गीत, भजन और शायरी से सजी केसरी क्लब की महफिल

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

वरिष्ठ नागरिक कदमों की धूल नहीं, माथे की शान हैं : धर्मसागर

गुरुग्राम। वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की गुरुग्राम शाखा की ओर से शनिवार को सेक्टर-4 स्थित कम्युनिटी सेंटर के प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्था के प्रधान एवं फोरबा के चेयरमैन धर्मसागर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सदस्यों ने गीत, भजन, कविता और शायरी प्रस्तुत कर माहौल को खुशनुमा बना दिया। मंच संचालन डीएन कवातरा ने किया। कोर कमेटी की सदस्य शीतल चावला ने गायत्री मंत्र के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

धर्मसागर ने सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि केसरी क्लब वरिष्ठ नागरिकों को ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां वे अपने हमउम्र साथियों के बीच मर्यादापूर्ण वातावरण में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने के साथ सुख-दुख साझा कर सकते हैं। एक-दूसरे का सहयोग और खुशमिजाजी जीवन के इन पलों को अधिक सार्थक बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि “वरिष्ठ नागरिक कदमों की धूल नहीं, माथे की शान हैं।” संस्था की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चोपड़ा ने वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की स्थापना करके इस भावना को सार्थक किया है। धर्मसागर ने वरिष्ठजनों के जीवनानुभव, धार्मिक आस्था और संगीत के प्रति प्रेम को समर्पित कविता भी सुनाई, जिसे उपस्थित सदस्यों ने सराहा।

सम्मान मिलने पर धर्मसागर को दी बधाई

हाल ही में वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में धर्मसागर को ‘श्रेष्ठ ससुर’ के सम्मान से नवाजा गया था। इस उपलब्धि पर मंच संचालक डीएन कवातरा, एमआर कुमार, हनुमान प्रसाद सहित अन्य सदस्यों ने उन्हें बधाई दी।

सुरों में झलकी भक्ति और जीवन की उमंग

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में शीतल चावला ने ‘ऐसी कृपा करो भगवान, हरदम रहे तुम्हारा ध्यान’ और गुलाब सैनी ने ‘जगत के रंग क्या देखूं, तेरा दरबार काफी है’ सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बनाया। रमेश धवन ने ‘किस तरह जीते हैं लोग यारो’ तथा अंजला वधवा ने पंजाबी रचना के माध्यम से जीवन में नेक कर्म करने का संदेश दिया।

एमआर कुमार ने जीवन की ढलती शाम में जीवनसाथी के साथ और सहयोग को समर्पित गीत प्रस्तुत किया। मदनलाल डूडेजा ने ‘तेरे बालक तेरे चरणों में भगवान सिर झुकाते हैं’, मूर्ति देवी ने रामभक्ति की रचना और मिथलेश ने ‘तू क्यों न भजन करे मन बावरे’ सुनाया।

शशि अरोड़ा ने ‘मुझे तुम याद आए, बहुत याद आए’ और धर्मपाल ने ‘ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जाए’ की प्रस्तुति देकर महफिल में रंग भरे। लाजपत चांदना ने ‘पर्दा न कर पुजारी, देख लेने दे राधा प्यारी’ सुनाकर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।

हनुमान प्रसाद ने संस्था की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चोपड़ा के कार्यों की सराहना करते हुए ‘पलभर की तन्हाई आपको नसीब न हो, कोई भी गम आपके करीब न हो’ कविता सुनाई। उन्होंने ‘बस्ती-बस्ती घोर उदासी, पर्वत-पर्वत खालीपन’ रचना भी प्रस्तुत की। बी कुमार ने भी अपने विचार साझा किए।

खुश और स्वस्थ रहने पर हुआ संवाद

कार्यक्रम में प्रो. डॉ. मानक ने व्यक्ति के भीतर खुशी के स्रोत तथा खुश और स्वस्थ रहने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। सदस्यों ने उनकी बातों को रुचिपूर्वक सुना।

डीएन कवातरा ने हंसने-हंसाने और मित्रों की सलामती की कामना से जुड़ी शायरी सुनाकर सभी का मन मोह लिया। उनकी पंक्तियों—“थोड़ा हंस लेते हैं, थोड़ा हंसा देते हैं” और “ऐ मेरे खुदा, मेरे दोस्तों को सलामत रखना”—ने आपसी स्नेह और साथ के महत्व को रेखांकित किया।

इस अवसर पर रमेश वशिष्ठ, आरके सिंघल, श्याम सुंदर, मनमोहन, सीएस आहूजा, रमेश अग्रवाल, केबी शर्मा, चेतनदास ग्रोवर, बीआर उप्पल, एमपी दुबे, इंद्राणी शर्मा, विमला मनोचा, पुष्पलता, घनश्याम बंसल, सुरेश आनंद, एचपी शर्मा, चंद्रप्रकाश, दीपचंद, डीपी यादव, जगवती, एचके खेड़ा, विनोद बजाज, नरेंद्र मलिक और हरीश सरदाना सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

error: Content is protected !!