संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने और जांच के आधार पर एफआईआर की कार्रवाई करने के निर्देश, इंजीनियरिंग अधिकारियों की भूमिका की भी होगी विस्तृत जांच
गुरुग्राम, 9 जुलाई। नगर निगम गुरुग्राम ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त रुख अपनाया है। एक मामले में हुई जांच के निष्कर्षों के आधार पर निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने ड्राफ्ट्समैन सोमबीर से तत्काल स्पष्टीकरण मांगने तथा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही मामले में कथित रूप से फर्जी अथवा जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने और टेंडर प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी किए जाने के आरोपों की जांच के आधार पर संबंधित कर्मचारी एवं फर्मों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनों के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जांच में सामने आए तथ्यों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामले की जांच में यह आरोप सामने आया कि संबंधित ड्राफ्ट्समैन ने कथित अनियमितताओं के संबंध में नगर निगम के हितों की रक्षा के लिए अपेक्षित कदम नहीं उठाए। रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित फर्मों में उसके पिता एवं करीबी रिश्तेदारों के मालिक अथवा साझेदार होने के बावजूद उसने टेंडर आवंटन प्रक्रिया से स्वयं को अलग नहीं किया। जांच के निष्कर्षों में इस स्थिति को कॉन्फलिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट से जुड़ा विषय माना गया है। निगमायुक्त ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए लागू सेवा नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
फर्जी दस्तावेजों के आरोपों की भी होगी जांच
मामले में संबंधित फर्मों द्वारा टेंडर प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से फर्जी अथवा जाली दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप भी सामने आए हैं। निगमायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि मामले में उपलब्ध तथ्यों, जांच रिपोर्ट और रिकॉर्ड के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि जांच एवं नियमानुसार प्रक्रिया में कोई व्यक्ति, कर्मचारी या फर्म दोषी पाई जाती है तो उसके विरुद्ध लागू नियमों और कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया के निर्देश
निगमायुक्त ने संबंधित फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि पूरी कार्रवाई नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाए तथा संबंधित पक्षों को नियमानुसार अवसर देते हुए मामले को आगे बढ़ाया जाए। नगर निगम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी एजेंसियां निर्धारित नियमों का पालन करें और किसी भी प्रकार की गलत जानकारी, जाली दस्तावेज अथवा अनुचित प्रभाव के माध्यम से प्रक्रिया को प्रभावित न किया जा सके।
अधिकारियों की भूमिका की भी होगी विस्तृत जांच
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने इस मामले में चीफ इंजीनियर को एक बार फिर व्यापक एवं विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस रिपोर्ट में संबंधित कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता की भूमिका एवं जिम्मेदारी की विशेष रूप से जांच करने को कहा गया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित अधिकारियों के स्तर पर कोई लापरवाही, चूक अथवा अनुचित कार्रवाई हुई है या नहीं। यदि किसी स्तर पर जवाबदेही बनती है तो सहायक रिकॉर्ड के साथ संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने तथा उचित कार्रवाई की सिफारिश करने को कहा गया है।
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता
नगर निगम गुरुग्राम द्वारा प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। एमसीजी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी कार्यों और टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता सामने आने पर उसकी जांच की जाएगी और जांच में आरोप सिद्ध होने की स्थिति में नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। टेंडर प्रक्रिया में हितों के टकराव, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल अथवा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी के मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर संबंधित कर्मचारी, अधिकारी अथवा फर्म के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।








