पेट्रोल-डीजल बचत की “रील राजनीति” पर विद्रोही का हमला

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“मंत्री-संतरी की फोटो इवेंट नौटंकी में बचत नहीं, उल्टा ज्यादा तेल हो रहा खर्च”

रेवाडी, 16 मई। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने पेट्रोल-डीजल बचाने के नाम पर भाजपा नेताओं द्वारा किए जा रहे फोटो इवेंट और रील अभियान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो मंत्री और नेता बाइक, ई-रिक्शा, बस, मेट्रो अथवा पैदल चलकर कार्यालय जाने की “प्रायोजित रील” बनवा रहे हैं, वे यह भी बताएं कि वापस अपने घर कैसे पहुंचे।

विद्रोही ने कहा कि वास्तविकता यह है कि ऐसे फोटो इवेंट के दौरान नेताओं के पीछे सरकारी गाड़ियों का लंबा काफिला चलता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की बचत होने के बजाय और अधिक ईंधन खर्च होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए भाजपा के मंत्री-संतरी दिखावटी अभियान चला रहे हैं और जनता को भ्रमित किया जा रहा है।

उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मीडिया संस्थानों को यह जांच करनी चाहिए कि रील बनाकर प्रचार करने वाले नेता वापसी में सरकारी गाड़ियों का उपयोग करते हैं या नहीं। यदि गाड़ियों का काफिला खाली चलकर गंतव्य तक पहुंचता है और फिर नेताओं को वापस लाता है, तो आखिर ईंधन की बचत कहां हुई।

विद्रोही ने कहा कि “तेल बचाने” के नाम पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार मंत्रीयों और अधिकारियों के काफिलों में उपयोग हुए पेट्रोल-डीजल का ऑडिट सार्वजनिक करे। उनका कहना था कि यदि वास्तविक आंकड़े सामने आएं तो यह पूरी “रील राजनीति” और “फोटो इवेंट नौटंकी” खुद ही बेनकाब हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि बचत करने वाली सरकारें दिखावा नहीं करतीं, बल्कि सरकारी खर्चों में वास्तविक कटौती करके उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

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Author: Bharat Sarathi

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