37वीं पुण्यतिथि पर संगीत संध्या में दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि, सामूहिक मेडली ने बांधा समां

हिसार – गीतों की श्रृंखला का शुभारंभ डॉ. आशा कावात्रा ने प्रेरणादायक गीत “इंसाफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के” से किया। डॉ. सुनीता सुनेजा ने “ओ दुनिया के मालिक राम, तेरी मर्ज़ी के हम हैं गुलाम” प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बनाया। इसके बाद डॉ. पुष्पा खरब ने “दर्शन दो घनश्याम नाथ, मोरी अँखियाँ प्यासी रे” की भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
सुरेन्द्र भाटिया ने “ज़िंदगी कितनी खूबसूरत है” गाकर जीवन के प्रति सकारात्मक भाव जगाया। आदेश मलिक ने “ना तुम हमें जानो” की मधुर प्रस्तुति दी, जबकि डॉ. कमलेश कुकड़ेजा ने “जाने वो कैसे लोग थे जिनके” सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया।
रणबीर ढिल्लो ने “बेकरार करके हमें यूँ न जाइए” प्रस्तुत कर सराहना प्राप्त की। डॉ. एस. एस. धवन ने सदाबहार गीत “है अपना दिल तो आवारा, न जाने किस पे आएगा” से खूब वाहवाही बटोरी। डॉ. इन्दु गहलावत की प्रस्तुति “ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ” ने श्रोताओं को पुराने सुहाने संगीत की यादों में पहुँचा दिया। योगेश सुनेजा ने “ना ये चाँद होगा” सुनाकर इस संगीत यात्रा को आगे बढ़ाया।

युगल गीत ने छुआ दिल
डॉ. कमल धवन और डॉ. एस. एस. धवन ने युगल गीत “याद किया दिल ने, कहाँ हो तुम” प्रस्तुत कर पुरानी यादों को जीवंत किया। डॉ. एम. एस. मलिक ने अपनी सधी हुई आवाज़ में “वो साथ हमारा दे न सके” सुनाया, जबकि डॉ. एम. एस. राणा ने “ये नयन डरे-डरे” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
अजीत सिंह ने “छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा, कि जैसे मंदिर में लौ दिए की” प्रस्तुत कर वातावरण को भावनाओं से भर दिया। कार्यक्रम को समापन की ओर ले जाते हुए वीना अग्रवाल ने “या दिल की सुनो, दुनिया वालो” सुनाकर श्रोताओं के मन को छुआ।
सामूहिक मेडली रही विशेष आकर्षण
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण हेमंत कुमार के गीतों पर आधारित सामूहिक मेडली रही, जिसे डॉ. एस. एस. धवन और डॉ. पुष्पा खरब ने मिलकर तैयार किया था। अजीत सिंह के नेतृत्व में सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक इसकी प्रस्तुति दी। एक साथ उठे सुरों को श्रोताओं ने तालियों के साथ सराहा।
स्मृतियों और भावनाओं का हिस्सा हैं ये गीत
समापन पर डॉ. जे. के. डांग ने सभी गायकों, मंच संचालक और आयोजन की तैयारियों में सहयोग देने वाले सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हेमंत कुमार के गीत हमारी स्मृतियों और भावनाओं का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके गीतों को स्वर देकर वानप्रस्थ के सदस्यों ने उनकी पुण्यतिथि पर सच्ची और भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है।
कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने मिलकर जलपान का आनंद लिया।








