बीजेपी सरकार की अव्यवस्था ने ली दादरी के अस्पताल में बुजुर्गी की जान- हुड्डा
चंडीगढ़, 23 मई। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार प्रदेश की जनता के जीवन से खिलवाड़ कर रही है। खुद पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकार को आईना दिखाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत पर गहरी चिंता जताई है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है। मेडिकल ऑफिसर और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के सैंकड़ों पद वर्षों से खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार भर्ती करने में कोई रुचि नहीं दिखा रही। जिला अस्पतालों में मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट को यह कहना पड़ा कि प्रत्येक जिला अस्पताल में कम से कम एक सीटी स्कैन मशीन, एक एमआरआई मशीन और आईसीयू की सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
हुड्डा ने कहा कि इसी बीच दादरी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बुजुर्ग को सिर्फ आधार कार्ड न होने के कारण सरकारी अस्पताल में इलाज से इनकार कर दिया गया। अंत में वह फर्श पर तड़प-तड़प कर जान दे बैठा।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह संस्थागत हत्या है। क्योंकि बीजेपी सरकार ने व्यवस्थाओं को इतना उलझा दिया है कि आम जनता दिन-रात अलग-अलग कामों के लिए कागजात बनाने और इकट्ठा करने में ही लगी रहती है, फिर भी वो पूरे नहीं हो पाते। सरकार ने आयुष्मान योजना के नाम पर मुफ्त इलाज का ढोंग रचा, क्योंकि वो अस्पतालों को सैकड़ों करोड़ रुपये का भुगतान कभी समय पर नहीं करती। इसके चलते अस्पताल इलाज से इंकार कर देते हैं और मरीजों की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ होता है।
हुड्डा ने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में हर सरकारी अस्पताल में हर प्रकार का इलाज पूरी तरह मुफ्त था — न कोई कागजात की जरूरत, न कोई पैसे की। लेकिन भाजपा ने कागजों को इंसानी जान से भी ऊपर रख दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उदासीनता इसी बात से साफ है कि उसके 11 वर्षों के शासन में एक भी नया मेडिकल कॉलेज या स्वास्थ्य विश्वविद्यालय स्थापित नहीं किया गया। जबकि कांग्रेस सरकार के दौरान एक स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, 6 नए मेडिकल कॉलेज, एम्स, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और ब्लॉक व गांव स्तर तक सैकड़ों सीएचसी-पीएचसी स्थापित किए गए। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि भाजपा सरकार कांग्रेस द्वारा स्थापित इन संस्थानों में स्टाफ भरने तक नहीं दे रही।









