कस्तूरी दिनेश

आज जिधर देखिये उधर युवा गालों के खेतों में दाढ़ी की फसल लहलहा रही है ! क्लासिक दाढ़ी,बॉक्स दाढ़ी,फ्रेंच कट दाढ़ी और न जाने कितने स्टाइल की फेशनेबुल दाढ़ियाँ इनके चेहरों पर कब्जा किये बैठी हैं ! एक जमाना था जब सफाई पसंद लोग इस दाढ़ी-मूंछ को कचहरी के नीचे कचरा कहकर हंसी उड़ाते थे | आज कचहरी के नीचे कचरा सबकी पहली पसंद बन गई है और बेचारे मुछ्मुंडों यानी “क्लीनशेव्ड” की खिल्ली उड़ाई जा रही है |
जेन जी के इस जमाने में दाढ़ी,रोब और स्मार्टनेस का प्रतीक बन गई है | अंग्रेजों का लाया “क्लीनशेव्ड” का फैशन अब नौजवानों के हृदय को नहीं छूता. इसके उलट वे मध्यकालीन योद्धाओं के दाढ़ी-मूछ्वाले रोबीले फैशन के मुरीद हो गये हैं | कुछ दाढ़ी-मूंछ विषेशज्ञ विद्वानों का मत है कि सैलूनों की महंगाई की मार के कारण यह ट्रेंड शुरू हुआ है ! सौ मुंह,सौ बातें! आखिर युवा,साफ़-सुथरा चिकना चेहरा छोड़कर “रफ-टफ”क्यों दिखना चाहते हैं ?
हालीवुड फिल्मस्टारों की मूंछ और दाढ़ी वाले रफ-टफ फैशन की यह आंधी बालीवुड के नायकों से होती हुई आज पूरे हिदुस्तानी जेन-जी पीढ़ी के गालों और होंठों के मंच पर चढ़कर विदेशी नृत्य सालसा और हिप-हाप में मस्त है| जिम का शौक और चेहरे पर इठलाती दाढ़ी,नौजवानों के बीच करोना की संक्रामक बीमारी की तरह तांडव कर रही है |
कल मेरा एक लंगोटिया मित्र मिल गया | बड़े हंसमुख स्वभाव का है पर बेहद उदास दिखा | मैंने पूछा –“यार,क्या बात है बीमार घोड़े की तरह मुंह क्यों लटका हुआ है ?” पहले वह मेरी तरफ सूनी आँखों से घूरता रहा फिर ट्रंप के टेरिफ से चोट खाए देश की तरह परेशान आवाज में बोला—“नरेश की शादी मेरे लिए सिरदर्द हो गई यार…?” नरेश उनका सबसे छोटा लड़का है | मैंने कहा—“अब फिर क्या हो गया…? नरेश तो स्मार्ट लडका है | अच्छी-खासी नौकरी है फिर क्या मक्खी छींक गई ?” वह बोला—“पिछले हफ्ते जिस लड़की को देखने गये थे, उसका घर घराना सब अच्छा था | पिता बीमा कम्पनी में मैनेजर हैं | लड़की भी बैंक में जॉब पर है परन्तु उसने नरेश से मिलकर यह कहते हुए मना कर दिया कि उसे “क्लीन-शेव्ड पसंद नहीं है ! उसे दाढ़ी—मूंछवाला स्मार्ट लड़का चाहिए… |” मैंने इस आसान समस्या पर माथा पीटते हुए कहा—“तो इसमें क्या परेशानी है मेरे भाई, नरेश दाढ़ी-मूंछ बढ़ा ले…!” मित्र बोला–“यही तो काँटा है…!” नरेश जिस कम्पनी में काम करता है वहाँ “डेली शेव” अनिवार्य है..! मुझे समझ नहीं आता कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों घट रहा है ?”
उसकी इस समस्या से मुझे अपने घर का वह पुराना वाकया याद आ गया | तीन-चार साल पहले की बात है | मेरा परिवार भी हमारे दाढ़ी–मूंछ वाले स्मार्ट इकलौते पुत्र के लिए लड़की पसंद करने गया था तब लड़की ने यह कहते हुए मना कर दिया था कि उसे दाढ़ी-मूंछ वाले लड़के पसंद नहीं,एकदम डाकू जैसे लगते हैं…!
इस दाढ़ी के तमाशे में मित्र ही परेशान नहीं है,मैं भी परेशान हो चुका हूँ ! अब आप का क्या हाल है,आप जानिये !









