संसद-विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी में भारत सरकार – ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज

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देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में लागू की तैयारी –

दिल्ली, 11 मार्च 2026 – पेरिस इंटरनेशनल ओलम्पिक से शतरंज एशिया महाद्वीप के महासचिव ब्रह्मचारी कुलदीप शतरंज ने बताया कि भारत सरकार लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए महिला आरक्षण को अगले साल से लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए नारी वंदन अधिनियम में बदलाव कर संविधान संशोधन लाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में यह व्यवस्था लागू हो जाए।

देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की तैयारी –

देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार नारी वंदन अधिनियम में बदलाव कर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की तैयारी कर रही है। कोशिश है कि यह व्यवस्था अगले साल से लागू हो जाए, ताकि आने वाले चुनावों में महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सके।

संविधान संशोधन की तैयारी –

सरकार चाहती है कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से अलग कर दिया जाए। मौजूदा कानून के अनुसार पहले जनगणना होगी, फिर सीटों का परिसीमन होगा और उसके बाद ही आरक्षण लागू किया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं। इसलिए सरकार संविधान संशोधन कर इसे जल्दी लागू करने का रास्ता तलाश रही है।

क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में लागू होगा महिला आरक्षण –

सरकार की योजना है कि 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू हो जाए। अगर ऐसा होता है तो इन राज्यों की विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे 2029 के लोकसभा चुनाव में भी महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

क्या परिसीमन प्रक्रिया को अलग करने की तैयारी है –

रकार की सबसे बड़ी कोशिश यह है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग किया जाए। इसके लिए संविधान में बदलाव करना होगा। सूत्रों के मुताबिक सरकार 33 प्रतिशत सीटों पर दोहरे प्रतिनिधित्व जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है, ताकि नई व्यवस्था को तुरंत लागू किया जा सके और महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।

क्या विपक्ष इस प्रस्ताव का समर्थन करेगा –

रकार इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस, द्रमुक और समाजवादी पार्टी समेत कई दलों से बातचीत चल रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पहले भी कह चुके हैं कि महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना चाहिए और इसे जनगणना या परिसीमन से जोड़ना जरूरी नहीं है।

संसद और राज्यसभा में कितनी बढ़ेगी महिलाओं की संख्या –

अगर महिला आरक्षण लागू होता है तो संसद में महिलाओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी। अभी लोकसभा में 543 सांसदों में से 78 महिलाएं हैं। आरक्षण लागू होने के बाद यह संख्या करीब 181 हो सकती है। वहीं राज्यसभा में 245 सदस्यों में अभी 32 महिला सांसद हैं, जो बढ़कर करीब 80 तक पहुंच सकती हैं।

सरकार ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित कराकर महिला आरक्षण लागू करने का वादा किया था। हालांकि मौजूदा कानून के तहत जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया के कारण इसे लागू होने में लंबा समय लग सकता था। इसी वजह से अब सरकार संविधान संशोधन के जरिए इसे जल्दी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

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Author: Bharat Sarathi

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