आवारा पशुओं का आतंक: सात माह में चार नागरिकों की मौत

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वेदप्रकाश विद्रोही ने उठाया सवाल—पशु पकड़ने के लिए मिलने वाला लाखों रुपये का बजट आखिर कहां खर्च हो रहा?

रेवाड़ी, 13 अगस्त 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासन के दौरान पिछले दस वर्षों से रेवाड़ी में आवारा पशु नागरिकों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले सात महीनों में आवारा पशुओं के कारण चार नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें दो बुजुर्गों की जान बीते एक सप्ताह में गई है।

विद्रोही ने कहा कि रेवाड़ी की सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं के झुंड लगातार दुर्घटनाओं और हमलों का कारण बन रहे हैं। जब किसी नागरिक की मौत होती है या वह घायल होता है, तब सत्तारूढ़ दल के नेता और प्रशासन भविष्य में ऐसी घटना न होने देने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती।

उन्होंने आरोप लगाया कि दो बुजुर्गों की हालिया मौतों के बाद भी स्थानीय भाजपा विधायक ने संवेदना जताने और कार्रवाई का आश्वासन देने तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित रखी है। उन्होंने पूछा कि आवारा पशुओं की समस्या को लेकर पूर्व में किए गए दावों और घोषणाओं का क्या परिणाम निकला?

पशु पकड़ने का बजट कहां खर्च हुआ?

विद्रोही ने कहा कि रेवाड़ी जिले में रेवाड़ी नगर परिषद तथा धारूहेड़ा और बावल नगरपालिकाओं सहित तीन नगर निकाय हैं। इन निकायों में आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए लाखों रुपये का बजट निर्धारित किया जाता है। ऐसे में यह सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि यह राशि कहां और किस कार्य पर खर्च हुई।

उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार द्वारा संचालित अथवा सहायता प्राप्त वे गौशालाएं कहां हैं, जहां पकड़े गए बेसहारा गोवंश को रखने की व्यवस्था है? यदि इसके लिए सरकारी प्रबंध मौजूद हैं, तो फिर रेवाड़ी शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं के झुंड क्यों घूम रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक क्यों बना हुआ है?

पशु मालिकों पर कार्रवाई की मांग

विद्रोही ने मांग की कि सड़कों पर पशुओं को खुला छोड़ने वाले मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार, पुलिस, प्रशासन और नगर निकायों को केवल बयान जारी करने के बजाय जवाबदेही तय करते हुए स्थायी समाधान करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कथनी और करनी में भारी अंतर है। जब तक प्रशासनिक लापरवाही और बजट के उपयोग की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक आम नागरिकों को इस समस्या से राहत मिलने की संभावना नहीं है।

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Author: Bharat Sarathi

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