मुख्य सचिव ने की यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा
चंडीगढ़, 9 जून-हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि राज्य सरकार समन्वित, समयबद्ध और तकनीक आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सम्बन्धित विभागों को सीवेज शोधन, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी मौजूदा तथा प्रस्तावित, सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि इन्हें 31 दिसंबर, 2027 तक पूरा किया जाए ताकि यमुना नदी और उससे जुड़े सहायक नालों के जल की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
श्री रस्तोगी आज यहां एक उच्च स्तरीय बैठक में यमुना एक्शन प्लान की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक के दौरान बताया गया कि यमुना कैचमेंट एरिया में नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), माइक्रो-एसटीपी तथा अपशिष्ट जल डायवर्जन अवसंरचना के विकास के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति हो रही है।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री विनय प्रताप सिंह ने बताया कि 425 एमएलडी से अधिक अतिरिक्त सीवेज शोधन क्षमता तथा 150 एमएलडी से अधिक औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन क्षमता से संबंधित परियोजनाएं विभिन्न स्तरों पर निविदा, स्वीकृति और क्रियान्वयन की प्रक्रिया में हैं।
बैठक में जिन प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की गई उनमें पानीपत के जाट्टल रोड स्थित 10 एमएलडी क्षमता के मौजूदा एसटीपी का उन्नयन शामिल है। इसके बाद वहां घरेलू सीवेज के साथ-साथ औद्योगिक अपशिष्ट जल का भी उपचार किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त करनाल जिले के विभिन्न गांवों में छह माइक्रो-एसटीपी स्थापित करने की योजना की भी समीक्षा की गई। इस पहल से नालों में अनुपचारित ग्रे-वॉटर के प्रवाह को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
सोनीपत में नाथूपुर और कुंडली में प्रस्तावित सीईटीपी तथा राठधना एसटीपी की क्षमता वृद्धि से तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट जल उपचार अवसंरचना को और मजबूती मिलेगी। बैठक में गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्रस्तावित सीईटीपी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई, जिनमें प्रतापगढ़, मिर्जापुर तथा गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों से संबंधित प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
बैठक में मुंगेशपुर ड्रेन पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यहां अनुपचारित अपशिष्ट जल को उपचार सुविधाओं की ओर मोड़ा जा रहा है। साथ ही, इस ड्रेन के दिल्ली में प्रवेश करने से पहले जल गुणवत्ता सुधारने के लिए बायो-रिमेडिएशन उपायों की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रमुख नालों पर चिन्हित डिस्चार्ज प्वाइंट्स को व्यवस्थित रूप से टैप किया जा रहा है, ताकि अनुपचारित अपशिष्ट जल प्राकृतिक जल स्रोतों तक न पहुंच सके।
मुख्य सचिव ने सभी एसटीपी और सीईटीपी में निर्धारित मानकों के अनुसार अपशिष्ट जल का निष्कासन सुनिश्चित करने तथा नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने नालों में कचरा फेंकने तथा अवैध रूप से अपशिष्ट जल छोड़ने की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े प्रवर्तन उपाय अपनाने पर भी बल दिया। मौजूदा एसटीपी और सीईटीपी की गुणवत्ता की कठोर जांच की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वयं चयनित संयंत्रों का दौरा कर उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे और निर्धारित मानकों के अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
परियोजनाओं की समय-सीमा की समीक्षा करते हुए श्री अनुराग रस्तोगी ने विभागों को भूमि संबंधी तथा प्रक्रियात्मक लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए, ताकि निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि यमुना एक्शन प्लान के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरणों, एचएसआईआईडीसी, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा जिला प्रशासन के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
अधिकारियों ने बताया कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, सोनीपत और रोहतक में अपशिष्ट जल उपचार से संबंधित प्रमुख अवसंरचना परियोजनाएं वर्तमान में निविदा और स्वीकृति चरण में हैं तथा आने वाले वर्षों में इससे राज्य की अपशिष्ट जल उपचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बैठक में पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री सुशील सरवान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।








