हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल से विनिर्माण क्षेत्र के एमएसएमई को 15 कार्यदिवसों के भीतर मिलेगी सैद्धांतिक मंजूरी*

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*पात्र उद्यमों के लिए समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित करने को डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान*

*नए और विस्तार करने वाले विनिर्माण एमएसएमई को आवश्यक नियमित मंजूरियां प्राप्त करने के लिए 36 माह की अवधि*

*CIPA की वैधता के दौरान नियमित निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण*

*बिल का उद्देश्य विश्वास आधारित सुशासन को बढ़ावा देना और हरियाणा में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और सुदृढ़ करना*

चंडीगढ़, 1 सितंबर – हरियाणा में उद्यमियों के लिए कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण सुधारवादी कदम उठाया है। हरियाणा विधानसभा ने मंगलवार को हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल, 2026 पारित कर दिया। इस कानून के तहत पात्र नए और विस्तार करने वाले विनिर्माण क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को 15 कार्यदिवसों के भीतर सर्टिफिकेट ऑफ इन-प्रिंसिपल अप्रूवल (CIPA) प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। निर्धारित अवधि में निर्णय न होने की स्थिति में डीम्ड अप्रूवल का भी प्रावधान है।

राज्य सरकार के ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप यह कानून प्रक्रियागत देरी को कम करने तथा उद्यमियों के लिए नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने की प्रक्रिया को आसान एवं तेज बनाने का प्रयास है। इसके तहत उद्यमियों को प्रारंभिक चरण में सभी नियमित मंजूरियों की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।

कानून के प्रावधानों के अनुसार, नए विनिर्माण एमएसएमई तथा विस्तार करने वाले मौजूदा विनिर्माण एमएसएमई CIPA के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे नियमित मंजूरियां प्राप्त करने की प्रक्रिया के समानांतर उद्यमों की स्थापना अथवा विस्तार को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।

संबंधित उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित जिला नोडल एजेंसी द्वारा 15 कार्यदिवसों के भीतर CIPA प्रदान किया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो कानून के तहत डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान होगा। इससे पात्र उद्यमों के लिए समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।

सर्टिफिकेट ऑफ इन-प्रिंसिपल अप्रूवल 36 माह तक वैध रहेगा। इस अवधि के दौरान पात्र उद्यमों को सभी आवश्यक नियमित मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी। कानून के तहत नियमित मंजूरियों की आवश्यकता को समाप्त नहीं किया गया है, बल्कि पात्र उद्यमों को ये सभी मंजूरियां प्राप्त करने के लिए 36 माह की अवधि प्रदान की गई है, ताकि इस दौरान उनके उद्यम की स्थापना अथवा विस्तार की प्रक्रिया सुगमता से आगे बढ़ सके।

सर्टिफिकेट ऑफ इन-प्रिंसिपल अप्रूवल की वैधता के दौरान नियमित निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक रहेगी। वर्तमान में कानून के तहत इस अवधि के दौरान छह विभागों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण से संरक्षण का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार भविष्य में इस दायरे में और अधिक विभागों को शामिल करने पर विचार कर सकती है।

सर्टिफिकेट ऑफ इन-प्रिंसिपल अप्रूवल की 36 माह की वैधता अवधि मोराटोरियम अवधि के रूप में भी कार्य करेगी। हालांकि, कानून में आवश्यक सुरक्षा प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। किसी शिकायत के आधार पर निरीक्षण किया जा सकेगा। इसके अलावा भूमि उपयोग के उल्लंघन, अनधिकृत निर्माण, जन सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती अथवा अग्नि सुरक्षा से संबंधित मामलों में भी संबंधित विभाग के प्रमुख की सिफारिश के आधार पर निरीक्षण किया जा सकेगा।

कानून में मोराटोरियम अवधि के दौरान की गई किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से प्रभावित पात्र उद्यमों के लिए समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है।

इस प्रकार, हरियाणा राइट टू बिजनेस बिल, 2026 का उद्देश्य संतुलित एवं व्यावहारिक कानूनी ढांचे के माध्यम से विश्वास आधारित सुशासन को बढ़ावा देना है। यह कानून विनिर्माण क्षेत्र के एमएसएमई की स्थापना और विस्तार को सुगम बनाने के साथ-साथ राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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Author: Bharat Sarathi

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