ईरान संकट और महंगे कच्चे तेल से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव, मंदी के संकेत गहरे: दीपक मैनी

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ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट सेक्टर पर बढ़ती लागत का सीधा असर

गुरुग्राम, 19 मई। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय उद्योग जगत की चिंताओं को बढ़ा दिया है। दीपक मैनी ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता और लगातार बढ़ती उत्पादन लागत के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है तथा आर्थिक मंदी के संकेत अब कई प्रमुख सेक्टरों में साफ दिखाई देने लगे हैं।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में लोहा, स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर, पीतल और कार्बाइड जैसे औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में 15 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, निर्माण और मशीनरी उद्योगों की लागत संरचना पर पड़ा है। कारों, कमर्शियल वाहनों और दोपहिया वाहनों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश कच्चे माल महंगे होने से ऑटो कंपनियों पर कीमतें बढ़ाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में वाहन कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

दीपक मैनी ने कहा कि युद्ध जैसे हालात से पहले वैश्विक सप्लाई चेन धीरे-धीरे स्थिर हो रही थी और भारतीय अर्थव्यवस्था भी निर्यात वृद्धि के दम पर मजबूती की ओर बढ़ रही थी। वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात लगभग 770 अरब डॉलर तक पहुंचा था। इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत मांग बनी हुई थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में समुद्री माल ढुलाई, बीमा प्रीमियम और आयात लागत में भारी वृद्धि ने उद्योगों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। इसका सीधा प्रभाव पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन लागत तेजी से बढ़ी है, जिसका असर लगभग हर उद्योग और उपभोक्ता उत्पाद पर दिखाई देने लगा है।

दीपक मैनी के अनुसार बढ़ती महंगाई और अनिश्चित आर्थिक माहौल के कारण उपभोक्ता अब बड़े खर्च और निवेश संबंधी फैसलों को टालने लगे हैं। इसका सबसे अधिक असर ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ रहा है। जब उद्योगों में उत्पादन और निवेश की गति धीमी होती है तो रोजगार सृजन और बाजार मांग दोनों प्रभावित होते हैं, जिससे आर्थिक मंदी और गहरी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि ईरान संकट लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर केवल औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की विकास दर, उपभोक्ता मांग, रियल एस्टेट निवेश और रोजगार बाजार पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

दीपक मैनी ने केंद्र सरकार से उद्योगों को राहत देने के लिए ऊर्जा लागत नियंत्रण, निर्यात प्रोत्साहन, लॉजिस्टिक्स समर्थन और ब्याज दरों में राहत जैसे कदम उठाने की मांग की, ताकि वैश्विक संकट के बीच भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और आर्थिक गतिविधियों को स्थिर बनाए रखा जा सके।

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Author: Bharat Sarathi

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