जीएमडीए इंजीनियरों को सनाथ रोड जैसा मॉडल लागू करने के सीईओ के निर्देश

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बारिश का पानी सड़क पर नहीं—ग्रीन बेल्ट में ही रोकेंगे

जीएमडीए सीईओ श्री पीसी मीणा की इंजीनियरिंग विंग को दो टूक: पहले छोटा हिस्सा बनाकर दिखाओ, पसंद आया तो ही आगे बढ़ेगा काम; लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश

गुरुग्राम, 3 सितंबर। गुरुग्राम में अब सड़क बनाने के साथ-साथ बारिश के पानी को सड़क पर आने से रोकने और उसे मौके पर ही जमीन में उतारने पर जोर दिया जाएगा। जीएमडीए के सीईओ श्री पीसी मीणा ने इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों के साथ बैठक में सनाथ रोड के मॉडल को पूरे शहर में अपनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सनाथ रोड पर सड़क के साथ ग्रीन बेल्ट का लेवल नीचे रखा गया है। बारिश का पानी पहले बायो-स्वेल में जाता है और वहां रुकने के बाद ही सरफेस ड्रेन में पहुंचता है। यह व्यवस्था सुंदर होने के साथ सरल और काफी प्रभावी भी है।

सीईओ ने अधिकारियों से कहा कि जहां बारिश का पानी गिरता है, वहीं उसे अधिक से अधिक रोकने की व्यवस्था की जाए। इससे सड़क पर पानी का बहाव कम होगा और जलभराव की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

पहले छोटा हिस्सा बनाकर दिखाएं, फिर पूरा काम

विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सीईओ ने अधिकारियों और एजेंसियों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी सड़क, स्लिप रोड, ग्रीन बेल्ट या अन्य कार्य शुरू करने से पहले उसका कुछ हिस्सा तैयार करवाकर उन्हें दिखाया जाए। काम का मॉडल, डिजाइन और गुणवत्ता संतोषजनक पाए जाने के बाद ही उसे आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना निरीक्षण और स्वीकृति के पूरे काम को आगे बढ़ाने पर संबंधित एजेंसी के बिल का भुगतान नहीं किया जाएगा और जिस एजेंसी का काम संतोषजनक ना हो, उसे ब्लैक लिस्ट किया जाएगा । श्री मीणा ने अधिकारियों को मौके पर खड़े होकर काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

अपने इलाके को अपना समझो, कुछ नया करके दिखाओ

श्री मीणा ने इंजीनियरों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र को केवल जिम्मेदारी का इलाका न मानें, बल्कि उसे अपना क्षेत्र समझकर विकास कार्य करवाएं। अधिकारी स्वयं मौके पर जाएं, काम की निगरानी करें और अपनी क्रिएटिविटी का इस्तेमाल कर शहर में बेहतर काम करके दिखाएं।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो अधिकारी विकास कार्यों में रुचि लेकर काम नहीं करेंगे, उन्हें उनके पैतृक विभाग में वापस भेज दिया जाएगा। सीईओ ने कहा कि शहर के विकास में अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी और व्यक्तिगत जिम्मेदारी बेहद जरूरी है।

इंजीनियर पैदल चलकर देखेंगे फुटपाथ, कब्जे भी हटेंगे

शहर के फुटपाथों को राहगीरों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए सीईओ ने सभी इंजीनियरों को अपने-अपने क्षेत्रों में ‘फुट सर्वे’ करने यानी पैदल चलकर फुटपाथों की वास्तविक स्थिति देखने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि फुटपाथ इस तरह बनाए जाएं कि आम नागरिक बिना किसी बाधा के चल सकें। फुटपाथों पर अनाधिकृत कब्जे नहीं होने चाहिए। साथ ही फुटपाथ बनाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां ड्रेनेज की व्यवस्था पूरी हो। पहले ड्रेनेज, फिर फुटपाथ—ताकि बाद में जल निकासी के लिए नए बने फुटपाथ को दोबारा न तोड़ना पड़े।

ग्रीन बेल्ट सड़क से नीचे हो , पेड़ नहीं कटेंगे

सीईओ ने सड़क किनारे ग्रीन बेल्ट को भी शहर की जल निकासी और सौंदर्यीकरण व्यवस्था से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रीन बेल्ट का लेवल सड़क से नीचे रखा जाए और वहां पौधारोपण कराया जाए, ताकि बारिश का पानी उसमें जा सके।

उन्होंने साफ कहा कि विकास कार्यों के नाम पर पेड़ों की कटाई नहीं होनी चाहिए। मौजूदा पेड़ों की जरूरत के अनुसार कटाई-छंटाई करवाई जाए और निकलने वाले हॉर्टिकल्चर वेस्ट को तुरंत मौके से उठाया जाए। इसे सड़क या ड्रेन के किनारे जमा नहीं होने दिया जाए, क्योंकि यह बारिश के पानी के बहाव में बाधा बन सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि जरसी बैरियर तथा दीवारों को पेंट करवाएं ताकि शहर सुंदर लगे ।

‘म्हारी सड़क’ की शिकायतें अब इंजीनियर खुद देखेंगे

बैठक में सीईओ ने ‘म्हारी सड़क’ पोर्टल पर प्राप्त सड़क संबंधी शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक कार्यकारी अभियंता को अपने क्षेत्र से संबंधित शिकायतों को स्वयं देखने और मौके पर जाकर स्थिति जांचने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शिकायतों का समाधान केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारियों को सड़क संबंधी शिकायतों का जल्द निपटारा करने और जहां जरूरी हो वहां स्थायी समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया।
इस अवसर पर चीफ इंजीनियर हेमंत कुमार, अधीक्षक अभियंता प्रवीण कुमार व सुधीर रंसीवाल, आई टी हेड सुशील कुमार सहित कार्यकारी अभियंता उपस्थित थे ।

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Author: Bharat Sarathi

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