हरियाणा विधानसभा मानसून सत्र के अंतिम दिन 11 विधेयक चर्चा उपरांत पारित किए गए

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चण्डीगढ़, 31  अगस्त – हरियाणा विधानसभा में मानसून सत्र के अंतिम दिन 11 विधेयक चर्चा उपरांत पारित किये गये। पारित किए गए विधेयकों में हरियाणा विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026, हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026, हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, हरियाणा स्थानीय लेखा परीक्षा विधेयक, 2026, हरियाणा निजी विश्वविद्यालय(संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद् (निरसन) विधेयक, 2026, हरियाणा विधि अधिकारी (विनियोजन) संशोधन विधेयक, 2026 तथा हरियाणा कारबार का अधिकार अधिनियम,2026 शामिल हैं।

*हरियाणा विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026*

मार्च, 2027 के इकतीसवें दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान सेवाओं के लिए हरियाणा राज्य की संचित निधि में से कुल 7136,63,25,000 रुपये (केवल सात हजार एक सौ छत्तीस करोड़, तिरसठ लाख, पच्चीस हजार रुपये) के भुगतान और विनियोग का प्राधिकार देने के लिए हरियाणा विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026 पारित किया गया है।

*हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026*

हरियाणा राज्य में अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण तथा रक्षोपायों, धार्मिक तथा भाषाई अल्पसंख्यकों की अतिरिक्त सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक तथा    सांस्कृतिक अपेक्षाओं के बारे में अनुशंसा करने, धर्म-निरपेक्ष परम्पराओं का परिरक्षण करने और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तथा उससे सम्बन्धित या उससे आनुषंगिक मामलों के लिए अल्पसंख्यक आयोग का गठन करने हेतु हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026 पारित किया गया।

हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना राज्य स्तर पर एक संस्थागत व्यवस्था प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तावित है, ताकि अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए संविधान तथा विधियों में प्रदत्त सुरक्षा उपायों का मूल्यांकन किया जा सके और हरियाणा राज्य में ऐसे सुरक्षा उपायों तथा विधियों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सिफारिशें की जा सकें।

वैधानिक दर्जा प्राप्त आयोग अल्पसंख्यक समुदायों में उसके कार्यकरण और प्रभावशीलता के प्रति विश्वास उत्पन्न करेगा। इससे राज्य सरकार, विभागों, बोर्डों, निगमों, स्थानीय प्राधिकरणों तथा अल्पसंख्यकों के कल्याण और विकास से संबंधित अन्य संगठनों के समक्ष आयोग की सिफारिशों को अधिक महत्व प्राप्त होगा। अतः प्रस्तावित विधेयक द्वारा हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग को वैधानिक दर्जा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

आयोग का मुख्य कार्य राज्य में अल्पसंख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना, अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण हेतु संविधान तथा विधियों में प्रदत्त सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन का अनुश्रवण करना और अल्पसंख्यकों के अधिकारों तथा सुरक्षा उपायों से वंचित किए जाने संबंधी विशिष्ट शिकायतों की जांच करना होगा। आयोग अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास से संबंधित विषयों पर अध्ययन, अनुसंधान और विश्लेषण भी कराएगा तथा सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन और राज्य सरकार द्वारा अपनाए जाने योग्य उपयुक्त उपायों के संबंध में सिफारिशें करेगा।

*हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026*

हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 को संशोधित करने के लिए हरियाणा ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया गया।

वर्तमान प्रावधानों के अन्तर्गत निदेशक विकास एवं पंचायत विभाग ग्राम पंचायतों को उसकी शामलात देह में स्थित भूमि, ऐसे आवेदकों, जिन्होंने 31 मार्च, 2004 या उससे पहले शामलात भूमि पर अपने घर बनाए थे, को बेचने की स्वीकृति प्रदान करने के लिये अधिकृत है। अभी बड़ी संख्या में आवेदन अलग-अलग स्तरों पर स्वीकृति की प्रतिक्षा में लम्बित हैं। ऐसी स्वीकृति देने की प्रक्रिया को तेज करने और योग्य आवेदकों को समय पर राहत देने के लिए, संबंधित उपायुक्त को स्वीकृति देने का अधिकार सौंपना जरूरी है। अधिकारों के इस विकेंद्रीकरण से तेजी से फैसले लेने में मदद मिलने और लंबित मामलों की संख्या कम होगी।

*हरियाणा स्थानीय लेखा परीक्षा विधेयक, 2026*

सभी स्थानीय प्राधिकरणों और अन्य प्राधिकरणों, निकायों या संस्थाओं तथा स्थानीय निधि के लिए प्रभावी और दक्ष लेखा-परीक्षा प्रणाली और उससे सम्बद्ध तथा उसके आनुषंगिक मामलों के लिए उपबंध करने हेतु हरियाणा स्थानीय लेखा परीक्षा विधेयक, 2026 पारित किया गया।

भारत के अन्य राज्यों के स्थानीय लेखा परीक्षा विभागों के अधिनियमों/ नियमों को तथा स्थानीय लेखा परीक्षा विभाग हरियाणा की समान कार्यप्रणाली को देखते हुए, विभाग के लिए एक अधिनियम तैयार करने की भी आवश्यकता है, ताकि एक मजबूत वैधानिक ढांचा प्रदान किया जा सके जो स्थानीय लेखा परीक्षा विभाग, हरियाणा को स्थानीय निकायों (पंचायती राज संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों) तथा अन्य विविध स्थानीय निधि संस्थानों जैसे कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों, विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी, महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, सरकारी/ सरकारी सहायता प्राप्त हाई स्कूलों, सीनियर सेकेंडरी स्कूलों, कॉलेजों और किसी भी कानून या सरकार के आदेश द्वारा या उसके तहत स्थापित किसी अन्य प्राधिकरण, निकाय या संस्थान तथा किसी अन्य निधि जिसे सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उद्देश्य के लिए स्थानीय निधि घोषित करे, की स्वतंत्र, समयबद्ध और प्रभावी लेखा परीक्षा करने के लिए सशक्त बनाएगा।

लेखा परीक्षकों के प्रति लेखा परीक्षित संस्थानों की जवाबदेही लागू करने या रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करने हेतु मजबूत कानूनी शक्तियों की आवश्यकता है। यह एक सख्त कानूनी तंत्र विकसित करने के लिए जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थानीय प्राधिकरण एक निश्चित समय सीमा के भीतर ऑडिट पैरा (लेखा परीक्षा आपत्तियों) का जवाब दें। यह अधिनियम स्थानीय लेखा परीक्षा के निदेशक को वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों को सीधे सरचार्ज (अधिभार) नोटिस जारी करने के लिए कानूनी रूप से सशक्त करेगा। यह अधिनियम वैधानिक समर्थन प्रदान करेगा जो लेखा परीक्षा ढांचे को स्थानीय राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप से बचाता है। यह पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए राज्य विधानमंडल को वार्षिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट सौंपने के लिए वैधानिक समय सीमा अनिवार्य करता है।

*हरियाणा निजी विश्वविद्यालय(संशोधन) विधेयक, 2026*

हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2006 को संशोधित करने के लिए हरियाणा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया।

राज्य के युवाओं को उच्चतर शिक्षा में बेहतर अवसर प्रदान करने हेतु शैक्षणिक संस्थाओं की संरचना और विस्तार की आवश्यकता है। उच्चतर शिक्षा में विद्यार्थियों की अप्रत्याशित वृद्धि को समायोजित करने की व्यवस्था में और 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुसार प्राप्त करने के लिए भी हमें सभी स्तरों पर वर्ष 2030 तक संस्थाओं की संख्या में मौटे तौर पर दोहरी वृद्धि करने की आवश्यकता है। उच्चतर शिक्षा में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप पर्याप्त नहीं होगा। निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रमुख रूप में शामिल करने की आवश्यकता है। उच्चतर शिक्षा और इसके मानकों के पैमाने की क्षमता का विस्तार करने में सरकार की पहल के अनुपूरक में हरियाणा निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2006 को अनिवार्य रूप से लाया गया है।

इसके अतिरिक्त अधिनियम में वर्णित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु जिला रेवाडी में कुसुम अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय व जिला गुरुग्राम में मास्टर्स यूनियन विश्वविद्यालय स्थापित करने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव का प्रतिपादन किया गया है।

*हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026*

हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 को संशोधित करने के लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया।

हरियाणा राज्य महिला आयोग का गठन हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 (2012 का हरियाणा अधिनियम 27) के तहत किया गया है। आयोग को राज्य में महिलाओं के अधिकारों और हितों की रक्षा एवं उनके संवर्धन की वैधानिक जिम्मेदारी दी गई है।

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं से संबंधित शिकायतों, ज्ञापनों और अन्य मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप आयोग के कार्यभार और जिम्मेदारियों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में आयोग में पांच गैर-सरकारी सदस्य हैं। बढ़े हुए कार्यभार को देखते हुए यह संख्या आयोग के कार्यों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए, आयोग की कार्यक्षमता और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 3 (2) (ख) में संशोधन करना आवश्यक समझा गया है। इसके तहत गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात करना प्रस्तावित है।

चूंकि उस समय हरियाणा विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा था और तत्काल कार्रवाई आवश्यक थी, इसलिए हरियाणा के राज्यपाल द्वारा 9 जुलाई, 2026 को हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2026 प्रख्यापित किया गया। इस अध्यादेश द्वारा अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (2) के खंड (ख) में ‘‘पांच’’ शब्द के स्थान पर ‘‘सात’’ शब्द कर दिया गया। अब उक्त अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने तथा किए गए संशोधन को विधिवत प्रभावी बनाने के लिए हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया गया। अतः हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 में उक्त संशोधन को स्थायी रूप से लागू करने के लिए इस विधेयक को अधिनियमित किया जाना आवश्यक है।

*हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026*

हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 को संशोधित करने के लिए हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया।

हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (अधिनियम) को राज्य सरकार द्वारा माल या सेवाओं या दोनों की अंतःराज्य प्रदाय पर कर लगाने और संग्रह के प्रावधान के दृष्टिकोण के साथ अधिनियमित किया गया था।

जीएसटी परिषद् की सिफारिशों के आधार पर तथा वित्त अधिनियम, 2026 (2026 का केन्द्रीय अधिनियम 4) के द्वारा केन्द्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में किए गए संशोधनों की तर्ज पर हरियाणा माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव है। प्रस्तावित हरियाणा माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 में बिक्री के बाद मिलने वाली छूट को खास तौर पर संबंधित चालान से जुड़े अनुबंध से जोड़ने की ज़रूरत को खत्म करने और धारा 34 के अधीन क्रेडिट नोट जारी करने का जिक्र करने के लिए, जब प्राप्तकर्ता द्वारा इनपुट कर प्रत्यय को उलट किया जाना है, के लिए अधिनियम की धारा 15 की उप-धारा (3) में संशोधन करना, अधिनियम की धारा 34 में संशोधन करना ताकि बिक्री के बाद की छूट के लिए क्रेडिट नोट जारी करने के मकसद से, धारा 15 की उप-धारा (3) के खंड (ख) में निर्दिष्ट छूट का जिक्र इस धारा में शामिल किया जा सके और  अधिनियम की धारा 54 की उप-धारा (6) में संशोधन करना ताकि इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से मिलने वाले प्रतिदाय पर भी अनंतिम प्रतिदाय के प्रावधान लागू किए जा सके।

*हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026*

हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 को संशोधित करने के लिए हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2026 पारित किया गया।

हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के वर्तमान प्रावधानों के अंतर्गत, सरकारी योजनाओं के लिए चिन्हित पात्र लाभार्थियों पर विचार करने एवं उनका अनुमोदन करने तथा ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने हेतु ग्राम सभा की बैठक में सामान्य बैठक की अपेक्षा अधिक कोरम निर्धारित किया गया है, ताकि अधिकाधिक सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनी रहे।

इस बैठक में 40 प्रतिशत, प्रथम स्थगित बैठक में 30 प्रतिशत तथा द्वितीय स्थगित बैठक में 20 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति का निर्धारित कोरम प्राप्त करना कठिन हो रहा है और अपेक्षित कार्यवाही नहीं हो पा रही है। बैठकों में अपेक्षित कार्यवाही न होने के कारण सरकारी योजनाओं को लागू करने में देरी हो रही है। इसलिए, कोरम की जरूरत को तर्कसंगत बनाने लिए मुख्य बैठक में कुल सदस्यों का 20 प्रतिशत, प्रथम स्थगित बैठक में 15 प्रतिशत तथा द्वितीय स्थगित बैठक में निर्धारित संख्या में सदस्यों की उपस्थिति को कोरम के रूप में निर्धारित किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ग्राम सभा में पर्याप्त जनभागीदारी एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लक्ष्य और इस व्यावहारिक जरूरत के बीच संतुलन बनाना है कि ग्राम सभा की बैठकें अपना तय काम प्रभावी ढंग से और समयबद्ध रूप से कर सकें।

*हरियाणा राज्य भौतिक-चिकित्सा परिषद् (निरसन) अधिनियम, 2026*

हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 2020 का निरसन करने हेतु हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद् (निरसन) अधिनियम, 2026 पारित किया गया।

हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद् का गठन हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 2020 के अधीन राज्य में भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) के व्यवसाय को विनियमित करने के उद्देश्य से किया गया था, जिसमें भौतिक चिकित्सकों का पंजीकरण, रजिस्टरों का रख-रखाव, शैक्षणिक संस्थानों एवं पाठ्यक्रमों का विनियमन तथा व्यावसायिक मानकों और नैतिक आचरण को सुनिश्चित करना सम्मिलित है।

तत्पश्चात, केंद्रीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 अधिनियमित किया गया, जिसमें सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल व्यवसायों के लिए शिक्षा एवं सेवाओं के मानकों के विनियमन और रख-रखाव तथा राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल परिषदों के गठन का प्रावधान किया गया है। उक्त अधिनियम के अधीन भौतिक चिकित्सा को सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल व्यवसाय के रूप में सम्मिलित किया गया है। उक्त केंद्रीय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसरण में हरियाणा राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल परिषद् का गठन किया गया है। केंद्रीय अधिनियम के अधीन स्थापित वैधानिक ढांचे के दृष्टिगत, भौतिक चिकित्सा से संबंधित विनियामक कार्यों को एकीकृत ढांचे के अंतर्गत लाया जाना आवश्यक है।

अतः एकीकृत विनियामक ढांचे के अंतर्गत सुगम परिवर्तन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद् अधिनियम, 2020 को निरसित करने हेतु हरियाणा राज्य भौतिक चिकित्सा परिषद् (निरसन) विधेयक, 2026 अधिनियमित किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित विधेयक में आवश्यक बचत एवं परिवर्तनकालीन उपबंध किए गए हैं, ताकि वर्ष 2020 के अधिनियम के अधीन की गई कार्यवाहियों की वैधता एवं निरंतरता जिनमें पंजीकरणों, कार्यवाहियों की निरंतरता तथा परिसंपत्तियों, देयताओं और कार्मिकों का राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखभाल परिषद् को अंतरण सम्मिलित है, सुरक्षित रहें।

इस निरसन से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि व्यय की पूर्ति संबंधित परिषद् के संसाधनों से की जाएगी।

*हरियाणा विधि अधिकारी (विनियोजन) संशोधन विधेयक, 2026*

हरियाणा विधि अधिकारी (विनियोजन) अधिनियम, 2016 को संशोधित करने के लिए हरियाणा विधि अधिकारी (विनियोजन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया गया।

हरियाणा विधि अधिकारी (विनियोजन) अधिनियम, 2016, को 14.09.2016 को इस उद्देश्य से अधिसूचित किया गया था कि हरियाणा के महाधिवक्ता के कार्यालय में कानून अधिकारियों की नियुक्ति की एक पारदर्शी, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ प्रणाली प्रदान की जा सके तथा इससे जुड़े या आनुषंगिक मामलों की व्यवस्था की जा सके। परिवर्तित परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए और विशेष रूप से ‘‘भारतीय न्याय संहिता 2023’’ के लागू होने के साथ जिसके तहत लगभग बीस नए अपराध जोड़े गए हैं, कई अपराधों के लिए कारावास की सजा और जुर्माने की राशि में वृद्धि की गई है, तथा कुछ अपराधों के लिए सामुदायिक सेवाआंे की सजा का प्रावधान भी किया गया है विशेष योग्यता और अनुभव के आधार पर अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (3) के परंतुक के तहत नियुक्त किए जाने वाले अधिवक्ताओं की संख्या को विशेष प्रकृति के मामलों से निपटने के लिए 10 से बढ़ाकर 15 करने की आवश्यकता है।

*हरियाणा कारबार का अधिकार विधेयक, 2026*

हरियाणा राज्य में योग्य उद्यम के लिए कारबार की स्थापना और संचालन को सुगम बनाने हेतु समर्थ सह-प्रणाली के माध्यम से स्व-प्रमाणीकरण, छूट, त्वरित अनुमोदन, निरीक्षण करने और इससे संबंधित अथवा उसके अनुषंगिक मामलों के उपबंध करने हेतु हरियाणा कारबार का अधिकार विधेयक, 2026 पारित किया गया।

हरियाणा में व्यावसायिक उद्यमों की स्थापना और संचालन को नियंत्रित करने वाले मौजूदा नियामक ढाँचे के तहत उद्यमियों को संचालन शुरू करने से पहले विभिन्न सरकारी प्राधिकरणों से अनेक अनुमोदन, लाइसेंस और पंजीकरण प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। ऐसे अनुमोदनों को अक्सर विभिन्न राज्य एजेंसियों  द्वारा क्रमिक रूप से संसाधित किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यवसायों के लिए, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए, लंबे समय तक विलंब और महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बोझ उत्पन्न होता है, जिनके पास सामान्यतः सीमित वितीय और प्रशासनिक संसाधन होते हैं।

स्थापना से पहले सभी वैधानिक अनुमोदन प्राप्त करने की आवश्यकता ने राज्य में औद्योगिक विकास, उद्यमिता और नवाचार को बाधित किया है। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, ‘‘कारबार का अधिकार’’ के सिद्धांत पर आधारित एक सुविधाजनक ढाँचा शुरू करने का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य लागू कानूनों, नियामक मानकों और सार्वजनिक सुरक्षा आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए अनावश्यक प्रक्रियात्मक विलंब को कम करके व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा देना है।

हरियाणा कारबार का अधिकार विधेयक, 2026 का उद्देश्य समयबद्ध, सैद्धांतिक पूर्व-स्थापना अनुमोदनों की एक प्रणाली प्रदान करना है, जो पात्र उद्यमों को निर्धारित शर्तों के अधीन व्यावसायिक गतिविधियाँ शुरू करने की अनुमति देगी, जबकि मूल अनुमोदनों की प्रक्रिया समानांतर रूप से जारी रहेगी।

विधेयक सरकार के न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है और इसका उद्देश्य एक निवेशक अनुकूल नियामक वातावरण को बढ़ावा देना है, जो उद्यमिता को प्रोत्साहित करे और कारबार करने में सुगमता को सुगम बनाए। इसमें पात्र उद्यमों को एकमुश्त सैद्धांतिक पूर्व-स्थापना अनुमोदन, लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए एक ढाँचे का प्रस्ताव है, जिससे वे लागू वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन करते हुए शीघ्रता से संचालन शुरू कर सकें। वर्तमान में, नियामक पारिस्थितिकी तंत्र नए उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण प्रवेश बाधाएँ प्रस्तुत करता है, क्योंकि इसमें एक खंडित, बहु-एजेंसी अनुमोदन प्रक्रिया है, जिसके तहत उद्यमियों को कारबार स्थापित करने से पहले अनेक स्वीकृतियाँ और लाइसेंस प्राप्त करने पड़ते हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, विधेयक सैद्धांतिक पूर्व-स्थापना अनुमोदनों की एक सुव्यवस्थित व्यवस्था शुरू करता है, जिससे प्रक्रियात्मक बोझ कम होगा, कारबार की स्थापना में तेजी आएगी और राज्य में निवेश तथा उद्यम विकास के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार होगा।

विधेयक पात्र उद्यमों द्वारा संचालन शुरू करने के लिए आशय की घोषणा दाखिल करने की प्रक्रिया को सुगम बनाता है और उन्हें एक निर्दिष्ट अवधि के लिए विशिष्ट राज्य-स्तरीय निरीक्षणों और स्वीकृतियों से छूट प्रदान करता है, जिससे वे आसानी से अपना कारबार स्थापित और संचालित कर सकें। विधेयक सैद्धांतिक अनुमोदन प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए एक निर्धारित समय-सीमा प्रदान करता है और जहाँ निर्धारित अवधि के भीतर सैद्धांतिक अनुमोदन पर निर्णय नहीं लिया जाता है, वहाँ मानी गई स्वीकृति की अवधारणा प्रस्तुत करता है।

विधेयक पात्र उद्यमों को सभी आवश्यक वैधानिक अनुमोदन प्राप्त करने के लिए छत्तीस महीने की अधिस्थगन अवधि की अनुमति देता है। विधेयक अधिस्थगन अवधि के दौरान निरीक्षण और दंडात्मक उपायों को प्रतिबंधित करता है, सिवाय निर्दिष्ट मामलों के, जो गंभीर शिकायतों, अनधिकृत निर्माण, भूमि उपयोग विनियमों के उल्लंघन या सार्वजनिक सुरक्षा, संरचनात्मक अखंडता और अग्नि सुरक्षा से संबंधित मामलों पर आधारित हो। विधेयक पात्र उद्यमों के हितों की रक्षा करने और निर्णय लेने में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपील और शिकायत निवारण की एक व्यवस्था स्थापित करता है। सुविधा और शिकायत निवारण का दायित्व राज्य और जिला स्तर पर नोडल एजेंसियों को सौंपा जाएगा।

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Author: Bharat Sarathi

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