“साहबी डैम प्रदूषण पर 10 साल बाद संज्ञान लेना प्रशासनिक विफलता का प्रमाण”
“भिवाड़ी-खुशखेड़ा के औद्योगिक अपशिष्ट से प्रभावित क्षेत्र को अब तक नहीं मिली राहत”
“उच्चस्तरीय बैठकों के बावजूद समाधान नहीं, जनता को मिला केवल आश्वासन”
रेवाड़ी, 24 जून। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने साहबी डैम में जलभराव, अपशिष्ट जल और प्रदूषण की समस्या पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा हाल ही में संज्ञान लिए जाने को हास्यासद और क्षेत्र की जनता के साथ क्रूर मजाक करार दिया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के भिवाड़ी और खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाले रसायनयुक्त प्रदूषित पानी के कारण धारूहेड़ा, साहबी डैम और आसपास के लगभग दो दर्जन गांव पिछले एक दशक से जलभराव, दुर्गंध और प्रदूषण की गंभीर समस्या झेल रहे हैं, ऐसे में अब जाकर इस मामले का संज्ञान लेना प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।
विद्रोही ने सवाल उठाया कि यदि केन्द्रीय सरकार, पर्यावरण मंत्रालय और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पिछले दस वर्षों से इस समस्या की जानकारी नहीं थी, तो लगातार आयोजित होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों का उद्देश्य क्या था। उन्होंने कहा कि यदि अब सीपीसीबी ने पहली बार इस समस्या को स्वीकार किया है, तो यह स्पष्ट करता है कि वर्षों से होने वाली बैठकों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और जनता को केवल आश्वासन दिए जाते रहे।
उन्होंने कहा कि साहबी नदी और साहबी डैम क्षेत्र में प्रदूषित अपशिष्ट जल के कारण पर्यावरणीय संकट लगातार गहराता गया है। इसके बावजूद न तो राजस्थान और हरियाणा सरकारों ने प्रभावी कदम उठाए और न ही केन्द्रीय एजेंसियां समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकीं। विद्रोही के अनुसार, इस लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के हजारों नागरिकों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
वेदप्रकाश विद्रोही ने यह भी कहा कि विगत 12 वर्षों से क्षेत्र के सांसद राव इन्द्रजीत सिंह केन्द्र सरकार में राज्यमंत्री हैं, जबकि अहीरवाल क्षेत्र से जुड़े अलवर के सांसद भूपेन्द्र यादव वर्तमान में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री हैं। इसके बावजूद यदि साहबी नदी और धारूहेड़ा क्षेत्र में व्याप्त प्रदूषण, जलभराव और सड़ांध जैसी समस्याओं की जानकारी केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक नहीं पहुंच सकी, तो यह सरकार और संबंधित मंत्रालयों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव और राव इन्द्रजीत सिंह की मौजूदगी में दिल्ली और धारूहेड़ा में कई उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित हो चुकी हैं, जिनमें हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे हैं। इसके बावजूद यदि अब यह कहा जा रहा है कि सीपीसीबी ने पहली बार इस समस्या का संज्ञान लिया है, तो यह जनता को गुमराह करने का प्रयास प्रतीत होता है।
विद्रोही ने आरोप लगाया कि केन्द्र की मोदी सरकार और संबंधित विभाग इस गंभीर पर्यावरणीय संकट के समाधान में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक दशक से चली आ रही समस्या पर अब संज्ञान लेने की बात करना क्षेत्र की जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने मांग की कि साहबी डैम और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण, जलभराव और अपशिष्ट जल की समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।








