4 से 10 मिमी बारिश में शहरों-कस्बों में जलभराव, कीचड़ और गंदगी से जनजीवन प्रभावित
प्री-मानसून सफाई पर खर्च हुए लाखों रुपये की जांच की मांग, भ्रष्टाचार के लगाए आरोप
रेवाड़ी, 3 जुलाई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि मानसून की पहली मामूली बारिश ने ही भाजपा सरकार और प्रशासन के प्री-मानसून सफाई संबंधी दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि मात्र 4 से 10 मिलीमीटर वर्षा में ही पूरे अहीरवाल क्षेत्र के शहर और कस्बे जलभराव, कीचड़ और गंदगी से भर गए, जिससे सरकार की तैयारियों की वास्तविकता सामने आ गई।
विद्रोही ने कहा कि वीरवार को हुई हल्की बारिश के बाद रेवाड़ी, नारनौल, महेंद्रगढ़, अटेली, कनीना, बावल, धारूहेड़ा, गुरुग्राम, पटौदी, सोहना और तावडू सहित अनेक शहरों और कस्बों में जलभराव की स्थिति बन गई। जगह-जगह नालियां और सीवर ओवरफ्लो हो गए तथा सड़कों पर कीचड़ और गंदगी फैल गई। इससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि मानसून से पहले मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी मीडिया में बड़े-बड़े दावे कर रहे थे कि नालियों, सीवरों और ड्रेनेज सिस्टम की व्यापक सफाई कर दी गई है और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या नहीं होगी। लेकिन पहली ही बारिश ने इन सभी दावों को खोखला साबित कर दिया।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि यदि इतनी कम बारिश में ही शहरों की यह स्थिति है तो मानसून के चरम पर पहुंचने के बाद हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्री-मानसून सफाई के लिए जारी किए गए लाखों रुपये आखिर कहां खर्च हुए और उनकी जवाबदेही किसकी है।
उन्होंने मांग की कि प्री-मानसून सफाई पर हुए खर्च की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि कागजों में सफाई दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विद्रोही ने आरोप लगाया कि पहली ही बारिश ने सफाई व्यवस्था में लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।








