आरोपी की पुनर्नियुक्ति किसके संरक्षण में हुई, सरकार जवाब दे : महिला कांग्रेस
महिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल आज करेगा कुरुक्षेत्र दौरा, बड़े खुलासों का दावा
गुरुग्राम/कुरुक्षेत्र, 9 जून। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष पर्ल चौधरी ने कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में नाबालिग बच्ची के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न प्रकरण को लेकर भाजपा सरकार, स्वास्थ्य विभाग और राज्य महिला आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है, जबकि जनता यह जानना चाहती है कि गंभीर शिकायतों के बावजूद आरोपी को दोबारा जिम्मेदारी किस आधार पर सौंपी गई।
एक टीवी बहस के दौरान हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया और पर्ल चौधरी आमने-सामने हुईं। पर्ल चौधरी ने आरोप लगाया कि बहस के दौरान महिला आयोग की अध्यक्ष ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों का बचाव करने का प्रयास किया, जबकि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक अपराध की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि उस प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण की भी पड़ताल होनी चाहिए जिसके कारण आरोपी व्यवस्था में बना रहा। पर्ल चौधरी ने सवाल उठाया कि यदि संबंधित चिकित्सक के खिलाफ पहले से शिकायतें, विभागीय जांच और सीएम विंडो पर शिकायतें दर्ज थीं, तो उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और उन्हें किस स्तर पर दबाया गया।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि ऐसे व्यक्ति को, जिसके खिलाफ पहले से गंभीर आरोप और शिकायतें मौजूद थीं, सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा डॉक्टर/कंसल्टेंट के रूप में किसके आदेश और संरक्षण में नियुक्त किया गया। उन्होंने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए कहा कि पुनर्नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए।
पर्ल चौधरी ने मांग की कि तत्काल यह स्पष्ट किया जाए कि पुनर्नियुक्ति की फाइल किस अधिकारी ने स्वीकृत की, किस स्तर पर इसकी सिफारिश की गई और क्या नियुक्ति से पूर्व संबंधित व्यक्ति के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतों के बावजूद पुनर्नियुक्ति हुई है तो केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि उसे संरक्षण देने वाले अधिकारी भी जांच के दायरे में लाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन क्यों नहीं किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुरुक्षेत्र मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का गृह जिला है, इसलिए सरकार की जवाबदेही और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
पर्ल चौधरी ने आरोप लगाया कि महिला आयोग को पीड़िता और उसके परिवार के पक्ष में खड़े होकर निष्पक्ष जांच की मांग करनी चाहिए थी, लेकिन आयोग की प्राथमिकता सरकार की छवि बचाने की अधिक दिखाई दी। उन्होंने कहा कि महिला आयोग का दायित्व किसी सरकार का बचाव करना नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चियों के अधिकारों एवं सुरक्षा की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि बहस के दौरान आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्तियों को लेकर उठाए गए सवालों पर महिला आयोग की अध्यक्ष संयमित और तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय अपनी भाषा पर नियंत्रण खोती नजर आईं। इससे यह संदेश गया कि आयोग कठिन सवालों का सामना करने के बजाय उनसे बचने का प्रयास कर रहा है।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र, महिला सुरक्षा व्यवस्था, महिला एवं बाल विकास प्रणाली तथा प्रशासनिक जवाबदेही की व्यापक विफलता का प्रतीक बन चुका है। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल कल्याण तंत्र की अनेक खामियों को उजागर कर दिया है।
उन्होंने घोषणा की कि हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को कुरुक्षेत्र पहुंचेगा। प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार, स्थानीय नागरिकों और संबंधित पक्षों से मुलाकात कर तथ्यों को एकत्रित करेगा तथा पूरे प्रकरण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक करेगा।
पर्ल चौधरी ने कहा कि प्रदेश की बेटियां और महिलाएं यह जानना चाहती हैं कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई, आरोपी को संरक्षण किसने दिया, पुनर्नियुक्ति का निर्णय किसने लिया और पीड़ित परिवार को न्याय कब मिलेगा। उन्होंने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर सभी दोषियों एवं संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।







