800-900 रुपये कम रेट में बिक रहा बाजरा, सरकारी खरीद नदारद- हुड्डा
24 फसलों पर एमएसपी का दावा करने वाली सरकार बताए 24 फसलों के नाम और श्वेत पत्र जारी करे- हुड्डा
किसानों को कम रेट में फसल बेचने के लिए किया जा रहा मजबूर- अरोड़ा
12 तारीख को दिल्ली पहुंचें सभी लोग, ज्ञानेश को देने होगा इस्तीफा- हुड्डा

चंडीगढ़, 10 अक्टूबर। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि मंडियों में धान की खरीद नहीं हो रही है। आवक 12 लाख मीट्रिक टन हो चुकी है, लेकिन सरकार ने अब तक मात्र 30 प्रतिशत ही खरीदा है। यानी 70 प्रतिशत किसान अभी भी सरकारी खरीद का इंतजार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, जो धान खरीदा भी गया है, उसका भी मात्र 17 प्रतिशत ही उठान हुआ है। मंडियों में अब नई फसल रखने की जगह तक नहीं बची है।
बीजेपी सरकार धान नहीं खरीदना चाहती, इसलिए किसानों को कई झमेलों में उलझाए रखा गया है—पहले पोर्टल, फिर वेरिफिकेशन और उसके बाद गेटपास व कैपिंग और लिमिट। हालत यह है कि सिर्फ धान के वेरिफिकेशन में साढ़े चार लाख एकड़ का गैप पाया गया है। करीब 3 लाख एकड़ मोटे धान का सत्यापन, जबकि बासमती के 80,000 एकड़, कपास का 1.71 लाख एकड़, बाजरे का 3.49 लाख एकड़ और गन्ने का 31,000 एकड़ का सत्यापन अभी भी पेंडिंग पड़ा है।
हुड्डा ने कहा कि उन्होंने प्रदेश की कई मंडियों का दौरा किया। किसानों ने खुद बताया कि MSP न मिलने की वजह से उन्हें ₹400 प्रति क्विंटल तक कम रेट पर अपनी धान और ₹800 से ₹900 प्रति क्विंटल कम रेट पर बाजरा बेचना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने चुनाव में ऐलान किया था कि सरकार 3100 रुपए क्विंटल के हिसाब से धान खरीदेंगे। लेकिन सच्चाई ये है कि आज किसानों 2441 MSP भी नहीं मिल रही है। मूंग की MSP तो 8780 है, लेकिन खरीद ना होने से किसानों को प्रति क्विंटल 1500 से 1600 रुपए तक घाटे की मार पड़ रही है।

इसी तरह बाजरे के किसान भी ₹2900 प्रति क्विंटल की कागज़ी MSP के बीच, अपनी उपज ₹2000 प्रति क्विंटल तक में देने की मजबूरी के कारण करीब ₹900 प्रति क्विंटल का घाटा झेल रहे हैं।
किसानों के साथ भाजपा सरकार किस तरह खिलवाड़ कर रही है, इसे समझने के लिए हुड्डा ने उकलाना अनाज मंडी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मंडी में एक किसान की फसल की नमी चेक की गई। वहां सरकारी एजेंसी के पास तीन मशीनें थीं, लेकिन एक ही धान के सैंपल की नमी तीनों मशीनों ने अलग-अलग बताई। यानी साफ है कि सरकार का इरादा किसानों की फसल न खरीदने और उन्हें MSP से पूरी तरह वंचित करने का है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी हरियाणा में 24 फसलों पर एमएसपी देने का दावा करती है, क्या वो उन 24 फसलों के नाम बता सकती है, जो हरियाणा में होती हैं। और सरकार श्वेत पत्र जारी करे कितनी फसलों पर हरियाणा में एम एस पी मिली।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर वरिष्ठ नेता और थानेसर से विधायक अशोक अरोड़ा भी उनके साथ थे। अशोक अरोड़ा ने कहा कि किसानों के साथ ये सब इसलिए किया जा रहा है ताकि किसान कम रेट में अपनी फसल बेचें और प्राइवेट एजेंसियों को फायदा हो।
हुड्डा ने बताया कि सरकार किसानों को न सिर्फ MSP से वंचित कर रही है, बल्कि खाद भी नहीं दे रही है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा के लिए अक्टूबर में यूरिया का आवंटित स्टॉक 3.50 लाख मीट्रिक टन है, जबकि अब तक सरकार ने सिर्फ 67,000 मीट्रिक टन ही उठाया है। इसी तरह DAP का हरियाणा के लिए आवंटित स्टॉक डेढ़ लाख मीट्रिक टन का है, लेकिन सरकार ने अब तक मात्र 38,000 मीट्रिक टन ही उठाया है।
हुड्डा ने याद दिलाया कि भाजपा ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन सच्चाई यह है कि उसने किसानों की लागत कई गुना बढ़ा दी। जब MSP में बढ़ोतरी की बात आती है तो सरकार किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करती है। कांग्रेस सरकार के दौरान 2005 से 2014 तक धान और गेहूं के MSP में हर बार 14 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती थी, जबकि भाजपा सरकार के दौरान मात्र 5 से 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है।
इसलिए हमारी मांग है कि बीजेपी सरकार एमएसपी पर श्वेत पत्र भी जारी करे, ताकि जनता को पता चल सके कि कांग्रेस सरकार के दौरान कितनी बढ़ोत्तरी होती थी और बीजेपी कितनी कर रही है।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही पड़ेगा। जबतक वो पद से इस्तीफा नहीं देते, वोट चोरी के खिलाफ इंडिया गठबंधन का ये आंदोलन तेज होता जाएगा। 12 तारीख को हम सभी लोगों को दिल्ली पहुंचने की अपील करते हैं। क्योंकि यह वोट और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। इसमें सभी की शांतिपूर्ण भागीदारी आवश्यक है।







