान है।
इन विनियमों का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना, उपचार संस्थानों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करना तथा मनोरोग उपचार, पुनर्वास और नशा मुक्ति सेवाएं प्राप्त करने वाले मरीजों एवं उनके परिवारों के अधिकारों, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना है।







