मोदी के 12 साल पर जश्न मनाए भाजपा, लेकिन इतिहास से खिलवाड़ न करे: विद्रोही

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नेहरू के 17 वर्ष के कार्यकाल को छोटा और मोदी के 12 वर्ष को सबसे बड़ा बताना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान

आजादी के नायकों को छोटा दिखाने की कोशिश देश के इतिहास और लोकतंत्र के लिए खतरनाक

चंडीगढ़/रेवाडी, 10 जून 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार 12 वर्ष तक देश का प्रधानमंत्री रहने पर भाजपा द्वारा जश्न मनाना स्वाभाविक है और किसी भी राजनीतिक दल को अपनी उपलब्धियों का उत्सव मनाने का लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, संघ और उनके समर्थक मीडिया द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के महिमामंडन के लिए इतिहास के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे भारतीय लोकतंत्र की साख को आघात पहुंच रहा है।

विद्रोही ने कहा कि दुनिया जानती है कि स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से लेकर 27 मई 1964 तक लगातार लगभग 17 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहे। इसके बावजूद भाजपा और उसके समर्थक यह प्रचारित करने में लगे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का 12 वर्ष का कार्यकाल देश के इतिहास में सबसे लंबा है। उन्होंने कहा कि यह दावा न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि इतिहास के साथ भी अन्याय है।

क्या 1947 से 1952 तक भारत आजाद नहीं था?

वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि भाजपा और संघ से जुड़े कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि भारत में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ था, इसलिए 15 अगस्त 1947 से 1952 तक पंडित नेहरू के प्रधानमंत्री कार्यकाल को नहीं गिना जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि यह तर्क स्वीकार कर लिया जाए तो क्या इसका अर्थ यह है कि 15 अगस्त 1947 से 1952 तक भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र नहीं था?

उन्होंने कहा कि यदि भारत 1947 में स्वतंत्र नहीं हुआ था तो फिर हर वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का क्या औचित्य रह जाता है? ऐसे तर्क केवल एक व्यक्ति विशेष को इतिहास से बड़ा साबित करने के लिए गढ़े जा रहे हैं।

आजादी के नायकों का अपमान स्वीकार्य नहीं

विद्रोही ने कहा कि सत्ता के मद में चूर लोग स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के योगदान को कमतर आंकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन वैचारिक शक्तियों का स्वतंत्रता आंदोलन में कोई उल्लेखनीय योगदान नहीं था, वही आज सत्ता के बल पर आजादी के नायकों की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के कारण ही भारत को आजादी मिली तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हुई। यदि इन नेताओं ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष न किया होता तो आज किसी भी सामान्य व्यक्ति के लिए देश का प्रधानमंत्री बनने का अवसर संभव नहीं होता।

लोकतंत्र की मजबूती सत्य और इतिहास के सम्मान में

ग्रामीण भारत के अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सत्य, इतिहास और संविधान के सम्मान में निहित होती है। राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास को बदलने या तथ्यों को विकृत करने की प्रवृत्ति लोकतंत्र को कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता की उपलब्धियों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इसके लिए देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के महान नेताओं को छोटा दिखाना उचित नहीं है।

“राजनीतिक उत्सव मनाइए, उपलब्धियों का प्रचार कीजिए, लेकिन इतिहास को बदलकर नहीं। भारत का लोकतंत्र सत्य और तथ्यों पर टिका है, प्रचार और मिथ्या आख्यानों पर नहीं।”वेदप्रकाश विद्रोही

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Author: Bharat Sarathi

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