राहुल गांधी की सक्रियता से तमिलनाडु में “संघी कठपुतली सरकार” बनने से रुकी, कांग्रेस के कदम को भविष्य में देशहित में माना जाएगा
चंडीगढ़/रेवाडी, 11 मई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने आरोप लगाया कि राज्यपाल पद के कथित दुरुपयोग के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में पर्दे के पीछे से “संघी कठपुतली सरकार” बनाने में विफल रहे हैं। इसी हताशा में वे कांग्रेस पर डीएमके की पीठ में छुरा घोंपने जैसे असंगत आरोप सार्वजनिक रूप से लगा रहे हैं।
विद्रोही ने कहा कि राहुल गांधी की सक्रियता के कारण तमिलनाडु में साम्प्रदायिक और फासीवादी ताकतें सत्ता पर कब्जा करने में सफल नहीं हो पाईं। उन्होंने कहा कि इसी कारण मोदी-भाजपा-संघ में हताशा स्वाभाविक है और उसी के चलते कांग्रेस पर निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले भी कई क्षेत्रीय दलों के साथ राजनीतिक धोखाधड़ी की है। विद्रोही ने हरियाणा में जजपा, पंजाब में अकाली दल, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार, बिहार में नीतीश कुमार, जम्मू-कश्मीर में पीडीपी तथा आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के साथ भाजपा के संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक गुरु लालकृष्ण आडवाणी तक के साथ राजनीतिक धोखा किया।
विद्रोही ने कहा कि यदि कांग्रेस और राहुल गांधी पहल कर टीवीके और विजय का समर्थन नहीं करते, तो तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाली सरकार बन पाना संभव नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और उनका परिवार कांग्रेस समर्थक रहा है तथा वैचारिक रूप से निकट दलों का समर्थन करना राजनीति में स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी कहा कि डीएमके और एम. के. स्टालिन भी जानते हैं कि कांग्रेस की पहल से बनी व्यवस्था उनके हित में है, क्योंकि यदि भाजपा की रणनीति सफल होती तो सबसे अधिक राजनीतिक प्रताड़ना डीएमके को ही झेलनी पड़ती।
वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि कांग्रेस को अपने जनाधार के विस्तार और राजनीतिक मजबूती का उतना ही अधिकार है जितना किसी क्षेत्रीय दल को। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु में लंबे समय तक समर्थन के बावजूद डीएमके ने कांग्रेस को सरकार में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं दी और लगातार दबाव में रखा।
उन्होंने कहा कि आज भले ही कांग्रेस के सहयोगी दल या डीएमके इस कदम की आलोचना करें, लेकिन भविष्य में सभी राहुल गांधी और कांग्रेस के तमिलनाडु में उठाए गए इस कदम को राज्य और देशहित में लिया गया निर्णय मानेंगे।









