हरियाणा से 27 हजार से अधिक पांडुलिपियां अपलोड
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने की प्रगति की समीक्षा
चंडीगढ़, 25 मई-हरियाणा ने ज्ञान भारतम मिशन के तहत अब तक कुल 27,587 पांडुलिपियां अपलोड की हैं। यह राज्य की समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और दस्तावेजी विरासत के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि पांडुलिपियों का संरक्षण केवल अभिलेखीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराने ज्ञान, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए इसे अधिक सुलभ बनाएगी।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभिन्न जिलों में चल रहे सर्वेक्षण कार्य का आकलन किया और सभी विभागों को जन-जागरूकता और दस्तावेजीकरण के प्रयासों में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बहुमूल्य पांडुलिपियों का व्यापक दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के क्रियान्वयन के लिए अभिलेखागार विभाग को राज्य नोडल विभाग नामित किया गया है। इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्थायी समिति का गठन किया गया है। इसके अलावा, सर्वेक्षण प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सभी जिलों में जिला स्तरीय समितियां और नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं।
अभिलेखागार विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. साकेत कुमार ने बताया कि सर्वेक्षण की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और जिला स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पहल एक व्यापक डिजिटल भंडार तैयार करने में सहायक होगी, जिससे देश की ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने और उसे विश्वभर के शोधकर्ताओं, विद्वानों तथा भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
जिलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुरुक्षेत्र ने अब तक ज्ञान भारतम पोर्टल पर 15,818 पांडुलिपियां अपलोड की हैं। इसके लिए मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन की सराहना करते हुए अन्य जिलों से भी सर्वेक्षण और दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को तेज करने का आह्वान किया।
मुख्य सचिव ने अभिलेखागार विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की भी समीक्षा की। इन अभियानों के तहत प्रिंट और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को पांडुलिपियों की पहचान और दस्तावेजीकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गौरतलब है कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ज्ञान भारतम मिशन का उद्देश्य देश की पांडुलिपि विरासत का सर्वेक्षण, दस्तावेजीकरण, संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार करना है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहकर्ताओं का सहयोग लिया जा रहा है।
बैठक में अभिलेखागार विभाग की निदेशक डॉ. बलप्रीत सिंह और उप निदेशक श्रीमती मंजू यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।









