भुगतान में देरी से निजी अस्पताल बार-बार इलाज रोकने को मजबूर, गरीब मरीज परेशान

रेवाड़ी, 3 सितम्बर। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि हरियाणा में आयुष्मान भारत और चिरायु योजना गरीबों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रही है। पर्याप्त बजट और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में कार्डधारकों को निजी अस्पतालों में अपनी जेब से इलाज करवाना पड़ रहा है।
विद्रोही ने कहा कि सरकार बड़े पैमाने पर आयुष्मान और चिरायु कार्ड तो बना रही है, लेकिन योजना के तहत उपचार के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं करा रही। उनके अनुसार, अनेक सामान्य बीमारियों का निजी अस्पतालों में योजना के तहत उपचार प्रतिबंधित कर उन्हें केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित कर दिया गया है। दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, सहायक कर्मचारियों और आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है।
उन्होंने दावा किया कि जिन बीमारियों का निजी अस्पतालों में उपचार अनुमत है, उनके भुगतान में भी लगातार देरी होती है। बकाया राशि नहीं मिलने पर निजी अस्पताल समय-समय पर आयुष्मान और चिरायु कार्डधारकों का इलाज रोक देते हैं। विरोध के बाद सरकार कुछ भुगतान करती है, लेकिन दो-तीन महीने बाद फिर वही स्थिति बन जाती है।
विद्रोही ने सवाल किया कि जब सरकार के पास अस्पतालों का समय पर भुगतान करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है तो बड़े पैमाने पर कार्ड जारी करने का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि योजना गरीबों में मुफ्त उपचार की उम्मीद तो जगाती है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा।









