अब बंगाल में हिंसा का ‘रामराज्य’!

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

आलेख : संजय पराते

पश्चिम बंगाल में नई सत्ता के गठन से पहले ही हिंसा का नया दौर शुरू होने के आरोप सामने आ रहे हैं। यह स्थिति उस भरोसे पर सवाल खड़े करती है, जो चुनाव के बाद शांति बहाली को लेकर व्यक्त किया गया था।

चूंकि राज्य की पुलिस व्यवस्था अभी भी चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के नियंत्रण में रहती है, ऐसे में चुनाव परिणामों के बाद की हिंसक घटनाओं को लेकर जिम्मेदारी पर बहस तेज हो गई है। ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति की घोषणा के बावजूद, बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी के बीच हिंसा की खबरें सामने आना कई सवाल खड़े करता है।

लेख में आरोप लगाया गया है कि यह स्थिति कानून के शासन के बजाय ‘बुलडोजर राजनीति’ की ओर इशारा करती है, जिसकी चर्चा पहले भी भाजपा शासित राज्यों के संदर्भ में होती रही है। लेखक का दावा है कि आने वाले समय में राजनीतिक टकराव, विस्थापन और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।

ऐतिहासिक रूप से वामपंथी आंदोलनों की मजबूत जमीन रहे बंगाल में वैचारिक संघर्ष भी तेज होता दिखाई दे रहा है। त्रिपुरा की घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि सत्ता परिवर्तन के बाद प्रतीकों और राजनीतिक ढांचों पर हमले की घटनाएं दोहराई जा रही हैं।

तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों दोनों को निशाने पर लेते हुए लेख में कहा गया है कि राजनीतिक हिंसा से कोई भी पूरी तरह अछूता नहीं है।

लेख में यह भी आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और आचार संहिता के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर करती है।

ममता बनर्जी पर भी लेख में तीखी टिप्पणी की गई है। लेखक का कहना है कि वामपंथ को कमजोर करने की राजनीतिक रणनीतियों ने ही राज्य में वर्तमान परिस्थितियों को जन्म दिया।

साथ ही  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और चुनावी माहौल पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिनमें राजनीतिक ध्रुवीकरण के आरोप शामिल हैं।

लेख का निष्कर्ष यह है कि बंगाल की राजनीति अब एक नए संघर्ष के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां वैचारिक टकराव, सत्ता संतुलन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर बहस और तेज होगी।

लेखक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं।

Bharat Sarathi
Author: Bharat Sarathi

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!