“नारी वंदन” का नारा देने वाली भाजपा महिलाओं की गरिमा का कर रही अपमान : विद्रोही
रेवाड़ी, 8 मई 2026। स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्रोही ने रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव के दौरान पटौदी से भाजपा विधायक बिमला चौधरी द्वारा दिए गए उस बयान की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि कुंवारे युवा भाजपा को वोट देंगे तो उनकी शादी करवा दी जाएगी।
विद्रोही ने कहा कि मंच पर मौजूद हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव द्वारा इस बयान का हंसते हुए समर्थन करना राजनीति के बढ़ते हल्केपन और वोट हासिल करने के लिए किसी भी स्तर तक जाने की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा युवाओं और आम जनता को लुभाने के लिए ऐसे अव्यावहारिक और हास्यास्पद वादे कर रही है, जो राजनीति के गिरते स्तर का प्रमाण हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा एक ओर “नारी वंदन” का नारा देती है, महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को चुनावी वादों और राजनीतिक मजाक का माध्यम बनाकर उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाती है। विद्रोही ने सवाल उठाया कि क्या महिलाओं को केवल वोट बटोरने का साधन समझना ही भाजपा का “नारी वंदन” है? उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान महिलाओं की स्वतंत्र पहचान, सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का अपमान हैं।
उन्होंने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब भाजपा नेताओं ने विवाह जैसे संवेदनशील और पवित्र विषय को राजनीतिक मंचों पर मजाक का विषय बनाया हो। विद्रोही ने याद दिलाया कि वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता ओमप्रकाश धनखड़ ने भी भाजपा सरकार बनने पर बिहार से बहुएं लाने का बयान दिया था। इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर से हरियाणा के कुंवारों और विधुरों के लिए दुल्हन लाने जैसी टिप्पणी की थी।
विद्रोही ने कहा कि भाजपा नेताओं को इस प्रकार की हल्की और गैर-जिम्मेदाराना बातें करके वोट मांगने में जरा भी शर्म नहीं आती। उनका यह आचरण लोकतांत्रिक राजनीति की गरिमा को लगातार नीचे गिराने वाला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ परिवार का वास्तविक लक्ष्य जनसेवा नहीं बल्कि सत्ता के माध्यम से लोगों को लूटकर अपनी तिजोरियां भरना है। विद्रोही ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में हरियाणा की जनता प्रत्यक्ष रूप से देख चुकी है कि जिस स्तर का भ्रष्टाचार और सत्ता का दुरुपयोग भाजपा शासन में हुआ, वैसा प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में पहले कभी देखने को नहीं मिला।









