लोकतंत्र सत्ता और विपक्ष दोनों से चलता है, नेता प्रतिपक्ष को पर्याप्त अवसर देना संसदीय परंपरा का सम्मान
सांसद पप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
चंडीगढ़, 3 अगस्त। सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने कहा कि संसद केवल सरकार की बात रखने का मंच नहीं, बल्कि देश की जनता की आवाज और लोकतांत्रिक असहमति की सर्वोच्च संस्था है। संसद के मौजूदा मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जिस प्रकार लगातार टकराव की स्थिति बन रही है, वह स्वस्थ संसदीय लोकतंत्र के हित में नहीं है। सरकार और लोकसभा में सत्तापक्ष की यह जिम्मेदारी है कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले और सदन सार्थक चर्चा एवं संवाद के साथ चले।
कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश के करोड़ों मतदाताओं की आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि नेता प्रतिपक्ष महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहते हैं तो संसदीय नियमों और परंपराओं के अनुरूप उन्हें पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। सरकार को यह समझना होगा कि असहमति लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे के विरोधी हो सकते हैं, लेकिन संसदीय लोकतंत्र में दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है।
सांसद ने कहा कि कांग्रेस सदैव संसद की गरिमा, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान की पक्षधर रही है। सदन में बहस हो, सवाल पूछे जाएं, सरकार जवाब दे और विपक्ष अपनी बात रखे यही संसदीय व्यवस्था की मूल भावना है। केवल संख्या बल के आधार पर विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज करने की कोई भी प्रवृत्ति लोकतंत्र को कमजोर करेगी। सरकार को टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई घटना को भी बेहद निंदनीय और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक व्यक्ति द्वारा उन पर जूता/चप्पल फेंकने की घटना हुई तथा चाकू रखे होने का आरोप भी सामने आया है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है। किसी जनप्रतिनिधि के साथ हिंसा या हिंसा की कोशिश को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सांसद ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए और जो भी व्यक्ति कानून के अनुसार दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। राजनीतिक मतभेद चाहे कितने भी गहरे क्यों न हों, उनका जवाब हिंसा, धमकी या हमले से नहीं दिया जा सकता। लोकतंत्र में विचार का मुकाबला विचार से और सवाल का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए।
कुमारी सैलजा ने कहा कि देश में प्रत्येक सांसद, विपक्षी नेता, पत्रकार और आम नागरिक को निर्भय होकर अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। सरकार की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण सुनिश्चित करना भी है जिसमें असहमति व्यक्त करने वाला व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।
सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संसद में गतिरोध समाप्त करने के लिए विपक्ष के साथ सार्थक संवाद किया जाए, महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कराई जाए और सभी जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाए। लोकतंत्र की खूबसूरती आवाज दबाने में नहीं, बल्कि अलग-अलग आवाजों को सुनने और उनका सम्मान करने में है।








