गुरुग्राम के विकास कार्यों में लाई जाएगी और तेजी, उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने की जीएमडीए परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा

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एलिवेटेड कॉरिडोर, फ्लाईओवर, सड़क अवसंरचना, जल निकासी और पेयजल परियोजनाओं की प्रगति पर हुई विस्तृत चर्चा, समयबद्ध क्रियान्वयन के दिए निर्देश

जाम मुक्त और बेहतर सुविधाओं वाला गुरुग्राम बनाने की दिशा में बड़ा कदम

3,000 करोड़ रुपये से अधिक की इंफ्रा परियोजनाओं, नए फ्लाईओवर-अंडरपास, एसपीआर एलिवेटेड कॉरिडोर और 2031 तक की पेयजल योजना पर हुई विस्तृत समीक्षा

जाम मुक्त गुरुग्राम की दिशा में बड़ा कदम, जीएमडीए क्षेत्र में आठ नए फ्लाईओवर और अंडरपास विकसित करने की योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

मानसून से पहले एसपीआर के साथ लेग-4 पूरा करने के निर्देश, लेग-3 पर घटेगा पानी का दबाव

गुरुग्राम, 11 जून। गुरुग्राम के समग्र एवं योजनाबद्ध विकास को गति देने के उद्देश्य से हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने वीरवार को जीएमडीए कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में शहरी विकास विभाग के प्रधान सलाहकार डी.एस. ढेसी, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के सीईओ पी.सी. मीणा, नगर निगम गुरुग्राम आयुक्त प्रदीप दहिया, नगर निगम मानेसर के आयुक्त प्रदीप सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में शहर की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं जैसे हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की प्रगति, सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) के निर्माण कार्यों, ग्रीन बेल्ट योजना तथा अतिक्रमण हटाने की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके अलावा आगामी मानसून को देखते हुए स्वच्छता, जल निकासी एवं जलभराव रोकने की तैयारियों, विभिन्न सड़क एवं आधारभूत संरचना परियोजनाओं तथा शहर में पर्याप्त पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

3,000 करोड़ रुपये से अधिक की इंफ्रा परियोजनाओं पर आगे बढ़ा काम

बैठक में जीएमडीए अधिकारियों ने इंफ्रा-1 से संबंधित विकास कार्यों पर प्रस्तुति देते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 1,144 करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्य धरातल पर क्रियान्वित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त 1,453 करोड़ रुपये की परियोजनाएं टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि लगभग 1,883 करोड़ रुपये के विकास कार्य योजना निर्माण एवं स्वीकृति प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से शहर की आधारभूत संरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।

जाम मुक्त गुरुग्राम की दिशा में बड़ा कदम, एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

एलिवेटेड रोड एवं कॉरिडोर परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि शहर में यातायात दबाव कम करने के उद्देश्य से पांच प्रमुख एलिवेटेड रोड परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इनमें राजीव चौक से अतुल कटारिया चौक, महावीर चौक से इफको चौक तथा अतुल कटारिया चौक से द्वारका एक्सप्रेसवे तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजनाओं के लिए कंसल्टेंट नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। वहीं एसपीआर एलिवेटेड कॉरिडोर के पहले पैकेज (एनएच-48 से वाटिका चौक) के लिए टेंडर प्रक्रिया सक्रिय है, जबकि दूसरे पैकेज (वाटिका चौक से फरीदाबाद रोड) के लिए कंसल्टेंट नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। कैबिनेट मंत्री ने इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि शहरवासियों को जाम की समस्या से राहत मिल सके।

जीएमडीए क्षेत्र में आठ नए फ्लाईओवर और अंडरपास विकसित करने की योजना पर किया जा रहा कार्य

प्रस्तावित फ्लाईओवर एवं अंडरपास परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि शहर में यातायात को सुगम बनाने तथा प्रमुख जंक्शनों पर लगने वाले जाम को कम करने के लिए जीएमडीए क्षेत्र में आठ नए फ्लाईओवर और अंडरपास विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित परियोजनाओं में बाबा कमला चौक, दादी सती चौक, गढ़ी चौक, बख्तावर चौक,अंबेडकर चौक पर फ्लाईओवर, बादशाहपुर चौक तथा मिलेनियम सिटी सेंटर पर अंडरपास तथा आरडी सिटी चौक पर फ्लाईओवर और अंडरपास बनाने का प्रस्ताव है। बैठक में मंत्री राव नरबीर सिंह ने इन परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहरवासियों को बेहतर और निर्बाध आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

सेक्टर 1 से 57 तक विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में कुल 21 विकास कार्यों पर लगभग 246.65 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा 27 परियोजनाएं, जिनकी अनुमानित लागत 274.64 करोड़ रुपये है, टेंडरिंग एवं आवंटन प्रक्रिया में हैं। वहीं लगभग 545 करोड़ रुपये की लागत के तीन बड़े विकास कार्य प्रस्तावित चरण में हैं। सेक्टर 58 से 80 तक विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में वर्तमान में 12 विकास परियोजनाओं पर लगभग 99.52 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रगति पर हैं। इसके अतिरिक्त 1,150.72 करोड़ रुपये की लागत वाली छह महत्वपूर्ण परियोजनाएं टेंडरिंग एवं आवंटन प्रक्रिया में हैं। वहीं लगभग 1,237 करोड़ रुपये की लागत के दो बड़े विकास कार्य प्रस्तावित चरण में हैं, जिनकी स्वीकृति एवं अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इसी प्रकार सेक्टर 99 से 115 तक विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में वर्तमान में छह विकास परियोजनाओं पर लगभग 649.12 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा 27.74 करोड़ रुपये की लागत वाली चार परियोजनाएं टेंडरिंग एवं आवंटन प्रक्रिया में हैं। वहीं लगभग 101.04 करोड़ रुपये की लागत के छह विकास कार्य प्रस्तावित चरण में हैं, जिनके लिए आवश्यक स्वीकृतियां एवं अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने तथा गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क, जल निकासी, पेयजल एवं अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों में तेजी लाकर आमजन को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने तथा तेजी से विकसित हो रहे नए गुरुग्राम क्षेत्र में सड़क, जल निकासी और अन्य आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए।

शहर में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्षमता विस्तार परियोजनाओं में लाई जाएगी तेजी

पेयजल उपलब्धता की समीक्षा के दौरान जीएमडीए अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में गुरुग्राम शहर की कुल पेयजल मांग लगभग 770 एमएलडी है, जबकि जीएमडीए के दोनों जल शोधन संयंत्रों की संयुक्त उत्पादन क्षमता 670 एमएलडी है। शेष लगभग 100 एमएलडी पानी की आपूर्ति नगर निगम गुरुग्राम तथा निजी बिल्डरों द्वारा संचालित ट्यूबवेलों के माध्यम से की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2031 तक शहर की पेयजल मांग बढ़कर लगभग 1170 एमएलडी होने का अनुमान है, जिसके मद्देनजर जलापूर्ति क्षमता में चरणबद्ध वृद्धि की योजना तैयार की गई है।

बैठक में बताया गया कि जीएमडीए द्वारा लगभग 300 किलोमीटर लंबी मास्टर वाटर सप्लाई पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन एवं रखरखाव किया जा रहा है। सेक्टर 1 से 57 तथा सेक्टर 81 से 115 तक के क्षेत्र पूरी तरह जलापूर्ति नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जबकि सेक्टर 58 से 74 और सेक्टर 75 से 80 में जलापूर्ति कवरेज को 30 जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों ने प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि वर्ष 2026 से 2029 के बीच जल शोधन संयंत्रों की क्षमता बढ़ाकर कुल 1170 एमएलडी तक पहुंचाने की योजना है, जिससे वर्ष 2031 तक अनुमानित मांग को पूरा किया जा सकेगा। इस पर उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को पेयजल परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए।

द्वारका एक्सप्रेसवे सर्विस रोड और मास्टर रोड परियोजनाओं में तेजी, निर्माण कार्यों की हुई समीक्षा

चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि द्वारका एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 7.5 मीटर चौड़ी सर्विस रोड के निर्माण का कार्य 99.50 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। लगभग 27.20 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा इसे सितंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत सड़क निर्माण के साथ-साथ ड्रेनेज व्यवस्था को भी विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा सेक्टर 84, 85, 89, 86, 90 तथा 87-91 को विभाजित करने वाली मास्टर रोड के विकास कार्य की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 49.49 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में मास्टर कैरिजवे का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 10.86 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।

मानसून से पहले लेग-4 पूरा करने के निर्देश, लेग-3 पर घटेगा पानी का दबाव

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के मद्देनज़र सभी स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज परियोजनाओं का कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए, ताकि शहरवासियों को जलभराव की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी 10 दिनों में मास्टर स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के लेग-4 का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके पूर्ण होने के बाद वाटिका चौक क्षेत्र से लेग-3 में आने वाले अतिरिक्त पानी को डायवर्ट किया जा सकेगा, जिससे लेग-3 पर पानी का दबाव कम होगा और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। अधिकारियों ने बताया कि मास्टर स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के लेग-II एवं लेग-III में डी-सिल्टिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा, जलभराव संभावित क्षेत्रों में वर्षा के दौरान पानी की त्वरित निकासी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता अनुसार पंप भी स्थापित किए गए हैं। कैबिनेट मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान सभी पंप, मशीनरी और फील्ड टीमें पूरी तरह सक्रिय रहें तथा किसी भी स्थिति में जलभराव की शिकायतों का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए।

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Author: Bharat Sarathi

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