किसान नेताओं पर गैर-जमानती वारंट वादाखिलाफी: पूनिया

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सरकार ने किया विश्वासघात, बड़ा आंदोलन की चेतावनी

चंडीगढ़, 25 मार्च – अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा राज्य कमेटी ने दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में किसान नेताओं को गिरफ्तारी नोटिस जारी किए जाने की कड़ी निंदा की है। सभा का कहना है कि यह कदम सरकार द्वारा किए गए वादों के खिलाफ है और किसानों के साथ सीधा विश्वासघात है।

प्रेस बयान जारी करते हुए किसान सभा हरियाणा राज्य कमेटी के सदस्य एवं हिसार जिला सचिव सरबत सिंह पूनिया ने कहा कि वर्ष 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी जायज मांगों को लेकर विभिन्न स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे। आंदोलन के स्थगन के समय केंद्र और हरियाणा सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ-साथ किसानों पर दर्ज सभी मुकदमों को खारिज करने का लिखित आश्वासन दिया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अब चार साल बाद आंदोलन से जुड़े मामलों को दोबारा निकालकर किसान नेताओं को नोटिस और समन भेजे जा रहे हैं। हाल ही में मंत्री रणबीर गंगवा के आवास के बाहर हुए प्रदर्शन के मामले में किसान सभा के तहसील अध्यक्ष संदीप धीरणवास सहित कई किसान नेताओं—अनिल गोरछी, मनजीत, अमित बिश्नोई, बिसला, सतीश लौरा, राजेश भाकर और अमित समेत दर्जनों किसानों—के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं।

पूनिया ने कहा कि सरकार और प्रशासन कोर्ट की कार्यवाही का हवाला देकर किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह कदम किसानों को डराने और भविष्य के आंदोलनों को कुचलने की मंशा से उठाया गया है।

अखिल भारतीय किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपने वादे के अनुसार सभी मुकदमे वापस नहीं लेती, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे और एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

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Author: Bharat Sarathi

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