पराली और खुले में कचरा जलाने से होने वाले नुकसान बताए, वैकल्पिक उपाय अपनाने की दी जानकारी

गुरुग्राम, 10 अक्टूबर- हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की ओर से किसान भवन, गुरुग्राम में पराली जलाने और खुले में कचरा जलाने पर रोक के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इसमें किसान एसोसिएशन के सदस्यों के साथ हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (एचएसएएमबी) और मार्केट कमेटी के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
अभियान के दौरान बोर्ड के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि धान और गेहूं की पराली जलाना प्रतिबंधित है। इसका उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जिससे सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, आग लगाने से मिट्टी के पोषक तत्व और उसे उपजाऊ बनाए रखने वाले सूक्ष्मजीव भी नष्ट होते हैं।
अधिकारियों ने किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों की जानकारी भी दी। इनमें हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों के माध्यम से खेत में ही पराली का प्रबंधन करना तथा बेलर मशीन से पराली एकत्रित कर औद्योगिक और ईंधन संबंधी कार्यों में उपयोग करना शामिल है। किसानों को इन मशीनों के लिए सरकारी सहायता और कस्टम हायरिंग सेंटर की सुविधा के बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम में ठोस कचरे, प्लास्टिक, पत्तियों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को खुले में जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण पर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कचरे को खुले में जलाने से बचने, गीले और सूखे कचरे को स्रोत पर ही अलग-अलग करने तथा ठोस कचरा प्रबंधन के निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की। अधिकारियों ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के विभिन्न चरणों के बारे में भी बताया। उन्होंने समझाया कि वायु गुणवत्ता खराब होने पर अलग-अलग चरणों में किस प्रकार की गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू होते हैं और किन नियमों का पालन करना आवश्यक है।
बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि वायु प्रदूषण कम करने में किसानों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी लोग पराली और कचरा जलाने से बचकर, कचरे का उचित प्रबंधन करके और अपने गांवों व बाजारों में जागरूकता फैलाकर स्वच्छ हवा बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं। किसान एसोसिएशन के सदस्यों से इस जानकारी को जिले के अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का आग्रह किया गया।








