“बेटियों बचाओ” भाजपा के नारे खोखले, हरियाणा में लिंगानुपात 895 तक गिरा : पर्ल चौधरी
गुरुग्राम, 20 मई। हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष पर्ल चौधरी ने NCRB की हालिया रिपोर्ट और हरियाणा में लगातार गिरते लिंगानुपात को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि तमाम तकलीफों के बावजूद एक तरफ हरियाणा की बेटियां खेल, शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ यही बेटियां अपने ही समाज में असुरक्षा, भेदभाव और हिंसा का सामना करने को मजबूर हैं।
पर्ल चौधरी ने कहा कि NCRB के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में 5,737 दहेज हत्याओं के मामले दर्ज हुए। मध्यप्रदेश में 450, राजस्थान में 386 और पश्चिम बंगाल में 337 मामले सामने आए। हरियाणा में 177 दहेज हत्याओं के मामले दर्ज हुए, जो राज्य की जनसंख्या के अनुपात में बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार राज्य में 1000 लड़कों पर 950 लड़कियों तक लिंगानुपात ले जाने का लक्ष्य बताती है, जबकि देश में मौजूदा लिंगानुपात 1000 लड़कों पर करीब 1020 लड़कियों का बताया जाता है। इसके बावजूद हरियाणा में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। सरकार पिछले साल लिंगानुपात 923 तक पहुंचने का दावा करती रही, लेकिन इस साल के पहले चार महीनों में यह घटकर 895 तक पहुंच गया है। चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ के साथ-साथ गुरुग्राम जैसे जिलों में यह संख्या और भी चिंताजनक है।
पर्ल चौधरी ने कहा कि यह हरियाणा के लिए गंभीर चेतावनी है, हमारी बेटियों ने ओलंपिक से लेकर शिक्षा तक हर क्षेत्र में देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा के परिणामों में पहले चार स्थान बेटियों ने हासिल किए हैं। पटौदी से सटे जाट गांव की दलित समाज की बिटिया दीपिका मेघवाल ने टॉप किया है इससे साफ है कि बेटियां क्षमता में किसी से भी कम नहीं हैं, लेकिन पितृसत्तात्मक सोच और महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता आज भी समाज पर हावी है।
उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा और भारत का नाम रोशन करने वाली विनेश फौगाट जैसी ओलंपियन बेटियों को भी प्रताड़ना, अपमान और अन्याय सहना पड़ सकता है, तो आम परिवारों की बेटियों की सुरक्षा का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। भाजपा सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर केवल नारे दिए, जुमलेबाजी की, ज़मीनी बदलाव नहीं किया।
पर्ल चौधरी ने भाजपा नेताओं और विधायकों के महिलाओं को लेकर दिए गए बयानों को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में 20 मार्च 2025 को भाजपा की एक महिला विधायक द्वारा दहेज और पानी निकासी को लेकर सुनाया गया कथित “मजाक” लोकतंत्र के मंदिर में दहेज प्रथा का सामान्यीकरण था। “दहेज में गाड़ी के साथ लड़की के बाप को एक फावड़ा भी दे देना चाहिए था” जैसी टिप्पणी पर मुख्यमंत्री सहित सत्ता पक्ष के विधायकों का ठहाके लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। यह उन परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जिनकी बेटियां दहेज की आग में झोंक दी जाती हैं।
उन्होंने भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा के उस बयान की भी कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति खोने वाली महिलाओं की पीड़ा पर असंवेदनशील टिप्पणी की थी। पर्ल चौधरी ने कहा कि भाजपा नेताओं के ऐसे बयान महिलाओं के प्रति उनकी असली सोच उजागर करते हैं।
पर्ल चौधरी ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के शब्दों को याद करते हुए कहा —
“मैं किसी समाज का आकलन यह देखकर करता हूँ कि वहाँ की महिलाओं की स्थिति कैसी है।”
उन्होंने कहा कि अगर किसी समाज में बेटियों को जन्म से पहले मारा जाए, दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाए, और उनके दर्द पर सत्ता के लोग मजाक करें, तो यह केवल कानून व्यवस्था की विफलता नहीं बल्कि सामाजिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
पर्ल चौधरी ने मांग की कि दहेज हत्या और महिला उत्पीड़न के मामलों के लिए बनी विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें जल्दी से पीड़ितों को न्याय दिलाए, महिलाओं का अपमान करने वाले जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई हो तथा गिरते लिंगानुपात वाले जिलों में व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल लक्ष्य बताने के बजाय यह जवाब देना चाहिए कि जब देश का लिंगानुपात 1000 लड़कों पर करीब 1020 लड़कियों तक बताया जा रहा है, तब हरियाणा 895 जैसे चिंताजनक आंकड़े तक कैसे पहुंच गया।
अंत में पर्ल चौधरी ने कहा कि “बेटियों को केवल मंचों से सम्मान देने से नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था में बराबरी, सुरक्षा और न्याय देने से बदलाव आएगा।”









