काव्यांजलि, वैचारिक संवाद और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण ने रचा सांस्कृतिक-साहित्यिक समन्वय का नया अध्याय

गुरुग्राम/उदयपुर। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी उदयपुर में ‘अहं ब्रह्मास्मि~ नव उद्घोष फाउंडेशन’ के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक अनुष्ठान ने हिंदी भाषा, साहित्य और सनातन संस्कृति के संवर्धन की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। इस आयोजन में वैचारिक विमर्श, मैत्री सम्मिलन, काव्यांजलि तथा ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण ने प्रतिभागियों को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ’ के कंप्यूटर विभाग के ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य काव्य समारोह ‘काव्यांजलि’ रहा, जो फाउंडेशन और विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की संकल्पना और संयोजन संस्था की संस्थापिका अध्यक्ष दीपशिखा श्रीवास्तव ‘दीप’ एवं निदेशक नीरज श्रीवास्तव द्वारा किया गया, जिसमें संरक्षक राजपाल यादव, महासचिव रेणु मिश्रा रतन और अंजलि श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा।

पहला दिन:
10 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री व पत्रकार शकुंतला सरूपरिया के निवास पर आयोजित मैत्री सम्मिलन में गुरुग्राम व उदयपुर के साहित्यकारों ने विचार-विमर्श और काव्य पाठ के माध्यम से आत्मीय संबंधों को सुदृढ़ किया।
दूसरा दिन:
11 अप्रैल को आयोजित ‘काव्यांजलि’ कार्यक्रम में कुलपति के मार्गदर्शन में दीपशिखा श्रीवास्तव ‘दीप’ ने अध्यक्षता की, जबकि जोगणियां माता ट्रस्ट के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी मुख्य अतिथि रहे। विशिष्ट अतिथियों में शकुंतला सरूपरिया, नीरज जैन, निशांत मिश्रा और राष्ट्रीय कवि दिनेश सिंदल की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना से हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों—दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, जोधपुर, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर से आए कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।
तीसरा दिन:
12 अप्रैल को प्रतिभागियों ने नाथद्वारा में श्रीनाथ जी के दर्शन तथा हल्दीघाटी की ऐतिहासिक भूमि का भ्रमण कर इस साहित्यिक यात्रा को आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्पर्श प्रदान किया।
इस तीन दिवसीय आयोजन ने न केवल साहित्यकारों को एक मंच पर एकत्र किया, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और साहित्य के समन्वय का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।








