गुरुग्राम-सोहना एक्सप्रेसवे फिर धंसा, चौधरी संतोख सिंह ने उठाए भ्रष्टाचार और गुणवत्ता पर सवाल

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“बार-बार धंस रहा एक्सप्रेसवे भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक, जनता की जान से हो रहा खिलवाड़”

गुरुग्राम, 09 मई 2026। संयुक्त किसान मोर्चा, गुरुग्राम के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान चौधरी संतोख सिंह ने गुरुग्राम के सुभाष चौक के पास गुरुग्राम-सोहना एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के धंस जाने की घटना पर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस एक्सप्रेसवे पर भारी टोल वसूला जाता है, इसके बावजूद सड़क पर लगभग 10 फीट चौड़ा गड्ढा बन जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और रखरखाव प्रणाली की पोल खोलता है।

उन्होंने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि गुरुग्राम-सोहना एक्सप्रेसवे अब तक छठी बार धंस चुका है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि बार-बार सड़क धंसने की घटनाएं आम जनता की जान को खतरे में डाल रही हैं।

“गुरुग्राम देता है सबसे अधिक राजस्व, फिर भी सड़कें बदहाल”

चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार को 50 प्रतिशत से अधिक राजस्व देने वाले गुरुग्राम की सड़कें आज बदहाली का शिकार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की मेहनत की कमाई को गुणवत्तापूर्ण विकास पर खर्च करने के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि “भ्रष्टाचार का गड्ढा कितना गहरा है, इसकी तस्वीरें स्वयं बयान कर रही हैं।” गुरुग्राम-सोहना-मुंबई एक्सप्रेसवे की मौजूदा हालत यह साबित करती है कि निर्माण एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों ने जवाबदेही निभाने के बजाय कमीशनखोरी और बंदरबांट को प्राथमिकता दी।

दोषियों पर कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच की मांग

चौधरी संतोख सिंह ने सरकार से मांग की कि निर्माण कार्य में शामिल दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त गुणवत्ता मानकों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता अब जवाब चाहती है और भ्रष्टाचार व लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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Author: Bharat Sarathi

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