रेवाड़ी, 09 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के चेयरमैन आलोक कुमार को तत्काल पद से हटाने तथा उनके कार्यकाल में हुई भर्तियों की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच कराने की मांग की है।
जारी बयान में विद्रोही ने आरोप लगाया कि आयोग के कार्यकाल के दौरान प्रदेश के पिछड़े, दलित तथा स्थानीय युवाओं के साथ भेदभाव किया गया तथा प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी की नौकरियों में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने दावा किया कि आरक्षित वर्ग के कई पदों पर योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर भर्तियां अधूरी छोड़ी गईं।
वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि आयोग की कार्यप्रणाली के कारण हरियाणा के युवाओं में असंतोष व्याप्त है और चयन प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रतिभाशाली युवा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सहित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, ऐसे में राज्य स्तर पर योग्य उम्मीदवारों की कमी का तर्क उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में चयनित अभ्यर्थियों को ओबीसी प्रमाण पत्र, क्रीमीलेयर तथा अन्य दस्तावेजों से संबंधित आपत्तियों के आधार पर नियुक्ति नहीं दी गई। उनके अनुसार इन मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
विद्रोही ने मांग की कि एचपीएससी चेयरमैन को तत्काल पद से हटाकर उनके कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों, चयन प्रक्रियाओं तथा निर्णयों की पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।








