भारी बारिश के बाद जलभराव वाले स्थानों पर पहुंचे जीएमडीए सीईओ, कारण तलाशे और दिए स्थायी समाधान के निर्देश

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*सुभाष चौक से शुरू हुआ निरीक्षण, वाटिका चौक, सोहना रोड, मेदांता रोड, ताऊ देवी लाल स्टेडियम और सेक्टर 22/23 तक पहुंचे पी.सी. मीणा*

*लेग-4 में अधिक पानी डायवर्ट करने, पंप लगाने और पुरानी ड्रेन की मरम्मत के निर्देश; रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की भी होगी जांच*

*गुरुग्राम, 25 अगस्त*। सोमवार को हुई भारी बारिश के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में हुए जलभराव के कारणों और जल निकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री पी.सी. मीणा मंगलवार को अधिकारियों के साथ सड़कों पर उतरे। उन्होंने जीएमडीए, नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के साथ जलभराव वाले प्रमुख स्थानों का मौके पर निरीक्षण किया और जहां भी जल निकासी में खामी अथवा अवरोध मिला, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए।

*सुभाष चौक पर पंप लगाकर होगी पानी की निकासी*

श्री मीणा ने निरीक्षण की शुरुआत सोहना रोड स्थित सुभाष चौक से की। यहां जलभराव की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने जीएमडीए अधिकारियों को उपयुक्त स्थान पर सम्प बनाकर पंप लगाने के निर्देश दिए, ताकि बारिश के दौरान पानी की तेजी से निकासी की जा सके।

सीईओ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में सुभाष चौक पर जलभराव नहीं होना चाहिए। इसके लिए जो भी आवश्यक तकनीकी एवं व्यावहारिक उपाय हैं, उन्हें तत्काल लागू किया जाए।

उन्होंने क्षेत्र में स्थित रिहायशी और व्यावसायिक भवनों में लगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर की भी जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन भवनों में नियमानुसार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम होना अनिवार्य है, वहां यह सुनिश्चित किया जाए कि स्ट्रक्चर केवल बना हुआ ही नहीं, बल्कि चालू हालत में भी हो।

साथ ही, उन्होंने सुपर सकर मशीन के माध्यम से ड्रेनेज सिस्टम की सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि नालियों में गाद अथवा अन्य अवरोध के कारण पानी का प्रवाह प्रभावित न हो।

*वाटिका चौक पर लेग-4 में ज्यादा पानी डायवर्ट करने के निर्देश*

सुभाष चौक के बाद सीईओ अधिकारियों की टीम के साथ वाटिका चौक पहुंचे। यहां उन्होंने हाल ही में तैयार किए गए लेग-4 ड्रेन का निरीक्षण किया।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न स्थानों से आने वाले पानी को अधिक से अधिक मात्रा में नई लेग-4 ड्रेन में डायवर्ट किया जाए। इससे बादशाहपुर ड्रेन यानी लेग-3 पर पानी का दबाव कम होगा और शहर की समग्र जल निकासी व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

*एयरिया मॉल के सामने भरने वाले बरसाती पानी का भी होगा स्थाई समाधान*

इसके बाद श्री मीणा ने सोहना रोड पर एयरिया मॉल के सामने जलभराव वाले स्थान का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि यह सड़क एनएचएआई के अधीन है और यहां सर्विस लेन का ढलान उचित नहीं होने के कारण बारिश का पानी जमा हो जाता है।

मौके पर अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद सीईओ ने फिलहाल एनएचएआई के समन्वय से पंप लगाने और पानी को नजदीकी तालाबों/जोहड़ों में पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाद में इस पानी को सेक्टर 68/69 सड़क के साथ बनाई जाने वाली सरफेस ड्रेन में डाला जाएगा, जिससे इस समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा । इस सड़क का निर्माण कार्य जीएमडीए ने अलॉट कर रखा है। अधिकारियों ने बताया कि इस स्थान से लगभग एक किलोमीटर और तीन किलोमीटर की दूरी पर दो तालाब उपलब्ध हैं, जहां पंप के माध्यम से पानी पहुंचाया जा सकता है।

*मेदांता रोड की सभी सरफेस ड्रेन जुड़ेंगी ताऊ देवी लाल स्टेडियम की नई ड्रेन से*

सीईओ ने इसके बाद मेदांता रोड, अंडरपास और ताऊ देवी लाल स्टेडियम का निरीक्षण किया। यहां नव निर्मित ड्रेन की स्थिति देखने के बाद उन्होंने क्षेत्र में मौजूद सभी सरफेस ड्रेनों को नई ड्रेन से जोड़ने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों को जल निकासी व्यवस्था की नियमित निगरानी करने के निर्देश देते हुए कहा कि बारिश के दौरान संबंधित एसडीओ द्वारा इस ड्रेन में बह रहे पानी के स्तर की वीडियो भेजकर मौके की स्थिति की जानकारी दी जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

*सुखराली स्वागत गेट का पिलर ड्रेन पर, एमसीजी को गलती सुधारने के निर्देश*

निरीक्षण के दौरान श्री मीणा सेक्टर-17सी के सामने सुखराली स्वागत गेट पर भी पहुंचे। यहां स्वागत गेट के एक पिलर का बेस ड्रेन के ऊपर बना हुआ पाया गया, जिससे ड्रेन का प्रभावी दायरा कम हो गया है।

सीईओ ने इस पर नाराजगी जताते हुए एमसीजी के मुख्य अभियंता को इस खामी को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए, ताकि जल निकासी की क्षमता प्रभावित न हो।

*सेक्टर 22/23 और 23ए में पुरानी ड्रेन की दीवारें गिरीं, पेड़ों की जड़ों से भी नुकसान*

इसके बाद सीईओ ने सेक्टर 22/23 और 23ए का दौरा किया। यहां लेग-1 के किनारे दो स्थानों पर क्षतिग्रस्त मिले ।

एक स्थान रोटरी पब्लिक स्कूल के पास ग्रीन बेल्ट में तथा दूसरा सेक्टर 23ए की ग्रीन बेल्ट के साथ पाया गया। सेक्टर 23ए में स्थिति अधिक गंभीर थी। यहां ड्रेन में सड़क और फुटपाथ का हिस्सा तथा स्ट्रीट लाइट का पोल तक गिरा हुआ मिला।

निरीक्षण में सामने आया कि ड्रेन के बेहद नजदीक लगाए गए पेड़ों की जड़ें ड्रेन की पुरानी ईंटों की दीवारों में प्रवेश कर गई हैं, जिसके कारण दीवार क्षतिग्रस्त होकर गिर गई। कुछ पेड़ भी फिलहाल असुरक्षित स्थिति में अधर में लटके हुए पाए गए। निरीक्षण के दौरान ड्रेन के ऊपर स्ट्रीट लाइट के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे पाए गए। इसके अलावा बिजली की 1100 केवी की भूमिगत तारें भी ड्रेन के ऊपरी लेंटर के ऊपर से ट्रेंचलेस तकनीक के माध्यम से डाली गई पाई गईं।

सीईओ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ड्रेन की संरचना और जल निकासी क्षमता को प्रभावित करने वाले सभी अवरोधों की तकनीकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस ड्रेन की मरम्मत के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में ड्रेन के जल प्रवाह क्षेत्र में किसी प्रकार का स्थायी अथवा अस्थायी अवरोध न हो।

*लेग-1, लेग-2 और बादशाहपुर ड्रेन की भी हुई जांच*

निरीक्षण के दौरान श्री मीणा ने शहर की प्रमुख जल निकासी व्यवस्था के तहत लेग-1, लेग-2 और लेग-3 यानी बादशाहपुर ड्रेन का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से बारिश के दौरान इन ड्रेनों में पानी के प्रवाह और जल निकासी की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यकतानुसार क्षमता और प्रवाह में सुधार के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बारिश के बाद केवल पानी निकालना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जलभराव के मूल कारणों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर भी जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान जीएमडीए के मुख्य अभियंता श्री प्रवीण चौधरी, एमसीजी के मुख्य अभियंता श्री विजय ढाका, ट्रैफिक पुलिस के एसीपी श्री इंद्रजीत सहित जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता एवं अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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