हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हुए निर्णय

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हरियाणा मंत्रिमंडल ने कानूनी अस्पष्टता दूर करने के लिए पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918 में संशोधन को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 24 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में कानूनी अस्पष्टता दूर करने और मौजूदा केंद्रीय कानून के साथ तालमेल बनाने के लिए हरियाणा राज्य पर लागू पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918 की धारा 30 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।

यह निर्णय पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की सिफारिश के बाद लिया गया है, जिन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि धारा 30 में वर्तमान प्रावधान भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1865 और प्रोबेट एवं प्रशासन अधिनियम, 1881 से जुड़ा है – ये दोनों अधिनियम निरस्त कर दिए गए हैं और इनकी जगह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 लागू किया गया है।

 इस विसंगति को दूर करने के लिए मंत्रिमंडल ने पंजाब न्यायालय अधिनियम, 1918 (जैसा कि हरियाणा में लागू है) की धारा 30 की उपधारा (2) के खंड (क) में पुराने संदर्भों को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 से प्रतिस्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन का उद्देश्य अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा संचालित कुछ उत्तराधिकार संबंधी कार्यवाही में क्षेत्राधिकार को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे में स्पष्टता लाना है।

कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में न्यायिक सेवा सुधारों से संबंधित अलग-अलग फैसलों में भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार, हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी।

ये बदलाव, अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ और अन्य बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य जैसे ऐतिहासिक केस में दिए गए निर्देशों और दूसरे संबंधित फैसलों के बाद किए गए हैं। इनका उदेश्य हायर ज्यूडिशियल कैडर में भर्ती और सर्विस की शर्तों के संरचना, पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत करना है।

मंज़ूर किए गए बदलावों के अनुसार, हरियाणा सुपीरियर न्यायिक सेवा में भर्ती के तरीके में बड़े बदलाव किए गए हैं। मेरिट-कम-सीनियरिटी के ज़रिए प्रमोशन के लिए मौजूदा कोटा 65 प्रतिशत से संशोधित कर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। सीमित प्रतियोगी परीक्षा (एलसीई) के ज़रिए भर्ती का हिस्सा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे काबिल न्यायिक अधिकारी के लिए मौके बढ़ेंगे। बाकी 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरी जाती रहेंगी। हालांकि, पात्रता को बढ़ाकर इसमें न सिर्फ बार के वकील बल्कि सबऑर्डिनेट न्यायिक सेवा के योग्य उम्मीदवार भी शामिल किए गए हैं।

कैबिनेट ने पात्रता मानदंड और सेवा शर्तें में बदलाव को भी मंज़ूरी दे दी है। अलग-अलग भर्ती चैनल से आने वाले उम्मीदवारों के लिए अनुभव, आयु और योग्यता सेवा से जुड़े प्रावधानों को रैशनलाइज़ किया गया है।

इसके अलावा, वरिष्ठता और रोस्टर प्रबंधन के नियमों में बदलाव किए गए हैं। जिन मामलों में भर्ती प्रक्रिया अलग-अलग सालों में होती है, उनमें वरिष्ठता तय करने के लिए साफ़ नियम बनाए गए हैं, ताकि निष्पक्षता और एक जैसापन बना रहे। मौजूदा रोस्टर को भी बदला गया है ताकि आपसी वरिष्ठता को ठीक किया जा सके और भर्ती के अलग-अलग सूत्र के बीच संतुलित वितरण बनाए रखा जा सके।

हरियाणा कैबिनेट ने स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार के लिए फार्मेसी अधिकारियों की भर्ती के नियमों में ढील दी

कैबिनेट ने फार्मेसी अधिकारियों के लिए अनिवार्य छह महीने के प्रशिक्षण की शर्त को हटाने की मंजूरी दी

चंडीगढ़, 24 मार्च -हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्ट (ग्रुप-C) सेवा नियम, 1998 में संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य पूरे राज्य में कर्मचारियों की कमी को दूर करना और स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार करना है।

वर्ष 2021 में फार्मासिस्ट के पद का नाम बदलकर फार्मेसी अधिकारी किए जाने के बाद, न्यूनतम योग्यता को बढ़ाकर फार्मेसी में स्नातक डिग्री (Bachelor’s Degree) कर दिया गया था, साथ ही अस्पताल-आधारित फार्मेसी सेवाओं में अनिवार्य छह महीने के प्रशिक्षण की शर्त भी जोड़ दी गई थी। हालाँकि, इन कड़े मानदंडों के कारण पात्र उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो गई, जिससे सरकारी अस्पतालों और औषधालयों में पद खाली रहने लगे। इस समस्या को दूर करने के लिए कैबिनेट ने सेवा नियमों से अनिवार्य छह महीने के प्रशिक्षण की शर्त को हटाने की मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि इस कदम से पात्र उम्मीदवारों का दायरा काफी बढ़ जाएगा और भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी आएगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, कैबिनेट ने फार्मेसी अधिकारी के पद के लिए भर्ती अनुपात में बदलाव को मंजूरी दी है। सीधी भर्ती का हिस्सा 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पदोन्नति (promotion) का कोटा 25 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

कैबिनेट ने सेवा नियमों में संशोधित वेतनमानों को शामिल करने की भी मंजूरी दी है। फार्मेसी अधिकारियों के लिए वेतन स्तर को FPL-6 से अपडेट करके FPL-6A कर दिया गया है, जिसमें संशोधित मूल वेतन (basic pay) 39,900 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे वित्त विभाग पहले ही मंजूरी दे चुका है।

उम्मीद है कि इस कदम से हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी, क्योंकि इससे योग्य फार्मेसी अधिकारियों की समय पर भर्ती सुनिश्चित होगी और पूरे राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की कमी को दूर किया जा सकेगा।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के पात्रता मानदंडों में किया संशोधन

चण्डीगढ, 24 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग पैरा-मेडिकल एवं विविध पद (राज्य समूह ‘ग’) सेवा नियम, 1998 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई। इस संशोधन का उद्देश्य ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (OTA) पद के लिए शैक्षणिक योग्यताओं को अद्यतन एवं युक्तिसंगत बनाना है।

यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण में समय के साथ हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पूर्व में इस पद के लिए पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ जैसे संस्थानों से ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट का विशिष्ट डिप्लोमा कोर्स आवश्यक था। हालांकि, वर्ष 2009 से ऐसे डिप्लोमा पाठ्यक्रम बंद कर दिए गए हैं और उनकी जगह बैचलर ऑफ साइंस इन मेडिकल टेक्नोलॉजी (ऑपरेशन थिएटर/एनेस्थीसिया) जैसे डिग्री आधारित कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।

इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने वर्तमान शैक्षणिक मानकों के अनुरूप संशोधित पात्रता मानदंडों को मंजूरी दी है। संशोधित नियमों के अनुसार, सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी के पास 10+2 विज्ञान (भौतिकी, रसायन विज्ञान तथा जीवविज्ञान/गणित) के साथ किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से बैचलर डिग्री इन मेडिकल टेक्नोलॉजी (ऑपरेशन थिएटर/एनेस्थीसिया) होना अनिवार्य होगा। हिंदी या संस्कृत के ज्ञान संबंधी प्रावधान यथावत रखे गए हैं।

संशोधनों के तहत पदोन्नति एवं प्रतिनियुक्ति के माध्यम से नियुक्ति के पात्रता मानदंडों को भी युक्तिसंगत बनाते हैं । पदोन्नति के लिए अभ्यर्थी के पास 10+2 विज्ञान के साथ किसी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के ऑपरेशन थिएटर में समूह-डी कर्मचारी के रूप में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। वहीं प्रतिनियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के साथ ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के रूप में संबंधित अनुभव अनिवार्य होगा।

इस निर्णय से राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के ऑपरेशन थिएटरों में योग्य तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा मानकों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने उपयोगिता प्रमाण पत्रों के मानक प्रारूप को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अनुदान सहायता के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) प्रस्तुत करने हेतु मानक प्रारूप लागू करने के लिए हरियाणा वित्तीय नियम, खंड-1 के नियम 8.14 (ख) में संशोधन को मंजूरी दी गई।

वर्तमान में अनुदान प्राप्त करने वाले संस्थानों, स्थानीय निकायों, बोर्डों, निगमों और सहकारी समितियों को यह पुष्टि करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है कि निधि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया है, जबकि मौजूदा नियमों के तहत कोई एकसमान प्रारूप निर्धारित नहीं  था, जिसके कारण रिपोर्टिंग में भिन्नताएं पैदा हुई और एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं।

इस कमी को दूर करने के लिए  मंत्रिमंडल ने नियमों में उपयोगिता प्रमाण पत्र का विस्तृत प्रारूप शामिल करने को मंजूरी दी। मानकीकृत प्रारूप को सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले सभी विभागों और संस्थाओं में एकरूपता लाने के लिए तैयार किया गया है और इसमें हरियाणा के प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं पात्रता) से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया गया है।

संशोधित प्रावधान के तहत अनुदान स्वीकृत करने या निकालने के लिए जिम्मेदार अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि अनुदान से जुड़ी सभी शर्तें पूरी हो गई हैं। उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रधान महालेखाकार के साथ सहमति से तय अंतराल पर निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा। नियमों में सत्यापन तंत्र भी अनिवार्य किए गए हैं, जिनमें अभिलेखों का रखरखाव, सहायक दस्तावेजों की प्रस्तुति और निधियों के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए लेखा परीक्षा या निरीक्षण शामिल हैं।

इस निर्णय से हरियाणा के विभिन्न विभागों और संस्थानों में सार्वजनिक धन के उपयोग में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

मंत्रिमंडल ने हरियाणा ट्रेजरी नियमों के तहत लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) के प्रारूप में संशोधन को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा ट्रेजरी नियम, वॉल्यूम-II के नियम 4.176 के अंतर्गत निर्धारित लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) के प्रारूप में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई है। यह नियम हरियाणा राज्य में लागू है।

यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों से संबंधित वित्तीय अभिलेखों की प्रणाली को आधुनिक एवं अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इसका उपयोग विशेष रूप से किसी सरकारी कर्मचारी का एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में स्थानांतरण के समय होता है। लास्ट पे सर्टिफिकेट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जिसमें कर्मचारी के वेतन, भत्तों, कटौतियों, ऋणों एवं अग्रिमों से संबंधित विस्तृत जानकारी होती है, जिससे विभागों के बीच वित्तीय प्रक्रिया का सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है।

वित्त विभाग के स्वीकृति के अनुसार, लास्ट पे सर्टिफिकेट (LPC) के संशोधित प्रारूप में हालिया प्रशासनिक एवं वित्तीय सुधारों के अनुरूप कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। नए प्रारूप में विशेष रूप से यूनिक कोड पेयी तथा स्थायी सेवानिवृत्ति खाता नंबर (PRAN) को शामिल करने का प्रावधान किया गया है, जो हाल के वर्षों में कर्मचारी के वित्तीय अभिलेखों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। इसके अतिरिक्त, सेवा की पूरी अवधि के सत्यापन से संबंधित एक नया कॉलम भी जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।

संशोधित प्रारूप में अब कर्मचारियों से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत कर्मचारी का पैन, मोबाइल नंबर, पे—लेवल, बेसिक पे, अलाउंस विवरण दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही, इनकम टैक्स, GPF/PRAN, सब्सक्रिप्शन, एडवांस और रिकवरी सहित पूरी कटौती लेने का भी प्रावधान शामिल किया गया है।

 ‘मिश्रित भूमि उपयोग’ (Mixed Land Use) के रूप में निर्धारित भूमि के उपयोग से संबंधित नीति को मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के विभिन्न विभागीय योजनाओं में ‘मिश्रित भूमि उपयोग’ (Mixed Land Use) के रूप में निर्धारित भूमि के उपयोग से संबंधित नीति को मंजूरी दी गई है।

राज्य की कुछ विकास योजनाओं में मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों का प्रावधान किया गया है, जिनमें आवासीय, वाणिज्यिक, सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक, तथा साथ ही औद्योगिक उपयोग प्रस्तावित है। चूंकि, ऐसे मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों में अनुमत उपयोगों का प्रतिशत संबंधित विकास योजनाओं में निर्धारित नहीं किया गया था, इसलिए उनमें विभिन्न अनुमत परियोजनाओं को स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकी और वे विभाग के पास लंबित थीं। अतः, मंत्रिमंडल ने उक्त मुद्दे को हल करने के लिए एक व्यापक नीति को मंजूरी दी है।

नई तैयार की गई नीति के अनुसार, मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोगों की अनुमति दी जाएगी, भले ही संबंधित सेक्टर/जोन के शुद्ध नियोजित क्षेत्र के संबंध में कोई प्रतिशत सीमा (cap) निर्धारित न हो। हालांकि, अन्य नियोजन मापदंडों, जिनमें पहुंच और क्षेत्र के मानदंड शामिल हैं, का पालन संबंधित विकास योजना के ज़ोनिंग विनियमों और विभाग की उन मौजूदा नीतियों के अनुसार किया जाएगा जो समय-समय पर आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोगों के लिए ऐसी अनुमतियां देने हेतु बनाई गई हैं।

पहले से अधिसूचित विकास योजनाओं में, जहाँ औद्योगिक उपयोग को अन्य तीन संगत उपयोगों (अर्थात् आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत) के साथ अनुमत दिखाया गया है, वहाँ औद्योगिक उपयोग मौजूदा सीमा तक ही सीमित रहेगा और भविष्य में इसके किसी भी विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, मौजूदा परिसर के भीतर ऐसे उपयोगों के विस्तार पर विचार किया जा सकता है।

 इसके अलावा, यदि ऐसी किसी मौजूदा औद्योगिक इकाई का कोई मालिक भूमि उपयोग को अन्य तीन संगत उपयोगों (अर्थात् आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत) में से किसी एक में बदलना चाहता है, तो इसकी अनुमति केवल लागू नीतिगत मापदंडों और मानदंडों के पूर्ण अनुपालन में ही दी जाएगी।

उपरोक्त के अलावा, मिश्रित भूमि उपयोग वाली परियोजनाओं (अर्थात् आवासीय और/या वाणिज्यिक और/या संस्थागत) को 70:30 के अनुपात में अनुमति दी जाएगी; अर्थात् न्यूनतम 70 प्रतिशत मुख्य उपयोग (dominant use) और अधिकतम 30 प्रतिशत संबद्ध उपयोग (allied use) की अनुमति होगी। सहायक उपयोग का प्रतिशत 7.5 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

इस नीति  में मिश्रित भूमि उपयोग की अनुमतियों के लिए, नियोजन/क्षेत्र के मानदंडों में निम्नलिखित पैरामीटर शामिल होंगे :

क्र. सं.मुख्य उपयोग + सहायक उपयोगन्यूनतम क्षेत्र मानदंडअनुमेय FARअधिकतम ग्राउंड कवरेज
1.आवासीय + वाणिज्यिक 4.00 एकड़1.75 60%
2.वाणिज्यिक + आवासीय2.00 एकड़1.7560%
3.संस्थागत + आवासीय5.00 एकड़1.540%
4.संस्थागत + वाणिज्यिक2.00 एकड़1.540%

किफायती आवास नीति-2013 में संशोधन को मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में किफायती आवास नीति-2013 (Affordable Housing Policy-2013) में समय-समय पर किए गए संशोधनों सहित संशोधन को मंजूरी प्रदान की। यह मंजूरी हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 (Act No. 8 of 1975) की धारा 9A के तहत दी गई है।

किफायती आवास नीति-2013 के क्लॉज 5(i) के तहत अपार्टमेंट यूनिट्स के आवंटन दरें निर्धारित हैं। ये दरें वर्ष 2013 में स्वीकृत की गई थीं तथा बाद में वर्ष 2021 और 2023 में संशोधित की गई थीं। उद्योग संगठनों, विशेषकर BRICS चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज आदि से प्राप्त अभ्यावेदन में परियोजना लागत, भूमि लागत, अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों में वृद्धि तथा श्रम लागत में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए आवंटन दरों में वृद्धि की मांग की गई थी, जिससे डेवलपर्स के लिए किफायती आवास इकाइयों का निर्माण कठिन हो रहा था।

इन अभ्यावेदनों का परीक्षण करने के बाद तथा लक्षित लाभार्थियों के लिए किफायती समूह आवास नीति के लाभों का विस्तार करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया कि हरियाणा राज्य में एजीएच (Affordable Group Housing) परियोजनाओं के तहत अपार्टमेंट यूनिट्स के आवंटन दरों में औसतन 10 से 12 प्रतिशत तक वृद्धि की जाए, ताकि ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिल सके।

संशोधित दरें निम्नानुसार हैं:

Sr. No.Development PlanMaximum allotment rate on per sq. ft. carpet area basisAdditional recovery against balcony of min 5 ft. width
aGurgaonRs. 5,575/-Rs. 1,300 per sq. ft. against all balcony area in a flat adding upto and limited to 100 sq. ft., as permitted in the approved building plans, but total cost for this should not exceed Rs. 1.30 lakh per flat.
bFaridabad, SohnaRs. 5,450/-
cOther High and Medium Potential TownsRs. 5,050/-
dLow Potential TownsRs. 4,250/-

उपरोक्त दरें किफायती आवास नीति-2013 के तहत जारी सभी ऐसे लाइसेंसों पर लागू होंगी, जिनमें अभी तक आवंटन नहीं किया गया है। जिन मामलों में आवेदन आमंत्रित किए जा चुके हैं, वहां संशोधित दरों के अनुसार अंतर राशि सफल आवेदकों से वसूली जाएगी, लेकिन ड्रा पहले प्राप्त आवेदनों के आधार पर ही आयोजित किया जाएगा।

यदि कोई आवेदक संशोधित दरों पर ड्रा में भाग लेने का इच्छुक नहीं है, तो आवेदन के साथ जमा की गई राशि बिना किसी कटौती के वापस कर दी जाएगी। इस संबंध में सार्वजनिक सूचना कॉलोनाइजर द्वारा जारी की जाएगी।

कैबिनेट ने संशोधित केंद्रीय खाद्य सुरक्षा मानदंडों के अनुरूप खाद्य एवं औषधि प्रशासन सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 24 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, अधीनस्थ कार्यालय (ग्रुप-B) सेवा नियम, 2018’ में पहले संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राज्य के सेवा नियमों को भारत सरकार द्वारा जारी नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाना और राज्य में खाद्य सुरक्षा तथा औषधि प्रशासन को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे को मजबूत करना है।

यह संशोधन भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 जनवरी 2023 को जारी अधिसूचना के बाद आवश्यक हो गया था, जिसमें ‘खाद्य सुरक्षा और मानक नियम, 2011’ के तहत आवश्यक योग्यताओं और अनुभव के मानदंडों को संशोधित किया गया था। ये बदलाव विशेष रूप से प्रमुख नियामक पदों से संबंधित हैं, जिनमें पदनामित अधिकारी (Designated Officers), खाद्य सुरक्षा अधिकारी और खाद्य विश्लेषक शामिल हैं।

संशोधित केंद्रीय मानदंडों के अनुरूप, हरियाणा कैबिनेट ने एकरूपता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सेवा नियमों में भी तदनुरूप बदलावों को मंजूरी दी है। ये संशोधन उपर्युक्त पदों के लिए पात्रता की शर्तों को संशोधित करते हैं, जिसमें शैक्षिक योग्यता और पेशेवर अनुभव की आवश्यकताएं शामिल हैं। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कर्मियों के पास अद्यतन तकनीकी विशेषज्ञता हो और वे खाद्य सुरक्षा तथा औषधि विनियमन के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर रूप से तैयार हों।

इस निर्णय से खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि भर्ती और पदोन्नति राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित समकालीन मानकों पर आधारित हों।

विशेष रूप से, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, जिसे जनवरी 2011 में स्वास्थ्य विभाग से एक स्वतंत्र इकाई के रूप में अलग किया गया था, स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है और इसका नेतृत्व ‘खाद्य एवं औषधि प्रशासन आयुक्त’ द्वारा किया जाता है। यह विभाग पूरे हरियाणा में खाद्य सुरक्षा, औषधि नियंत्रण और संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार है।

हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) परियोजना की संशोधित लागत को कैबिनेट की मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च — मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में महत्वाकांक्षी हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी प्रदान की गई। यह निर्णय राज्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कैबिनेट ने परियोजना की संशोधित लागत लगभग 11,709 करोड़ रुपये को मंजूरी दी, जो पहले स्वीकृत 5,618 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है। यह संशोधन वर्तमान बाजार परिस्थितियों, परियोजना के दायरे में विस्तार और नीतिगत बदलावों के आधार पर किया गया है। संशोधित लागत का अनुमोदन पहले ही हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HORCL) के निदेशक मंडल द्वारा किया जा चुका है, जो इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है।

यह परियोजना हरियाणा रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (HRIDC) के तहत संयुक्त उद्यम मॉडल पर लागू की जा रही है, जिसमें सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी भागीदार जैसे मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और ऑलकार्गो लॉजिस्टिक्स भी शामिल हैं।

प्रोजेक्ट की लागत में बढ़ोतरी मुख्य रूप से कई वजहों से हो सकती है, जिसमें ज़मीन खरीदने की लागत में तेज़ी से बढ़ोतरी, अलाइनमेंट में चार्ज,  एनसीआर क्षेत्र में नए पुल, समय के साथ लागत में आम बढ़ोतरी, और काम के कॉन्ट्रैक्ट पर जीएसटी रेट का 12 परसेंट से बढ़कर 18 परसेंट होना शामिल है। इसके अलावा, रेलवे की पॉलिसी में बदलाव और बेहतर टेक्निकल स्पेसिफिकेशन की ज़रूरत ने भी कंस्ट्रक्शन की लागत को बढ़ाया है।इसके अलावा, रेलवे नीतियों में बदलाव और उन्नत तकनीकी मानकों की आवश्यकता के कारण निर्माण लागत में भी वृद्धि हुई है।

संशोधित लागत में परियोजना के अतिरिक्त घटकों और दायरे में विस्तार को भी शामिल किया गया है, जैसे रेलवे यार्ड के ढांचे में बदलाव और कुछ हिस्सों में कनेक्टिविटी सुधार, जो मूल योजना का हिस्सा नहीं थे। इन परिवर्तनों का उद्देश्य परिचालन दक्षता को बढ़ाना और मौजूदा तथा प्रस्तावित रेल एवं माल ढुलाई कॉरिडोर, विशेषकर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC), के साथ निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करना है।

परियोजना पूर्ण होने पर यह खरखौदा, मानेसर और सोहना जैसे प्रमुख औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब को सीधे रेल संपर्क प्रदान करेगी। साथ ही, हरियाणा एनसीआर क्षेत्र में नए टाउनशिप के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कॉरिडोर माल परिवहन को सुगम बनाने, ट्रांजिट समय कम करने और राज्य में औद्योगिकीकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राज्य सरकार के कर्मचारियों के ऋण पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक से वापस राज्य सरकार के पास पुराने सिस्टम के अनुसार स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों के ऋण पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक से वापस राज्य सरकार के पास पुराने सिस्टम के अनुसार स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।

अधिसूचना के लागू होने से पूर्व, राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को मेजर हेड-7610 के अंतर्गत वार्षिक बजट प्रावधान के माध्यम से सीधे ऋण/अग्रिम प्रदान करती थी। इसके पश्चात मंत्रिपरिषद की स्वीकृति से राज्य सरकार ने ऋण पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। इसके अनुसार, कर्मचारियों को ऋण प्रदान करने हेतु पीएनबी को ऋण पोर्टफोलियो स्थानांतरित करने की योजना जारी की गई। इस उद्देश्य के लिए राज्य सरकार ने समझौता ज्ञापन/एग्रीमेंट किया।

अब प्रस्ताव है कि 04.11.2016 से पूर्व लागू पुराने सिस्टम को पुनः लागू किया जाए। इस प्रणाली के तहत कर्मचारियों को ऋण राज्य सरकार द्वारा सीधे साधारण ब्याज दर पर, जीपीएफ दर या समय-समय पर निर्धारित दर के अनुसार दिए जाएंगे तथा ऋण खातों का संधारण प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), हरियाणा द्वारा किया जाएगा। यह निर्णय वर्तमान प्रणाली में आ रही संचालन कठिनाइयों के कारण लिया गया है।

अब मंत्रिमंडल ने कर्मचारियों को नए ऋण वितरण के लिए पुराने सिस्टम को दो चरणों में पुनः लागू करने को मंजूरी दी है।

स्वीकृति के अनुसार, राज्य बजट से कर्मचारियों को सीधे ऋण वितरण 1 जून 2026 से शुरू किया जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 375.52 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान पहले ही किया जा चुका है, ताकि 1 जून 2026 से कर्मचारियों को सीधे ऋण प्रदान किए जा सकें।

पीएनबी के माध्यम से 1 जून 2026 से नए ऋण देना बंद कर दिया जाएगा। साथ ही, 31 मई 2026 तक लिए गए सभी मौजूदा ऋणों का भुगतान कर्मचारी द्वारा पीएनबी को पुनर्समायोजन प्रक्रिया पूरी होने तक किया जाता रहेगा।

पुनर्समायोजन प्रक्रिया के अंत में सभी कर्मचारियों के पीएनबी में शेष ऋण की राशि पीएनबी को चुकाई जाएगी तथा सभी ऋण खातों को प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), हरियाणा को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

कैबिनेट ने इंडस्ट्रियल ग्रोथ और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति-2015 में संशोधन को मंज़ूरी दी

चंडीगढ़, 24 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की बैठक में 01.10.2015 की औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति में ज़रूरी बदलावों को मंज़ूरी दी गई। इसका उदेश्य रेगुलेटरी नियमों को सही बनाना, डेवलपर्स पर पैसे का बोझ कम करना और पूरे राज्य में नियोजित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

ये बदलाव इंडस्ट्री की लंबे समय से चली आ रही मांगों के जवाब में लाए गए हैं, जिसमें NAREDCO  जैसे हितधारकों से प्रतिनिधित्व भी शामिल हैं, और इनका उदेश्य टेक्सटाइल नीति जैसी दूसरी सेक्टर की नीति में लिए गए फैसलों के साथ स्पष्टता, स्थिरता और समता लाना है।

कैबिनेट का एक अहम फैसला एग्रीकल्चर ज़ोन में बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) को रेशनलाइजेशन करने से जुड़ा है। यह मंज़ूरी दी गई है कि जिन मामलों में शहरी सीमा के 500 मीटर से ज्यादा के एग्रीकल्चर ज़ोन में इंडस्ट्रियल लाइसेंस दिया गया है, और जहाँ कंप्लीशन या पार्ट कंप्लीशन सर्टिफिकेट पहले ही जारी किया जा चुका है, अगर ऐसी ज़मीन बाद में शहरी ज़ोन में या उसके 500 मीटर के अंदर शामिल हो जाती है, तो कोई ईडीसी नहीं देना होगा। लेकिन, ऐसी लाइसेंस वाली ज़मीन के बाकी अधूरे हिस्से के लिए, अर्बनाइज़ेबल ज़ोन में इंडस्ट्रियल कॉलोनियों के लिए मौजूदा नियमों के हिसाब से ईडीसी लागू होगा। इसके अलावा, ऐसे मामलों में जहां कोई डेवलपर पहले से बने या आधे-अधूरे एरिया के लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं चाहता है, तो संबंधित सरकारी एजेंसियों द्वारा दिए गए ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की असली कीमत ही ली जाएगी।

कैबिनेट ने परिवहन और संचार क्षेत्र में ज़मीन का ज्यादा अच्छे से इस्तेमाल करने के लिए बदलावों को भी मंज़ूरी दी। मौजूदा इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पॉलिसी को 19.03.2021 की चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ (सीएलयू) पॉलिसी के साथ जोड़ा गया है, जिससे परिवहन और संचार क्षेत्र में इंडस्ट्रियल यूनिट्स को इजाज़त मिल सके, जिससे लाइसेंसिंग और सीएलयू सिस्टम के बीच बराबरी पक्की हो सके। बदले हुए नियमों के तहत, अब प्रकाशित अंतिम विकास योजना के परिवहन और संचार क्षेत्र में इंडस्ट्रियल कॉलोनी बनाने की इजाज़त के साथ-साथ सीएलयू की इजाज़त भी दी जाएगी। यह इजाज़त ऐसे ज़ोन के कुल नेट प्लान्ड एरिया के 25 प्रतिशत तक होगी, ताकि कॉम्पैक्ट डेवलपमेंट के ज़रिए ज़मीन का बेहतर इस्तेमाल हो सके।

यह बदलाव ऐसे नियमों को हाइपर पोटेंशियल और हाई पोटेंशियल वाले शहरों पर भी लागू करता है, जो पहले कवर नहीं थे, इस तरह तेज़ी से बढ़ते शहरी सेंटर्स में इंडस्ट्रियल मौके बढ़ेंगे।

हरियाणा मंत्रिमंडल ने रिठाला–नरेला–कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के संशोधित डीपीआर को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 24 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में रिठाला–नरेला–कुंडली (फेज-IV) मेट्रो कॉरिडोर के हरियाणा हिस्से के लिए संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को मंजूरी प्रदान की।

स्वीकृत परियोजना के तहत मेट्रो लाइन को नरेला से कुंडली तक हरियाणा क्षेत्र में 2.726 किलोमीटर तक विस्तारित किया जाएगा, जिसमें कुंडली और नाथुपुर में दो एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे। हरियाणा के हिस्से में बनने वाली इस परियोजना की कुल लागत 545.77 रुपये  करोड़ स्वीकृत की गई है।

कुल लागत में से भारत सरकार 97.30 करोड़ रुपये का योगदान देगी, जबकि हरियाणा सरकार 448.48 करोड़ रुपये का वहन करेगी, जिसमें भूमि लागत भी शामिल है। परियोजना को अन्य डीएमआरसी परियोजनाओं की तरह केंद्र और राज्य के बीच अनुदान एवं अधीनस्थ ऋण के साझा ढांचे के तहत लागू किया जाएगा।

मंत्रिमंडल ने अद्यतन वित्तीय एवं तकनीकी मानकों को शामिल करते हुए संशोधित डीपीआर को भी मंजूरी दी। इस परियोजना को भारत सरकार के पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) से पहले ही स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

मंत्रिमंडल ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के साथ समझौते करने तथा परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए अधिकृत किया है। मुख्यमंत्री को भारत सरकार के साथ परामर्श कर कार्यान्वयन के दौरान आवश्यक संशोधनों को स्वीकृत करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है।

यह अवसंरचना परियोजना हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश (गाजियाबाद) के बीच निर्बाध संपर्क प्रदान करेगी, जिससे एनसीआर क्षेत्र में क्षेत्रीय आवागमन में सुधार होगा तथा यातायात दबाव में कमी आएगी।

हरियाणा कैबिनेट ने दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत RRTS कॉरिडोर को मंज़ूरी दी

– क्षेत्रीय कनेक्टिविटीआर्थिक विकास और शहरी गतिशीलता को बड़ा बढ़ावा मिलेगा

चंडीगढ़, 24 मार्च – हरियाणा के  मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (क्षेत्रीय त्वरित पारगमन प्रणाली–RRTS) कॉरिडोर के कार्यान्वयन को मंज़ूरी दे दी है। यह परियोजना राज्य में तेज़, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मंज़ूर प्रस्ताव के अनुसार, यह कॉरिडोर दिल्ली से पानीपत तक और उससे आगे करनाल तक फैला होगा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 136.30 किमी होगी। परियोजना की अनुमानित कुल लागत लगभग ₹33,051.15 करोड़ है, जिसमें से हरियाणा सरकार का हिस्सा ₹7,472.11 करोड़ है। राज्य का योगदान चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।

इस परियोजना में हरियाणा में 11 स्टेशनों का प्रस्ताव है, जो राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बीच निर्बाध और उच्च गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। उम्मीद है कि यह कॉरिडोर यात्रा के समय को काफी कम करेगा, सड़कों पर भीड़भाड़ कम करेगा और प्रदूषण नियंत्रण में योगदान देगा।

कैबिनेट ने यह भी मंज़ूरी दी कि डिपो के बुनियादी ढांचे की योजना NCRTC और संबंधित भूमि-स्वामित्व वाली एजेंसी द्वारा संयुक्त रूप से बनाई जाएगी। डिपो को ज़मीनी स्तर पर विकसित किया जाएगा, जिसके ऊपर वाणिज्यिक विकास के प्रावधान होंगे, जिससे अतिरिक्त राजस्व सृजन संभव हो सकेगा।

परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता को मज़बूत करने के लिए, ‘ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (TOD) नीति के तहत RRTS स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों में उच्च ‘फ्लोर एरिया रेशियो’ (FAR) की अनुमति देने के प्रावधान किए गए हैं। इससे नियोजित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा और परियोजना के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकेंगे।

कैबिनेट ने नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के प्रशासनिक सचिव को इस परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नामित किया है और उन्हें NCRTC के साथ समझौतों तथा संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया है। मुख्यमंत्री को भी कार्यान्वयन के दौरान आने वाली बाधाओं या कठिनाइयों को दूर करने के लिए आवश्यक किसी भी बदलाव या संशोधन को मंज़ूरी देने का अधिकार दिया गया है।

उम्मीद है कि यह कॉरिडोर रोज़गार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच को बेहतर बनाएगा, साथ ही संतुलित और सतत क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा।

मंत्रिमंडल की बैठक में यह भी इच्छा जताई गई कि इस RRTS कॉरिडोर का विस्तार करनाल से आगे कुरुक्षेत्र एवं साहा होते हुए पंचकूला तक किया जाए , तथा इस विषय को भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय एवं NCRTC के साथ उठाया जाए।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम 2003 में संशोधन को स्वीकृति

चंडीगढ़, 24 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुपालन में कक्षा-प्रथम में प्रवेश के लिए आयु मानदंड में परिवर्तन संबंधी हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम 2003 में संशोधन को स्वीकृति दी गई।

इन नियमों को हरियाणा विद्यालय शिक्षा (संशोधन) नियम 2026 कहा जाएगा। ये नियम कार्यालय राजपत्र में इनके प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम 2003 के नियम 131 के खंड 1 और 2 में निहित प्रावधानों के अनुसार कक्षा-प्रथम में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 5 वर्ष निर्धारित है। हालांकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के अनुसार देश भर में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए कक्षा-प्रथम में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित की गई है और उक्त संशोधन किए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 जारी की है, जिसके तहत सभी राज्यों को देश भर में प्रवेश की आयु में एकरूपता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें यह निर्धारित किया गया है कि कक्षा-प्रथम में प्रवेश चाहने वाले बच्चों की आयु 6 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुपालन में शिक्षा विभाग ने 29-03-2024 को जिला शिक्षा अधिकारियों / जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों / ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों / प्रधानाचार्यों और विद्यालय प्रमुखों को प्रवेश संबंधी निर्देश जारी किए।

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Author: Bharat Sarathi

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