गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 चिन्हित लोगों की भूमिका की अलग जांच होगी
सीजेपी ने पांच सितंबर का प्रस्तावित आंदोलन वापस लिया
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

नई दिल्ली, 1 सितंबर। सर्वोच्च न्यायालय ने नीट पेपर लीक के विरोध में 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित देशभर की एफआईआर बंद करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में आगे जांच अथवा अभियोजन नहीं चलेगा और किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में इन्हीं घटनाओं को लेकर नई एफआईआर भी दर्ज नहीं की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि राहत देते समय शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखा गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया कि यह आदेश मामले की विशेष परिस्थितियों में दिया गया है और इसे भविष्य के मामलों में नजीर नहीं माना जाएगा।
हालांकि, दिल्ली पुलिस को गंभीर पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 चिन्हित व्यक्तियों से संबंधित एक अलग एफआईआर में जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है। जांच में यह निर्धारित किया जाएगा कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा अथवा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में किसी व्यक्ति की क्या भूमिका थी। केवल चिन्हित होने से किसी को दोषी नहीं माना गया है।
केंद्र सरकार के साथ दिल्ली पुलिस, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम ने संबंधित एफआईआर बंद करने का अनुरोध किया था। आदेश के बाद सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने पांच सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन वापस लेने की घोषणा की।
यह फैसला शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को संरक्षण देने के साथ ही प्रदर्शन की आड़ में हुई कथित गंभीर हिंसा की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का रास्ता खुला रखता है।






