लोकलाज और पारदर्शिता से चलता है लोकतंत्र : विद्रोही

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चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब और जानकारी उपलब्ध कराने की मांग

रेवाडी, 14 अक्टूबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या लोकतंत्र लोकलाज और पारदर्शिता के बिना चल सकता है? उन्होंने कहा कि लोकराज लोकलाज से ही चलता है। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए उनकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।

विद्रोही ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान का अधिकार नागरिकों की सबसे बड़ी ताकत है। मतदाता स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के माध्यम से अपनी संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल कर सरकारें बनाते और बदलते हैं। ऐसे में जब चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगें, तो उन सवालों का संतोषजनक समाधान करना आवश्यक हो जाता है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनता को यह भरोसा भी होना चाहिए कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष है। उनके अनुसार, यह विश्वास पारदर्शी कार्यप्रणाली और चुनाव से संबंधित सवालों के स्पष्ट जवाब से ही कायम रह सकता है।

जानकारी मिलने से मजबूत होगा भरोसा

विद्रोही ने मांग की कि मतदाताओं और राजनीतिक दलों को चुनाव प्रक्रिया से संबंधित मांगी गई जानकारी तथा दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि जब आयोग नियमों का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार करता है, तो लोगों के मन में संदेह पैदा होता है। ऐसे संदेह दूर करने के लिए आयोग को अपने निर्णयों का स्पष्ट और तार्किक आधार जनता के सामने रखना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से मांगी जा रही जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं और उसकी कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के संतोषजनक जवाब भी नहीं मिल रहे। विद्रोही के अनुसार, इससे आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर अविश्वास बढ़ रहा है।

आयोग स्वयं दे सवालों के जवाब

विद्रोही ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर आयोग की ओर से स्पष्ट जवाब आने के बजाय भाजपा की ओर से सफाई दी जाती है। उन्होंने दावा किया कि इससे आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत की आशंका को बल मिलता है। उनके मुताबिक, ऐसी धारणा बनना भी लोकतंत्र और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग को स्वयं सामने आकर सवालों के तथ्यपरक जवाब देने चाहिए। चुनाव प्रक्रिया में खुलापन, जानकारी की उपलब्धता और जवाबदेही से ही स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के प्रति नागरिकों का विश्वास मजबूत होगा।

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Author: Bharat Sarathi

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