जनवादी महिला समिति और सीटू ने लगाया महिला विरोधी रवैये का आरोप
गुरुग्राम, 9 जून। जनवादी महिला समिति और सीटू ने हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया को तत्काल पद से हटाने की मांग की है। दोनों संगठनों ने आरोप लगाया कि महिला आयोग की अध्यक्ष अपने संवैधानिक दायित्वों के अनुरूप कार्य करने में विफल रही हैं तथा उनके हालिया बयान महिलाओं के प्रति असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना हैं।
जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान, राज्य महासचिव उषा सरोहा, राज्य अध्यक्ष सविता तथा सीटू के राज्य महासचिव जयभगवान और कुरुक्षेत्र जिला संयोजक रानी ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर कहा कि कुरुक्षेत्र नागरिक अस्पताल में एक नाबालिग के साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामले में 7 जून को महिला आयोग अध्यक्ष रेनू भाटिया द्वारा अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ को सीधे तौर पर दोषी ठहराना और अपराध के आरोपी डॉक्टर से मिलीभगत के आरोप लगाना बेहद आपत्तिजनक है। नेताओं ने कहा कि एक नर्स की बेटी का उदाहरण देकर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी भी असहनीय और अनुचित है।
संगठनों का आरोप है कि स्टाफ नर्सों पर इस गंभीर अपराध का दोष मढ़ना उन लोगों को बचाने का प्रयास प्रतीत होता है जिन्होंने आरोपों से घिरे डॉक्टर को दोबारा नियुक्ति दी। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के बजाय महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा महिला कर्मचारियों को निशाना बनाना उनके पद की गरिमा और जिम्मेदारी के विपरीत है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि रेनू भाटिया पहले भी कई बार महिला विरोधी बयान दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न के आरोपी पूर्व मंत्री संदीप सिंह को क्लीन चिट देने, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए उन्हीं को जिम्मेदार ठहराने तथा विभिन्न मामलों में धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाले हस्तक्षेप उनके पूर्व आचरण के उदाहरण हैं। उनका कहना है कि इस बार भी वास्तविक दोषियों को बचाने और पहले से भारी दबाव में कार्यरत महिला कर्मचारियों को प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया है।
संयुक्त बयान में कहा गया कि हरियाणा में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तथा गिरता लिंगानुपात भी गंभीर चिंता का विषय है। नेताओं ने आरोप लगाया कि महिला अधिकारों के प्रति संवेदनहीन सोच रखने वाले लोगों का महत्वपूर्ण संस्थागत पदों पर होना भी इस स्थिति का एक कारण है।
उन्होंने कहा कि महिला आयोग जैसी संस्थाओं का गठन महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव, उत्पीड़न और असमानता को दूर करने तथा उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन रेनू भाटिया की कार्यप्रणाली से स्पष्ट होता है कि उन्हें अपने पद के उद्देश्य और दायित्वों की पर्याप्त समझ नहीं है। नेताओं का आरोप है कि कई अवसरों पर वह महिला आयोग की अध्यक्ष के बजाय भाजपा सरकार की प्रवक्ता और आरएसएस की प्रचारक की भूमिका में दिखाई देती हैं।
जनवादी महिला समिति और सीटू ने मांग की है कि रेनू भाटिया को तत्काल महिला आयोग अध्यक्ष पद से हटाकर उनके स्थान पर ऐसी महिला की नियुक्ति की जाए जो महिलाओं के अधिकारों और न्याय के लिए निष्पक्ष रूप से कार्य कर सके। साथ ही संगठनों ने कुरुक्षेत्र के विवादित डॉक्टर को दोबारा नियुक्त करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और महिला अटेंडेंटों की पर्याप्त एवं नियमित नियुक्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की है।








