महिला उत्पीड़न के मामलों में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप, परिवार की न्याय की मांग का समर्थन
रेवाडी, 15 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा की बात करने वाली भाजपा अपने नेताओं से जुड़े आरोपों और विपक्षी नेताओं पर लगे आरोपों के प्रति अलग-अलग रवैया अपनाती है।
विद्रोही ने कहा कि अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के मामले में पूरी सच्चाई सामने लाने और सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उत्तराखंड से दिल्ली तक आवाज उठाने के बावजूद परिवार के सवालों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की मांगों को राजनीतिक नजरिये से देखने के बजाय संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ सुना जाना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा के नारों और सरकार के व्यवहार में अंतर दिखाई देता है। विद्रोही के अनुसार, महिला उत्पीड़न के मामलों में राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
विद्रोही ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर भी विरोध जताया। उन्होंने कहा कि अंकिता के परिवार की आपत्तियों के बीच यह निर्णय उनकी पीड़ा बढ़ाने वाला है। राष्ट्रपति भवन की 12 अक्टूबर की विज्ञप्ति में गौतम की नियुक्ति की पुष्टि की गई है।
भाजपा की महिला नेताओं से सवाल करते हुए विद्रोही ने कहा कि कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों पर मुखर होने वाली नेताओं को अंकिता के परिवार की मांगों पर भी समान संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनिंदा मामलों में विरोध और अन्य मामलों में चुप्पी महिला न्याय के प्रति दोहरे मापदंड को दर्शाती है।
तीन दोषियों को मिल चुकी है उम्रकैद
अंकिता भंडारी हत्याकांड में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और दो कर्मचारियों को 30 मई 2025 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। परिवार का जारी विरोध कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका की जांच और उससे जुड़े अनुत्तरित सवालों को लेकर है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि मामले में किसी दोषी को सजा ही नहीं मिली।
दुष्यंत गौतम अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बदनाम करने की साजिश बता चुके हैं। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।






