1500 से अधिक अधिवक्ता हो रहे प्रभावित, न्यायालय प्रशासन से मांगा जवाब और तत्काल बहाली की मांग

गुरुग्राम, 27 जून। गुरुग्राम न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों की सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला बार एसोसिएशन, गुरुग्राम के पूर्व प्रधान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी संतोख सिंह ने कोर्ट नंबर 3 एवं 4 के सामने बने रैंप को तोड़े जाने तथा अधिवक्ताओं के बैठने के लिए निर्धारित हॉल संख्या 1, 2 एवं 3 को लंबे समय से बंद रखे जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए न्यायालय प्रशासन से जवाब तलब किया है।
चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि 24 मई 2026 को न्यायालय परिसर स्थित रिकॉर्ड रूम में लगी भीषण आग के बाद परिसर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। आग से क्षतिग्रस्त रिकॉर्ड रूम का मलबा हटाने का कार्य किया जाना आवश्यक था, लेकिन इस दौरान कोर्ट नंबर 3 और 4 के सामने बने उस रैंप को भी तोड़ दिया गया, जिसका मलबा हटाने के कार्य से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने इसे अनावश्यक कार्रवाई बताते हुए कहा कि इससे अधिवक्ताओं, वादकारियों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि स्पष्ट किया जाए कि रैंप किसके आदेश पर और किस उद्देश्य से तोड़ा गया। साथ ही यह भी बताया जाए कि इसका पुनर्निर्माण कब तक पूरा किया जाएगा, ताकि न्यायालय आने वाले लोगों को दोबारा सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
पूर्व बार प्रधान ने अधिवक्ताओं के बैठने के लिए निर्धारित हॉल संख्या 1, 2 एवं 3 के लगातार बंद रहने पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड रूम में आग लगने की घटना के बाद इन हॉलों को बंद कर दिया गया था, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इन्हें नहीं खोला गया है। इससे करीब 1500 से अधिक अधिवक्ताओं के दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मुवक्किलों से चर्चा, मुकदमों की तैयारी और न्यायिक कार्यों के संचालन में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर न्याय व्यवस्था की कार्यकुशलता पर भी पड़ रहा है।
चौधरी संतोख सिंह ने प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की कि अधिवक्ताओं के हितों और न्यायिक कार्यों की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए हॉल संख्या 1, 2 एवं 3 को तत्काल प्रभाव से पुनः खोला जाए तथा न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं शीघ्र बहाल की जाएं।
उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर में किसी भी निर्माण अथवा मरम्मत कार्य के दौरान अधिवक्ताओं एवं आम नागरिकों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सार्वजनिक उपयोग की सुविधाओं को बिना ठोस आवश्यकता क्षतिग्रस्त करना उचित नहीं है और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन को अधिक संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए।








