मक्का में 10 रुपये और मूंग में 12 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि को बताया किसानों के साथ धोखा
गुरुग्राम, 15 मई। संयुक्त किसान मोर्चा, गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोतरी पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि किसानों की उम्मीदों और बढ़ती कृषि लागत के मुकाबले बेहद निराशाजनक और अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल तथा मूंग के एमएसपी में केवल 12 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी यह साबित करती है कि सरकार खेती और किसानों की वास्तविक समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीफ की अन्य फसलों पर भी बेहद मामूली वृद्धि की गई है, जो बढ़ती महंगाई और कृषि लागत के सामने किसानों के साथ धोखे के समान है।
चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि आज खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। उर्वरक, कीटनाशक, डीजल, बिजली, मजदूरी और कृषि उपकरणों की कीमतों में भारी वृद्धि हो चुकी है, जबकि फसलों के समर्थन मूल्य में सीमित बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में किसान के लिए खेती लाभ का नहीं बल्कि जोखिम का सौदा बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि देश का किसान हर कठिन परिस्थिति में देश के लिए अन्न पैदा करता है और करोड़ों लोगों का पेट भरता है। जब-जब देश संकट में आया है, किसान ने अपनी मेहनत और त्याग से देश को संभाला है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।
उन्होंने मांग की कि किसानों की फसलों के दाम बढ़ती लागत और महंगाई के अनुरूप तय किए जाएं। यदि खेती को लाभकारी नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में कृषि और खाद्य सुरक्षा दोनों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
चौधरी संतोख सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि किसानों की वास्तविक लागत, मेहनत और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य में सम्मानजनक वृद्धि की जाए, ताकि किसान आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कर सके।








