हड़ताल से गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था चरमराई, जगह-जगह कूड़े के ढेर

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दिनेश वशिष्ठ और रितु चौधरी ने सफाई कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल बातचीत कर स्थायी समाधान निकालने की मांग की

गुरुग्राम। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके गुरुग्राम में सफाई व्यवस्था अभी तक पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। ग्रीन बेल्ट में भी कचरा फेंका जा रहा है। बारिश के मौसम में जलभराव और गंदगी के कारण बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।

सेक्टर-3, 5 एवं 6 के पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिनेश वशिष्ठ ने कहा कि इन सेक्टरों में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। ग्रीन बेल्ट में हरियाली के स्थान पर गंदगी दिखाई दे रही है। नियमित रूप से झाड़ू नहीं लगने के कारण सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा जमा हो रहा है।

मांगों की अनदेखी से हड़ताल की नौबत

वशिष्ठ ने कहा कि सफाई कर्मचारियों का अपने अधिकारों और सुविधाओं के लिए आवाज उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। उनकी जायज मांगों पर समय रहते विचार नहीं किए जाने के कारण कर्मचारियों को धरना और हड़ताल करने पर मजबूर होना पड़ता है। इसका सीधा प्रभाव शहर की सफाई व्यवस्था और आम नागरिकों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। हड़ताल समाप्त होने के बाद कुछ समय तक सफाई व्यवस्था सुधरती है, लेकिन बाद में हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं।

रील बनाने के बजाय धरातल पर उतरें पार्षद

दिनेश वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम के कई पार्षद जमीनी समस्याओं के समाधान और जनहित की आवाज उठाने के बजाय सोशल मीडिया पर रील बनाने में अधिक व्यस्त दिखाई देते हैं। जहां सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है, वहां पार्षदों की सक्रिय मौजूदगी दिखाई देनी चाहिए।

महिला सफाई कर्मचारियों की समस्याओं पर दें ध्यान

नवत्रंग फाउंडेशन की चेयरपर्सन रितु चौधरी ने कहा कि सरकार एक ओर महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर सफाई व्यवस्था में कार्यरत महिला कर्मचारियों की समस्याओं पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।

उन्होंने दावा किया कि गुरुग्राम के सफाई कर्मचारियों में लगभग 90 प्रतिशत महिलाएं हैं। कई स्थानों पर स्वीकृत संख्या के मुकाबले काफी कम कर्मचारी धरातल पर काम करते दिखाई देते हैं। इससे उपलब्ध कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है।

रितु चौधरी ने अनुसूचित जाति आयोग और महिला आयोग के अध्यक्षों से मामले का संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सफाई कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों को काम के दौरान परेशानी, भेदभाव अथवा शोषण का सामना न करना पड़े।

दिनेश वशिष्ठ और रितु चौधरी ने सरकार एवं प्रशासन से सफाई कर्मचारियों की जायज मांगों पर तत्काल बातचीत करने, उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने और हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए धरातल पर नियमित और जवाबदेह सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

“सफाई कर्मचारियों के हक की आवाज उठाना भी जनसेवा का हिस्सा है और जनहित की आवाज उठाना लोकतंत्र की मजबूती का मार्ग है।” — दिनेश वशिष्ठ

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Author: Bharat Sarathi

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