बिजली निजीकरण जनता की संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश : प्रो. संपत सिंह

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गुरुग्राम-नूंह में बिजली वितरण निजी कंपनी को सौंपने के प्रयास पर इनेलो का विरोध, हर स्तर पर संघर्ष का ऐलान

चंडीगढ़, 9 जुलाई। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का कार्य निजी कंपनी को सौंपने की योजना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली वितरण का निजीकरण बिजली क्षेत्र में सुधार नहीं, बल्कि जनता की संपत्ति, सरकारी ढांचे और सरकारी आय को निजी हाथों में सौंपने का प्रयास है।

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के कुल राजस्व का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा अकेले गुरुग्राम से आता है। उन्होंने दावा किया कि गुरुग्राम में बिजली का लाइन लॉस प्रदेश के औसत से काफी कम है और यहां से बिजली निगम को पर्याप्त आय प्राप्त होती है। ऐसे में लाभ देने वाले क्षेत्र के निजीकरण का निर्णय सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि बिजली कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि आम जनता की बुनियादी आवश्यकता है। प्रदेश में बिजली का पूरा ढांचा जनता के धन से खड़ा किया गया है और इनेलो इस सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण का हर स्तर पर विरोध करेगी।

इनेलो नेता ने बताया कि बुधवार को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग में हुई सुनवाई के दौरान पार्टी ने 112 बिंदुओं के आधार पर गुरुग्राम में बिजली निजीकरण का विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई लंबी चलेगी और पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

प्रो. संपत सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार गुरुग्राम में बिजली वितरण का लाइसेंस एक ऐसी निजी कंपनी को देने की तैयारी कर रही है, जिसका गठन जून 2025 में हुआ और जिसकी पूंजी मात्र एक करोड़ रुपये है। उनके अनुसार कंपनी के पास न तो बिजली वितरण का अनुभव है और न ही आवश्यक नेटवर्क, इसके बावजूद उसे हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना तथा आरडीएसएस योजना के तहत गुरुग्राम में हजारों करोड़ रुपये का सार्वजनिक निवेश किया गया है और अब इन्हीं परिसंपत्तियों पर निजी कंपनियों की नजर है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने उदय योजना के तहत जनता से बड़ी राशि वसूलने के साथ-साथ अतिरिक्त पूंजी और सब्सिडी भी उपलब्ध कराई है, जिसके बाद अब लाभदायक क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।

प्रो. संपत सिंह ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण ने पूर्व के कई मामलों में स्पष्ट किया है कि बिजली वितरण लाइसेंस जारी करते समय उपभोक्ताओं के हित, मौजूदा निगमों की वित्तीय स्थिरता तथा केवल लाभदायक क्षेत्रों को चुनने जैसी प्रवृत्तियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने आशंका जताई कि बिजली निजीकरण का सबसे अधिक प्रभाव किसानों, कर्मचारियों और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उनके अनुसार इससे रोजगार के अवसर घटेंगे, कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों पर असर पड़ेगा तथा गरीब उपभोक्ताओं का आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

प्रो. संपत सिंह ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस स्वयं को प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बताती है, लेकिन बिजली निजीकरण को लेकर हुई सुनवाई के दौरान उसका कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था। उन्होंने दावा किया कि इनेलो ही प्रदेश में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभा रही है और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठा रही है।

इस अवसर पर इनेलो के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष आर.एस. चौधरी, पूर्व डीजीपी एम.एस. मलिक, प्रदेश प्रवक्ता सतबीर सैनी तथा पार्टी कार्यालय सचिव नछत्तर सिंह मल्हान भी उपस्थित रहे।

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Author: Bharat Sarathi

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