*अगले दो माह में जिला स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित कर डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को किया जाएगा और मजबूत : डॉ. सुमिता मिश्रा*
*मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर स्वास्थ्य संस्थानों को सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान*

गुरुग्राम, 3 सितंबर- हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) देश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य मरीज और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के बीच ऐसी भरोसेमंद एवं निर्बाध व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सुरक्षित रूप से उपलब्ध हो और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि एबीडीएम की सफलता तभी संभव है, जब सरकारी के साथ-साथ निजी स्वास्थ्य क्षेत्र भी इसे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सक्रिय रूप से अपनाए। उन्होंने यह बात गुरुवार को गुरुग्राम के सेक्टर 44 स्थित अपैरल हाउस में आयोजित एबीडीएम मॉडल जिला एवं स्वास्थ्य संस्थानों से संबंधित राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान कही।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि हरियाणा में सरकारी अस्पतालों और चिकित्सकों का एबीडीएम के तहत पंजीकरण लगभग पूर्ण हो चुका है, लेकिन निजी अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों तथा स्वास्थ्य पेशेवरों की भागीदारी को और बढ़ाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला का मकसद केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को एक मंच पर लाकर उनकी शंकाओं और व्यावहारिक समस्याओं को समझना तथा उनका समाधान करना है।
उन्होंने कहा कि एबीडीएम आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनेगा। इसलिए स्वास्थ्य संस्थानों को समय रहते डिजिटल व्यवस्था के लिए तैयार होना चाहिए। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाना समय की आवश्यकता है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों, स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सकों और तकनीकी भागीदारों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हरियाणा में अगले दो महीनों के दौरान जिला स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों को एबीडीएम से जोड़ने, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने तथा क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने एबीडीएम हरियाणा की टीम को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने निजी अस्पतालों और चिकित्सकों से विशेष रूप से अपील की कि वे एबीडीएम को केवल सरकारी पहल न मानें, बल्कि इसे स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की साझा जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल व्यवस्था जितनी व्यापक होगी, उतना ही मरीजों को इसका लाभ मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता तथा समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत हरियाणा ने उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। प्रदेश में अब तक 1.92 करोड़ से अधिक आभा पहचान-पत्र बनाए जा चुके हैं, जो राज्य की अनुमानित आबादी का लगभग 65 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य कवरेज को और बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी एवं सार्थक उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की करीब 98 प्रतिशत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री पर पंजीकृत हो चुकी हैं, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक लक्षित सरकारी चिकित्सकों का स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री पर पंजीकरण पूरा किया जा चुका है।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने आयुष्मान भारत से जुड़े अस्पतालों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को विशेष प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और जन्म के समय लिंगानुपात जैसे विषय केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध समाज के भविष्य से है। स्वास्थ्य संस्थानों और चिकित्सकों को उपचार के साथ-साथ इन सामाजिक चुनौतियों के प्रति भी संवेदनशील होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य एवं जिला स्तर पर आयोजित होने वाली इन कार्यशालाओं के माध्यम से एबीडीएम को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी तथा हरियाणा में नागरिकों को बेहतर, सुगम और एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
कार्यशाला में हरियाणा के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल, एबीडीएम हरियाणा के राज्य मिशन निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मनोज, भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं एबीडीएम के मिशन निदेशक किरण गोपाल वास्का, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निदेशक डॉ. पंकज अरोड़ा, गुरुग्राम के सिविल सर्जन डॉ. लोकवीर सिंह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के गगनदीप सहित अन्य अधिकारियों ने एबीडीएम की प्रगति, मॉडल जिला पहल, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के एकीकरण से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी एवं विचार साझा किए। कार्यशाला में मॉडल स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा एबीडीएम को अपनाने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने को लेकर प्रस्तुतियां दी गईं।








