पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, गैस और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर केंद्र सरकार को घेरा
रेवाडी, 15 मई 2026 – स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि पांच राज्यों में मतदान समाप्त होते ही केंद्र सरकार ने महंगाई का “कोड़ा” चलाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दामों में 3-3 रुपये प्रति लीटर तथा सीएनजी के दामों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाल दिया गया है।
विद्रोही ने कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और आने वाले पखवाड़े में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी तथा रसोई गैस के दामों में और वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से 2025 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरती रहीं, लेकिन तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई राहत नहीं दी और जनता की जेब से अरबों रुपये का मुनाफा कमाया।
उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध और तेल संकट के बावजूद पांच राज्यों के चुनावों के दौरान सरकार ने राजनीतिक कारणों से तेल कीमतें नहीं बढ़ाईं, लेकिन मतदान समाप्त होते ही दाम बढ़ा दिए गए। विद्रोही ने आरोप लगाया कि इससे पहले सरकार 5 किलो गैस सिलेंडर और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में क्रमशः 261 रुपये और 1000 रुपये तक की बढ़ोतरी कर चुकी है तथा घरेलू रसोई गैस के दाम भी कभी भी बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अमूल और मदर डेयरी के दूध के दामों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है और खाद्य महंगाई लगातार बढ़ रही है। विद्रोही के अनुसार अप्रैल माह में थोक महंगाई दर 8.30 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे मई में खुदरा महंगाई दर 10 से 12 प्रतिशत तक जाने की आशंका है। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई के कारण आमजन का जीवन कठिन होता जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए विद्रोही ने कहा कि खरीफ फसल 2026 के लिए 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में केवल 3 से 8 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो बढ़ती लागत और महंगाई के मुकाबले “ऊंट के मुंह में जीरा” समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार किसानों को वास्तविक राहत देने में विफल रही है।
विद्रोही ने कहा कि आने वाले समय में किसान, मजदूर, गरीब, नौकरीपेशा वर्ग, दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी-खोमचे वाले और छोटे दुकानदार सभी महंगाई की मार से प्रभावित होंगे तथा आम लोगों के लिए भरपेट भोजन करना भी कठिन हो जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि उसके दुष्परिणाम देश के हर नागरिक को भुगतने पड़ेंगे।








