दीये बांटने से लेकर सरकारी आयोजनों और विज्ञापनों तक का पूरा खर्च सार्वजनिक करे हरियाणा सरकार
रेवाड़ी, 19 सितंबर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हरियाणा में आयोजित कार्यक्रमों को सरकारी धन और मशीनरी का दुरुपयोग बताते हुए पूरे खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि भाजपा-संघ सार्वजनिक रूप से व्यक्ति पूजा का विरोध करते हैं, लेकिन व्यवहार में ‘नेशन फर्स्ट’ की जगह ‘व्यक्ति फर्स्ट’ की नीति पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी जीवित नेता का जन्मदिन सरकारी पैसे, अधिकारियों और कर्मचारियों की मदद से मनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं और नैतिकता के विरुद्ध है।
39.76 लाख परिवारों को दो-दो दीये देने का दावा
विद्रोही ने सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से कहा कि हरियाणा में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले 39,76,293 परिवारों को दो-दो दीये उपलब्ध कराए गए। इन दीयों की खरीद पर प्रदेशभर में करीब 79.53 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई, लेकिन दीयों में इस्तेमाल तेल, वितरण व्यवस्था तथा कर्मचारियों की तैनाती पर हुए खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि अहीरवाल क्षेत्र में—
- रेवाड़ी के 1,28,627 परिवारों के लिए लगभग 2.57 लाख रुपये,
- महेंद्रगढ़ के 1,43,245 परिवारों के लिए लगभग 2.86 लाख रुपये,
- गुरुग्राम के 1,16,676 परिवारों के लिए लगभग 2.33 लाख रुपये के दीये खरीदे गए।
स्कूलों और सरकारी कार्यालयों के कार्यक्रमों पर भी सवाल
विद्रोही ने कहा कि स्कूलों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें सरकारी मशीनरी, अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं ली गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन आयोजनों, प्रचार तथा मीडिया विज्ञापनों को जोड़ने पर खर्च बहुत अधिक हो सकता है।
उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया, हालांकि इसके समर्थन में विभागवार आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए। विद्रोही ने मांग की कि सरकार दीये, तेल, वितरण, आयोजनों और विज्ञापनों पर हुए वास्तविक खर्च का विभागवार ब्योरा सार्वजनिक करे।
‘प्रधानमंत्री निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं या सम्राट?’
विद्रोही ने कहा, “प्रदेश की जनता को सरकार से पूछना चाहिए कि नरेंद्र मोदी देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं या कोई निरंकुश सम्राट, जिनके महिमामंडन के लिए सरकारी खजाना खर्च किया गया?”
उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकारी संसाधनों का इस प्रकार इस्तेमाल सत्ता के दुरुपयोग और सार्वजनिक धन की बर्बादी की श्रेणी में नहीं आता?








