-भाजपा सरकार बिना संवाद और सहमति के इस प्रकार के निर्णय थोप रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है

गुवाहाटी/नई दिल्ली, 6 अप्रैल। असम में लागू किया जा रहा तथाकथित यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) वास्तव में यूनिफॉर्म नहीं बल्कि एक सेलेक्टिव सिविल कोड है, जिसका उद्देश्य समाज को बांटना और राजनीतिक धु्रवीकरण करना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब स्वयं सरकार यह संकेत दे रही है कि छठी अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों को इससे बाहर रखा जाएगा, तो यूनिफॉर्म शब्द का दावा पूरी तरह खोखला हो जाता है। यह बात सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव कुमारी सैलजा ने कही। वे आज असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय, गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रही थीं।
कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा इस कानून का उपयोग कानूनी सुधार के लिए नहीं बल्कि एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने और समाज में विभाजन पैदा करने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि जटिल सामाजिक और कानूनी मुद्दों को सरल राजनीतिक नारों में बदलकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि किसी भी बड़े सामाजिक और कानूनी सुधार को लागू करने से पहले व्यापक स्तर पर राज्यों, समुदायों और कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श किया जाना चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार बिना संवाद और सहमति के इस प्रकार के निर्णय थोप रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। असम की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की जनजातीय परंपराओं और संवैधानिक व्यवस्थाओं की अनदेखी कर कोई भी कानून लागू करना राज्य की पहचान पर सीधा हमला है।

सामाजिक न्याय के मुद्दे पर बोलते हुए कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस प्रतीकात्मक राजनीति नहीं बल्कि संरचनात्मक न्याय में विश्वास रखती है। उन्होंने जातिगत जनगणना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बिना अद्यतन आंकड़ों के संसाधनों का न्यायसंगत वितरण संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस असम के छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उन्हें वास्तविक लाभ मिलेगा। भूमि नीतियों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान नीतियों के कारण स्थानीय और आदिवासी समुदायों में असुरक्षा और विस्थापन की भावना बढ़ रही है। कांग्रेस इसके विपरीत स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की नीति पर कार्य करेगी।
कुमारी सैलजा ने कांग्रेस की गारंटियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी महिलाओं को 50,000 की आर्थिक सहायता, प्रत्येक परिवार को 25 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा, वरिष्ठ नागरिकों को 1,250 मासिक पेंशन तथा 10 लाख लोगों को स्थायी भूमि पट्टे देने जैसी ठोस योजनाओं के साथ जनता के बीच है। अंत में उन्होंने कहा कि असम को थोपे गए कानूनों की नहीं, बल्कि न्याय, प्रतिनिधित्व और अपनी पहचान की सुरक्षा की आवश्यकता है। भाजपा की बांटने की राजनीति अब नहीं चलेगी।





