टैक्स पूरा, सफाई अधूरी

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सेक्टर-4 के कम्युनिटी सेंटर के बाहर रातभर पड़ा रहता है कूड़ा; परिसर में खाना बनाने और कूड़ा वाहनों की पार्किंग पर उठे सवाल

ऊर्वा के संरक्षक धर्मसागर ने जताया रोष, निगम आयुक्त से व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदार कर्मचारियों को सख्त निर्देश देने की मांग

गुरुग्राम। नियमित प्रॉपर्टी टैक्स और कूड़ा शुल्क चुकाने के बावजूद सेक्टर-4 के निवासियों को साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आवाज उठानी पड़ रही है। क्षेत्र के कम्युनिटी सेंटर के बाहर घंटों पड़ा रहने वाला कूड़ा और परिसर के इस्तेमाल को लेकर ऊर्वा के संरक्षक धर्मसागर ने नाराजगी जताई है। उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निगम आयुक्त से मामले का संज्ञान लेने और स्थानीय निवासियों को अव्यवस्थाओं से राहत दिलाने की मांग की है।

धर्मसागर का कहना है कि सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बने कम्युनिटी सेंटर के आसपास स्वच्छ वातावरण होना चाहिए, लेकिन यहां कूड़े के ढेर, परिसर में खड़े कूड़ा वाहन और चूल्हे से उठता धुआं लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब निवासी अपने हिस्से के कर और शुल्क नियमित रूप से चुका रहे हैं, तो उन्हें सफाई और सार्वजनिक परिसर के व्यवस्थित रखरखाव के लिए शिकायत क्यों करनी पड़ रही है?

शाम को जमा कूड़ा, अगले दिन दोपहर तक इंतजार

धर्मसागर ने बताया कि कम्युनिटी सेंटर के बाहर रोजाना शाम के समय कूड़ा एकत्रित कर दिया जाता है। उनके अनुसार, यह कूड़ा अगले दिन दोपहर करीब एक बजे तक नहीं उठाया जाता। इस तरह शाम से लेकर अगले दिन दोपहर तक गंदगी वहीं पड़ी रहती है।

उन्होंने कहा कि इस दौरान आवारा पशु कूड़े को इधर-उधर फैला देते हैं। हवा चलने पर बिखरा कचरा आसपास तक पहुंच जाता है और क्षेत्र की सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है। जिस स्थान से कूड़ा समय पर हटाया जाना चाहिए, वहीं उसका लंबे समय तक पड़ा रहना सफाई प्रबंधन की खामी दर्शाता है।

धर्मसागर ने समय पर कूड़ा उठाने की मांग करते हुए कहा कि केवल कचरा एक जगह इकट्ठा कर देना पर्याप्त नहीं है। जब तक उसका नियमित और समयबद्ध उठान नहीं होगा, तब तक निवासियों को गंदगी से राहत नहीं मिलेगी।

सामुदायिक परिसर में चूल्हा जलाने पर आपत्ति

धर्मसागर ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सीवर कार्य से जुड़ा ठेकेदार अपने सहयोगियों के साथ कम्युनिटी सेंटर के प्रांगण में ही चूल्हे पर करीब 20 लोगों का भोजन बनवा रहा है। उनके मुताबिक, चूल्हे से उठने वाला धुआं आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि एक ओर नगर निगम प्रदूषण रोकने के प्रयासों की बात करता है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक उपयोग के परिसर में इस तरह चूल्हा जलाए जाने पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने परिसर के ऐसे इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की।

कई दिनों तक खड़े रहते हैं कूड़ा वाहन

शिकायत के अनुसार, नगर निगम की कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां भी कई-कई दिनों तक कम्युनिटी सेंटर परिसर में खड़ी रहती हैं। धर्मसागर का कहना है कि इससे सामाजिक कार्यक्रमों के लिए बनाए गए इस स्थान की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि कम्युनिटी सेंटर सेक्टरवासियों की साझा सुविधा है। इसके रखरखाव और उपयोग में स्थानीय निवासियों की जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। परिसर में कूड़ा वाहनों का लंबे समय तक खड़ा रहना और अन्य गतिविधियों का संचालन इसके मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।

कर देने वाले नागरिक सुविधाओं के लिए क्यों परेशान हों?

धर्मसागर ने कहा कि सेक्टरवासी सरकार और प्रशासन को प्रॉपर्टी टैक्स के साथ कूड़ा शुल्क भी नियमित रूप से देते हैं। इसके बावजूद यदि उन्हें घरों के आसपास सफाई और सामुदायिक स्थल की सुव्यवस्था के लिए शिकायत करनी पड़े, तो उनकी नाराजगी स्वाभाविक है।

उन्होंने जोर दिया कि नागरिकों से शुल्क वसूलने के साथ सेवाओं की नियमितता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। सफाई व्यवस्था का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि कूड़ा कितनी देर तक पड़ा रहता है, उसका उठान समय पर होता है या नहीं और सार्वजनिक परिसरों की स्थिति कैसी है।

निगम आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग

ऊर्वा के संरक्षक ने नगर निगम आयुक्त से आग्रह किया है कि संबंधित सफाई निरीक्षकों और सीवर कर्मियों को सख्त निर्देश देकर समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाए। कम्युनिटी सेंटर के बाहर कूड़े का समय पर उठान सुनिश्चित हो, उसे पशुओं द्वारा फैलाए जाने की स्थिति समाप्त हो और परिसर को व्यवस्थित रखा जाए।

धर्मसागर ने कहा कि स्थानीय निवासियों की मांग साफ-सफाई और सामुदायिक सुविधाओं के उचित उपयोग तक सीमित है। प्रशासन को इन शिकायतों पर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सेक्टर-4 के लोगों को राहत मिले और कम्युनिटी सेंटर का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो सके, जिसके लिए वह बनाया गया है।

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Author: Bharat Sarathi

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